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Kullu News: उधार की मशीन से ऑपरेशन, उसने भी दिया जवाब
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कुल्लू। प्रदेश के चार जिलों के मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने वाले क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में जुगाड़ से काम चल रहा है। अकेला सर्जरी विभाग महीने में 120 से 150 मरीजों के ओटी और माइनर ओटी में लेप्रोस्कोपी और सामान्य ऑपरेशन कर रहा है, लेकिन सर्जरी विभाग के पास अपनी लेप्रोस्कोपी मशीन ही नहीं है। सर्जरी विभाग अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति (गायनी) विभाग के मातृ शिशु खंड की लेप्रोस्कोपी मशीन उधार लेकर मरीजों के ऑपरेशन कर रहा था। अब यह मशीन भी धोखा दे गई है। मशीन एक माह से खराब पड़ी हुई है। इसके कारण सर्जरी और गायनी दोनों विभागों के सैकड़ों मरीजों के ऑपरेशन लटक गए है। मरीजों को लंबी तिथि ऑपरेशन के लिए मिल रही है।
वर्तमान और पूर्व सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर सुविधाएं प्रदान करने का दावा करती रही हैं, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही बयां हो रही है। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में सर्जरी विभाग के पास अपनी लेप्रोस्कोपी मशीन न होना सरकार और स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोल रहा है।
हर महीने सैकड़ों मरीजों के माइनर और बड़े ऑपरेशन करने के बाद भी सर्जरी विभाग को मशीन उपलब्ध नहीं हो पाई है, जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। तीमारदार मोहन लाल, अनिता, रक्षा, अनिल, होतम राम ने कहा कि अस्पताल की एकमात्र मशीन खराब होने की वजह से ऑपरेशन के लिए लंबी डेट मिल रही है। मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए उपचार के लिए जिले से बाहर मेडिकल कॉलेज ले जाना पड़ रहा है। ऐसे में उपचार पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। अस्पताल में मशीन होती, तो मरीजों और तीमारदारों को परेशान न होना पड़ता। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणजीत सिंह ठाकुर ने कहा कि सर्जरी विभाग को लेप्रोस्कोपी मशीन उपलब्ध करवाने के लिए सरकार और स्वास्थ्य निदेशालय से पत्राचार किया गया है।
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साल 2021 से शुरू हुई है लेप्रोस्कोपी
कुल्लू अस्पताल में तीन सर्जरी विशेषज्ञ तैनात हैं। साल 2021 से मरीजों के लेप्रोस्कोपी विधि से ऑपरेशन किए जा रहे हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार पांच सालों में करीब 4,500 से 5,000 मरीजों के ओटी (ऑपरेशन थियेटर) में बड़े ऑपरेशन हुए हैं, जबकि माइनर ओटी के साथ यह आंकड़ा बहुत बड़ा है।
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वर्तमान और पूर्व सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर सुविधाएं प्रदान करने का दावा करती रही हैं, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही बयां हो रही है। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में सर्जरी विभाग के पास अपनी लेप्रोस्कोपी मशीन न होना सरकार और स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोल रहा है।
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हर महीने सैकड़ों मरीजों के माइनर और बड़े ऑपरेशन करने के बाद भी सर्जरी विभाग को मशीन उपलब्ध नहीं हो पाई है, जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। तीमारदार मोहन लाल, अनिता, रक्षा, अनिल, होतम राम ने कहा कि अस्पताल की एकमात्र मशीन खराब होने की वजह से ऑपरेशन के लिए लंबी डेट मिल रही है। मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए उपचार के लिए जिले से बाहर मेडिकल कॉलेज ले जाना पड़ रहा है। ऐसे में उपचार पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। अस्पताल में मशीन होती, तो मरीजों और तीमारदारों को परेशान न होना पड़ता। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणजीत सिंह ठाकुर ने कहा कि सर्जरी विभाग को लेप्रोस्कोपी मशीन उपलब्ध करवाने के लिए सरकार और स्वास्थ्य निदेशालय से पत्राचार किया गया है।
साल 2021 से शुरू हुई है लेप्रोस्कोपी
कुल्लू अस्पताल में तीन सर्जरी विशेषज्ञ तैनात हैं। साल 2021 से मरीजों के लेप्रोस्कोपी विधि से ऑपरेशन किए जा रहे हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार पांच सालों में करीब 4,500 से 5,000 मरीजों के ओटी (ऑपरेशन थियेटर) में बड़े ऑपरेशन हुए हैं, जबकि माइनर ओटी के साथ यह आंकड़ा बहुत बड़ा है।
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