{"_id":"69bd81d99655a2fc9d070e8a","slug":"snowfall-brings-life-to-apple-and-cash-crops-kullu-news-c-89-1-klu1001-171763-2026-03-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kullu News: बर्फबारी से सेब और नगदी फसलों को संजीवनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kullu News: बर्फबारी से सेब और नगदी फसलों को संजीवनी
विज्ञापन
लाहौल-स्पीति में लगातार हो रही बर्फबारीके बाद हुआ हिमस्खलन।-संवाद
विज्ञापन
केलांग (लाहौल-स्पीति)। लाहौल घाटी में मार्च मध्य में हुई बर्फबारी किसानों और बागवानों के लिए राहत लेकर आई है। पिछले दो दिनों के भीतर घाटी में 30 से 60 सेंटीमीटर तक हिमपात दर्ज हुआ है। कृषि विशेषज्ञों और किसानों का मानना है कि इस बर्फबारी से सेब और नगदी फसलों का उत्पादन बेहतर रहने की उम्मीद है। एक महीने से बर्फबारी नहीं होने के कारण लाहौल के खेतों और बगीचों में नमी कम हो गई थी।
इससे किसान हरे मटर की बिजाई को लेकर असमंजस में थे। कई किसानों ने खेतों में नमी कम होने के बावजूद मटर की बिजाई कर दी थी। हालांकि, बर्फबारी से पहले जिन किसानों ने मटर बिजाई की थी उनकी फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है। जिले में करीब 20,000 बीघा से अधिक भूमि पर मटर और लगभग इतने ही रकबे में गोभी समेत अन्य नगदी फसलों की खेती की जाती है। 12 हजार से बीघा से अधिक भूमि पर सेब का उत्पादन होता है। ऐसे में हिमपात को खेती और बागवानी के लिए बेहद लाभदायक माना जा रहा है।
घाटी के प्रगतिशील किसान सुरेश ने कहा कि बर्फबारी से न केवल अच्छी फसल की उम्मीद बढ़ी है बल्कि भूमिगत पेयजल स्रोत भी रिचार्ज होंगे। फूडा गांव के किसान प्रीतम सिंह ने कहा कि घाटी में हो रही बर्फबारी कृषि और बागबानी के लिए संजीवनी साबित होगी। उधर, जिला कृषि अधिकारी डॉ. चौधरी राम ने कहा कि घाटी के कई हिस्सों में करीब एक महीने पहले ही बर्फ पिघल गई थी। ऐसे में क्षेत्र में सूखे जैसी स्थिति बन गई थी। किसान मटर की बिजाई को लेकर दुविधा में थे। अब इस बर्फबारी से जमीन को पर्याप्त नमी मिलेगी और आने वाले दिनों में मटर, गोभी तथा अन्य नगदी फसलों की बिजाई के लिए यह काफी लाभकारी साबित होगी। संवाद
Trending Videos
इससे किसान हरे मटर की बिजाई को लेकर असमंजस में थे। कई किसानों ने खेतों में नमी कम होने के बावजूद मटर की बिजाई कर दी थी। हालांकि, बर्फबारी से पहले जिन किसानों ने मटर बिजाई की थी उनकी फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है। जिले में करीब 20,000 बीघा से अधिक भूमि पर मटर और लगभग इतने ही रकबे में गोभी समेत अन्य नगदी फसलों की खेती की जाती है। 12 हजार से बीघा से अधिक भूमि पर सेब का उत्पादन होता है। ऐसे में हिमपात को खेती और बागवानी के लिए बेहद लाभदायक माना जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
घाटी के प्रगतिशील किसान सुरेश ने कहा कि बर्फबारी से न केवल अच्छी फसल की उम्मीद बढ़ी है बल्कि भूमिगत पेयजल स्रोत भी रिचार्ज होंगे। फूडा गांव के किसान प्रीतम सिंह ने कहा कि घाटी में हो रही बर्फबारी कृषि और बागबानी के लिए संजीवनी साबित होगी। उधर, जिला कृषि अधिकारी डॉ. चौधरी राम ने कहा कि घाटी के कई हिस्सों में करीब एक महीने पहले ही बर्फ पिघल गई थी। ऐसे में क्षेत्र में सूखे जैसी स्थिति बन गई थी। किसान मटर की बिजाई को लेकर दुविधा में थे। अब इस बर्फबारी से जमीन को पर्याप्त नमी मिलेगी और आने वाले दिनों में मटर, गोभी तथा अन्य नगदी फसलों की बिजाई के लिए यह काफी लाभकारी साबित होगी। संवाद