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Kullu News: सड़क हादसे के दोषी को ट्रायल कोर्ट में करना होगा आत्मसमर्पण
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Mon, 30 Mar 2026 08:25 AM IST
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धर्मशाला। सड़क हादसे के 12 वर्ष पुराने मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मशाला शीतल शर्मा की अदालत ने ट्रायल कोर्ट के दोष सिद्धि के फैसले को बरकरार रखा है। हालांकि अदालत ने सजा में आंशिक संशोधन करते हुए दोषी की जेल की सजा को जुर्माने में तब्दील कर दिया है। अदालत ने दोषी को विभिन्न धाराओं के तहत कुल 5 हजार रुपये जुर्माना भरने के आदेश दिए हैं।
साथ ही दोषी को 10 जून, 2026 तक ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण कर आदेश का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। जानकारी के अनुसार 29 दिसंबर 2013 को सिद्धबाड़ी निवासी राहुल उर्फ पलविंद्र ने कनेड राष्ट्रीय राजमार्ग पर तेज रफ्तार और लापरवाही से बाइक चलाते हुए सड़क किनारे खड़े ट्रक में टक्कर मार दी थी। इस हादसे में राहुल और अन्य सवारों को गंभीर चोटें आई थीं।
पुलिस जांच में पुष्टि हुई थी कि आरोपी न केवल नशे में धुत था, बल्कि उसके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं था। ट्रायल कोर्ट ने राहुल को आईपीसी की धारा 279, 337, 338 और मोटर वाहन अधिनियम की धारा 181 व 185 के तहत दोषी करार देते हुए सजा और जुर्माना सुनाया था। इस फैसले के खिलाफ राहुल ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में अपील दायर की थी।
मामले की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल शर्मा की अदालत ने पाया कि निचली अदालत द्वारा आरोपी को दोषी ठहराया जाना पूरी तरह सही है। हालांकि सजा में थोड़ी नरमी बरतते हुए न्यायालय ने कारावास की जगह जुर्माने की राशि को बढ़ाकर 5 हजार रुपये कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि दोषी जुर्माने की राशि अदा नहीं करता है, तो उसे कारावास की सजा भुगतनी होगी।
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साथ ही दोषी को 10 जून, 2026 तक ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण कर आदेश का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। जानकारी के अनुसार 29 दिसंबर 2013 को सिद्धबाड़ी निवासी राहुल उर्फ पलविंद्र ने कनेड राष्ट्रीय राजमार्ग पर तेज रफ्तार और लापरवाही से बाइक चलाते हुए सड़क किनारे खड़े ट्रक में टक्कर मार दी थी। इस हादसे में राहुल और अन्य सवारों को गंभीर चोटें आई थीं।
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पुलिस जांच में पुष्टि हुई थी कि आरोपी न केवल नशे में धुत था, बल्कि उसके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं था। ट्रायल कोर्ट ने राहुल को आईपीसी की धारा 279, 337, 338 और मोटर वाहन अधिनियम की धारा 181 व 185 के तहत दोषी करार देते हुए सजा और जुर्माना सुनाया था। इस फैसले के खिलाफ राहुल ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में अपील दायर की थी।
मामले की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल शर्मा की अदालत ने पाया कि निचली अदालत द्वारा आरोपी को दोषी ठहराया जाना पूरी तरह सही है। हालांकि सजा में थोड़ी नरमी बरतते हुए न्यायालय ने कारावास की जगह जुर्माने की राशि को बढ़ाकर 5 हजार रुपये कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि दोषी जुर्माने की राशि अदा नहीं करता है, तो उसे कारावास की सजा भुगतनी होगी।