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Kullu News: रल्ली विवाह की परंपरा निभाई, एक माह बाद हुआ विसर्जन
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कुल्लू। जिला कुल्लू में कांगड़ा घाटी की सदियों पुरानी रल्ली के विवाह की परंपरा उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाई गई। एक महीने तक चले इस विशेष आयोजन का समापन मंगलवार को विधि-विधान के साथ विसर्जन कर किया।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार रल्ली का विवाह एक पारंपरिक रस्म है, जिसे क्षेत्र में सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना के साथ मनाया जाता है। इस दौरान जिला मुख्यालय के अखाड़ा बाजार, सुल्तानपुर, लोअर ढालपुर में विशेष पूजन, गीत-संगीत और पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मंगलवार को अंतिम दिन श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की और उसके बाद विधिवत विसर्जन किया।
इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और पूरे वातावरण में भक्ति और उत्साह का माहौल देखने को मिला। स्थानीय रिचा सूद, शिवानी सहित अन्य महिलाओं ने बताया कि यह परंपरा कांगड़ा जिले से शुरू हुई है और कुल्लू में भी हर साल इस परंपरा का निर्वहन किया जाने लगा है। इसी कड़ी में चैत्र संक्रांति से लेकर बैसाख संक्रांति तक यह परंपरा निभाई जाती है। इसमें अंतिम तीन दिनों में शादी की रस्म निभाने के लिए मेहंदी से लेकर शादी तक की तमाम रिवायत निभाई गई। उसके बाद मंगलवार को रामशिला हनुमान मंदिर के पास विसर्जन किया गया। संवाद
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स्थानीय मान्यताओं के अनुसार रल्ली का विवाह एक पारंपरिक रस्म है, जिसे क्षेत्र में सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना के साथ मनाया जाता है। इस दौरान जिला मुख्यालय के अखाड़ा बाजार, सुल्तानपुर, लोअर ढालपुर में विशेष पूजन, गीत-संगीत और पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मंगलवार को अंतिम दिन श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की और उसके बाद विधिवत विसर्जन किया।
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इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और पूरे वातावरण में भक्ति और उत्साह का माहौल देखने को मिला। स्थानीय रिचा सूद, शिवानी सहित अन्य महिलाओं ने बताया कि यह परंपरा कांगड़ा जिले से शुरू हुई है और कुल्लू में भी हर साल इस परंपरा का निर्वहन किया जाने लगा है। इसी कड़ी में चैत्र संक्रांति से लेकर बैसाख संक्रांति तक यह परंपरा निभाई जाती है। इसमें अंतिम तीन दिनों में शादी की रस्म निभाने के लिए मेहंदी से लेकर शादी तक की तमाम रिवायत निभाई गई। उसके बाद मंगलवार को रामशिला हनुमान मंदिर के पास विसर्जन किया गया। संवाद
