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Kullu News: बागवान चिंतित, बाढ़ के थपेड़े सह पाएंगे क्रेटवाॅल
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ग्राउंड रिर्पाट-----कुल्लू-मनाली हाईवे पर ब्यास किनारे लगी करेटवॉल ।-संवाद
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पतलीकूहल (कुल्लू)। ब्यास की बाढ़ से कुल्लू-मनाली हाईवे को सुरक्षित करने के लिए लगाए जा रहे क्रेटवाल पर सवाल उठने लगे हैं। क्रेटवाल में वह मजबूती नहीं जो आरसीसी की दीवार में है।
बरसात में अगर बाढ़ की स्थिति बनती है तो क्रेटवाल उसे सहन नहीं कर पाएंगे। इससे हाईवे फिर अवरुद्ध हाे सकता है। हाईवे के अवरुद्ध होने की आशंका के चलते किसानों और बागवानाें की चिंता भी बढ़ गई है। जुलाई से शुरू होकर सितंबर तक सेब सीजन रहता है। अगर हाईवे अवरुद्ध होता है तो बागवानों को अपनी फसल बेचने में परेशानी आ सकती है।
वर्ष 2025 में ब्यास ने ऐसा विकराल रूप धारण किया था कि राष्ट्रीय राजमार्ग-तीन कुल्लू से लेकर मनाली तक कई स्थानों पर बह गया था। आलू ग्राउंड, क्लाथ, 14 मील, 16 मील, 17 मील और डोहलू नाला जैसे संवेदनशील स्थानों पर एनएच का बड़ा हिस्सा बहा था। हाईवे के ध्वस्त होने से घाटी का संपर्क कई दिनों तक बाधित रहा। अब एक वर्ष बीतने के बाद भी प्रभावित क्षेत्रों में आरसीसी सुरक्षा दीवारें नहीं लगाई गईं। इसकी जगह क्रेटवाल लगाए जा रहे हैं।
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घाटी की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माने जाने वाला यह हाईवे जुलाई से सितंबर तक सेब उत्पादकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहता है। इसी अवधि में सेब सीजन शुरू होता है और फसल को समय पर देश की विभिन्न फल मंडियों तक पहुंचाना जरूरी होता है। पिछले वर्ष सड़क क्षतिग्रस्त होने के कारण कई क्षेत्रों में सेब और सब्जियों की ढुलाई प्रभावित हुई थी, जिससे बागवानों और किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा था।
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पिछले साल बाढ़ के चलते एनएच क्षतिग्रस्त होने से बागवानों को भारी नुकसान हुआ था। लिहाजा बागवान हित में सड़कों का सही रखरखाव जरूरी है।
-कुंज लाल ठाकुर, अध्यक्ष, पतलीकूहल सब्जी मंडी
...
सड़कें आधुनिक भारत की भाग्य रेखाएं हैं। सड़क टूटने से हर चीज थम जाती है। कुल्लू में कोल्ड स्टोर की सुविधा न के बराबर होने के चलते सेब को यहां स्टोर करना मुश्किल है। बरसात में सड़क ज्यादा दिन खराब रहने से फसलों के उचित दाम नहीं मिल पाते।
-टिकट राम ठाकुर, बागवान कुल्लू
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बरसात में अगर बाढ़ की स्थिति बनती है तो क्रेटवाल उसे सहन नहीं कर पाएंगे। इससे हाईवे फिर अवरुद्ध हाे सकता है। हाईवे के अवरुद्ध होने की आशंका के चलते किसानों और बागवानाें की चिंता भी बढ़ गई है। जुलाई से शुरू होकर सितंबर तक सेब सीजन रहता है। अगर हाईवे अवरुद्ध होता है तो बागवानों को अपनी फसल बेचने में परेशानी आ सकती है।
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वर्ष 2025 में ब्यास ने ऐसा विकराल रूप धारण किया था कि राष्ट्रीय राजमार्ग-तीन कुल्लू से लेकर मनाली तक कई स्थानों पर बह गया था। आलू ग्राउंड, क्लाथ, 14 मील, 16 मील, 17 मील और डोहलू नाला जैसे संवेदनशील स्थानों पर एनएच का बड़ा हिस्सा बहा था। हाईवे के ध्वस्त होने से घाटी का संपर्क कई दिनों तक बाधित रहा। अब एक वर्ष बीतने के बाद भी प्रभावित क्षेत्रों में आरसीसी सुरक्षा दीवारें नहीं लगाई गईं। इसकी जगह क्रेटवाल लगाए जा रहे हैं।
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घाटी की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माने जाने वाला यह हाईवे जुलाई से सितंबर तक सेब उत्पादकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहता है। इसी अवधि में सेब सीजन शुरू होता है और फसल को समय पर देश की विभिन्न फल मंडियों तक पहुंचाना जरूरी होता है। पिछले वर्ष सड़क क्षतिग्रस्त होने के कारण कई क्षेत्रों में सेब और सब्जियों की ढुलाई प्रभावित हुई थी, जिससे बागवानों और किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा था।
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पिछले साल बाढ़ के चलते एनएच क्षतिग्रस्त होने से बागवानों को भारी नुकसान हुआ था। लिहाजा बागवान हित में सड़कों का सही रखरखाव जरूरी है।
-कुंज लाल ठाकुर, अध्यक्ष, पतलीकूहल सब्जी मंडी
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सड़कें आधुनिक भारत की भाग्य रेखाएं हैं। सड़क टूटने से हर चीज थम जाती है। कुल्लू में कोल्ड स्टोर की सुविधा न के बराबर होने के चलते सेब को यहां स्टोर करना मुश्किल है। बरसात में सड़क ज्यादा दिन खराब रहने से फसलों के उचित दाम नहीं मिल पाते।
-टिकट राम ठाकुर, बागवान कुल्लू