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Kullu News: जलवायु परिवर्तन में मास्टर ऑफ साइंस करवाएगा इग्नू
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डिग्री शुरू करने वाला देश का पहला मुक्त विश्वविद्यालय बना
संवाद न्यूज एजेंसी
बंजार (कुल्लू)। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) ने जुलाई 2026 शैक्षणिक सत्र से जलवायु परिवर्तन विषय में नया मास्टर ऑफ साइंस (एमएससी) डिग्री कार्यक्रम शुरू किया है। इस पहल के साथ इग्नू देश का पहला मुक्त विश्वविद्यालय बन गया है, जो इस महत्वपूर्ण विषय में समर्पित स्नातकोत्तर (पीजी) डिग्री प्रदान करेगा। यह जानकारी इग्नू अध्ययन केंद्र बंजार के सहायक समन्वयक प्रो. रामानंद ठाकुर ने दी।
उन्होंने बताया कि यह दो वर्षीय पाठ्यक्रम 80 क्रेडिट पर आधारित है। कार्यक्रम में जल संसाधन प्रबंधन, ऊर्जा प्रणालियां, कृषि, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जैव विविधता संरक्षण, कचरा प्रबंधन, सर्कुलर इकोनॉमी, पर्यावरण कानून तथा क्लाइमेट असेसमेंट टूल्स जैसे समकालीन और वैश्विक महत्व के विषय शामिल किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के अनुसार इस कार्यक्रम में प्रवेश के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में स्नातक डिग्री होना अनिवार्य है। पाठ्यक्रम की न्यूनतम अवधि दो वर्ष निर्धारित की गई है, जबकि विद्यार्थी इसे बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अधिकतम चार वर्ष के भीतर पूरा कर सकते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बंजार (कुल्लू)। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) ने जुलाई 2026 शैक्षणिक सत्र से जलवायु परिवर्तन विषय में नया मास्टर ऑफ साइंस (एमएससी) डिग्री कार्यक्रम शुरू किया है। इस पहल के साथ इग्नू देश का पहला मुक्त विश्वविद्यालय बन गया है, जो इस महत्वपूर्ण विषय में समर्पित स्नातकोत्तर (पीजी) डिग्री प्रदान करेगा। यह जानकारी इग्नू अध्ययन केंद्र बंजार के सहायक समन्वयक प्रो. रामानंद ठाकुर ने दी।
उन्होंने बताया कि यह दो वर्षीय पाठ्यक्रम 80 क्रेडिट पर आधारित है। कार्यक्रम में जल संसाधन प्रबंधन, ऊर्जा प्रणालियां, कृषि, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जैव विविधता संरक्षण, कचरा प्रबंधन, सर्कुलर इकोनॉमी, पर्यावरण कानून तथा क्लाइमेट असेसमेंट टूल्स जैसे समकालीन और वैश्विक महत्व के विषय शामिल किए गए हैं।
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उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के अनुसार इस कार्यक्रम में प्रवेश के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में स्नातक डिग्री होना अनिवार्य है। पाठ्यक्रम की न्यूनतम अवधि दो वर्ष निर्धारित की गई है, जबकि विद्यार्थी इसे बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अधिकतम चार वर्ष के भीतर पूरा कर सकते हैं।
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