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Kullu News: चंद्रताल में बढ़ती भीड़ से हिमनदों और वन्यजीवों पर खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Wed, 10 Jun 2026 06:54 AM IST
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रामसर साइट क्षेत्र में वाहनों की भीड़ से बढ़ा प्रदूषण और इकोलॉजी पर असर
अशोक राणा
केलांग (लाहौल-स्पीति)। विश्व प्रसिद्ध चंद्रताल झील की प्राकृतिक सुंदरता और अत्यंत संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र पर बढ़ता पर्यटन दबाव चिंता का कारण बनता जा रहा है। सड़क संपर्क बढ़ने के बाद यहां पर्यटकों की आवाजाही में तेज वृद्धि हुई है, जिससे क्षेत्र की नाजुक इकोलॉजी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
पहले चंद्रताल तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को बातल से ट्रेकिंग करनी पड़ती थी, जिससे केवल प्रकृति प्रेमी और साहसिक पर्यटक ही इस क्षेत्र तक पहुंच पाते थे। लेकिन अब सड़क सुविधा उपलब्ध होने के बाद बड़ी संख्या में वाहन सीधे झील तक पहुंच रहे हैं। स्थानीय जानकारों के अनुसार इन दिनों प्रतिदिन करीब 1500 से अधिक वाहन क्षेत्र में पहुंच रहे हैं, जिससे भीड़ और दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
पर्यावरण चिंतक डॉ. प्रेम दीप लाल का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में वाहनों और पर्यटकों की आवाजाही से क्षेत्र में कचरा, प्लास्टिक और कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि हो रही है। इससे चंद्रताल की पारिस्थितिक संतुलन पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।
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चंद्रताल झील अंतरराष्ट्रीय महत्व की रामसर साइट है और इसे अत्यंत संवेदनशील आर्द्रभूमि के रूप में जाना जाता है। झील के आसपास स्थित हिमनद चंद्रा, भागा और स्पीति नदियों के प्रमुख जल स्रोत माने जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ता कार्बन उत्सर्जन और मानवीय गतिविधियां इन हिमनदों को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे इनके तेजी से पिघलने की प्रक्रिया भी तेज हो सकती है।
इसके अलावा बढ़ती भीड़ से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर भी असर पड़ने की चेतावनी दी जा रही है। पर्यावरणविदों का कहना है कि चंद्रताल जैसे संवेदनशील क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या नियंत्रित करना, कचरा प्रबंधन को सख्ती से लागू करना और सतत पर्यटन नीति अपनाना बेहद जरूरी है।
चंद्रताल क्षेत्र में प्रकृति पर विपरीत असर न पड़े, इसके लिए स्थानीय लोगों के साथ मिलकर समाधान निकालने के प्रयास किए जाएंगे। - किरण भड़ाना ,उपायुक्त लाहौल-स्पीति
अशोक राणा
केलांग (लाहौल-स्पीति)। विश्व प्रसिद्ध चंद्रताल झील की प्राकृतिक सुंदरता और अत्यंत संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र पर बढ़ता पर्यटन दबाव चिंता का कारण बनता जा रहा है। सड़क संपर्क बढ़ने के बाद यहां पर्यटकों की आवाजाही में तेज वृद्धि हुई है, जिससे क्षेत्र की नाजुक इकोलॉजी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
पहले चंद्रताल तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को बातल से ट्रेकिंग करनी पड़ती थी, जिससे केवल प्रकृति प्रेमी और साहसिक पर्यटक ही इस क्षेत्र तक पहुंच पाते थे। लेकिन अब सड़क सुविधा उपलब्ध होने के बाद बड़ी संख्या में वाहन सीधे झील तक पहुंच रहे हैं। स्थानीय जानकारों के अनुसार इन दिनों प्रतिदिन करीब 1500 से अधिक वाहन क्षेत्र में पहुंच रहे हैं, जिससे भीड़ और दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
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पर्यावरण चिंतक डॉ. प्रेम दीप लाल का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में वाहनों और पर्यटकों की आवाजाही से क्षेत्र में कचरा, प्लास्टिक और कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि हो रही है। इससे चंद्रताल की पारिस्थितिक संतुलन पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।
चंद्रताल झील अंतरराष्ट्रीय महत्व की रामसर साइट है और इसे अत्यंत संवेदनशील आर्द्रभूमि के रूप में जाना जाता है। झील के आसपास स्थित हिमनद चंद्रा, भागा और स्पीति नदियों के प्रमुख जल स्रोत माने जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ता कार्बन उत्सर्जन और मानवीय गतिविधियां इन हिमनदों को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे इनके तेजी से पिघलने की प्रक्रिया भी तेज हो सकती है।
इसके अलावा बढ़ती भीड़ से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर भी असर पड़ने की चेतावनी दी जा रही है। पर्यावरणविदों का कहना है कि चंद्रताल जैसे संवेदनशील क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या नियंत्रित करना, कचरा प्रबंधन को सख्ती से लागू करना और सतत पर्यटन नीति अपनाना बेहद जरूरी है।
चंद्रताल क्षेत्र में प्रकृति पर विपरीत असर न पड़े, इसके लिए स्थानीय लोगों के साथ मिलकर समाधान निकालने के प्रयास किए जाएंगे। - किरण भड़ाना ,उपायुक्त लाहौल-स्पीति