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Kullu News: लौहागडू के पास ग्लेशियर दरकने से बढ़ा खतरा, सैंज घाटी में बाढ़ की आशंका
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Wed, 10 Jun 2026 06:05 AM IST
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ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क क्षेत्र में लौहागडू के पास गिरा ग्लेशियर। संवाद
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नदी किनारे की बस्तियों पर मंडरा रहा खतरा, विशेषज्ञों ने समय रहते सर्वे और सुरक्षा उपायों की मांग की
दरकता पहाड़ और ग्लेशियर बना चिंता, प्रशासन से सर्वे करवाने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
न्यूली (कुल्लू)। ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क क्षेत्र के लौहागडू के पास पिछले वर्ष आई आपदा के दौरान ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा नदी किनारे आ गिरा था, जो अब आगामी मानसून के लिए गंभीर खतरे का संकेत माना जा रहा है। इस घटना से सैंज घाटी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों में चिंता का माहौल है।
जानकारी के अनुसार यह स्थान सैंज घाटी के दुर्गम क्षेत्र शाक्टी-मरौड़ से लगभग 50 से 60 किलोमीटर आगे स्थित है। यहां ग्लेशियर के साथ-साथ पहाड़ी ढांचा भी लगातार दरक रहा है, जिससे स्थिति और अधिक गंभीर होती जा रही है।
स्थानीय लोगों और क्षेत्र में कार्यरत लोगों का कहना है कि यदि यह दरकाव जारी रहा तो पिन पार्वती नदी का बहाव बाधित हो सकता है। ऐसी स्थिति में अस्थायी रूप से पानी रुकने और अचानक प्रवाह खुलने पर निचले क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे भारी नुकसान की आशंका है।
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नदी किनारे स्थित शाक्टी-मरौड़, शुगाड़, न्यूली, सैंज से लेकर लारजी तक कई बस्तियां इस संभावित खतरे की जद में आ सकती हैं। वर्ष 2023 और 2025 में सैंज घाटी में आई आपदाओं और हुए नुकसान को देखते हुए स्थानीय लोग इस स्थिति को और अधिक गंभीर मान रहे हैं।
लोगों का कहना है कि समय रहते इस क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण कर आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए, ताकि किसी भी संभावित आपदा से पहले ही बचाव सुनिश्चित किया जा सके।
कोट
इस मामले में फील्ड अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। -सचिन शर्मा , डीएफओ ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क शमशी
दरकता पहाड़ और ग्लेशियर बना चिंता, प्रशासन से सर्वे करवाने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
न्यूली (कुल्लू)। ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क क्षेत्र के लौहागडू के पास पिछले वर्ष आई आपदा के दौरान ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा नदी किनारे आ गिरा था, जो अब आगामी मानसून के लिए गंभीर खतरे का संकेत माना जा रहा है। इस घटना से सैंज घाटी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों में चिंता का माहौल है।
जानकारी के अनुसार यह स्थान सैंज घाटी के दुर्गम क्षेत्र शाक्टी-मरौड़ से लगभग 50 से 60 किलोमीटर आगे स्थित है। यहां ग्लेशियर के साथ-साथ पहाड़ी ढांचा भी लगातार दरक रहा है, जिससे स्थिति और अधिक गंभीर होती जा रही है।
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स्थानीय लोगों और क्षेत्र में कार्यरत लोगों का कहना है कि यदि यह दरकाव जारी रहा तो पिन पार्वती नदी का बहाव बाधित हो सकता है। ऐसी स्थिति में अस्थायी रूप से पानी रुकने और अचानक प्रवाह खुलने पर निचले क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे भारी नुकसान की आशंका है।
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लोगों का कहना है कि समय रहते इस क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण कर आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए, ताकि किसी भी संभावित आपदा से पहले ही बचाव सुनिश्चित किया जा सके।
कोट
इस मामले में फील्ड अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। -सचिन शर्मा , डीएफओ ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क शमशी