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Kullu News: सीमांत क्षेत्रों की चुनौतियों और महत्व से रूबरू हुए युवा
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Tue, 09 Jun 2026 05:29 AM IST
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वाइब्रेंट विलेज के तहत स्पीति के बॉर्डर में स्थित आईटीबीपी कैंप में जानकारी लेते लोग।-संवाद
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वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम में सीमा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन की मिली जानकारी
एक पेड़ वीर के नाम अभियान में किया पौधारोपण
संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग (लाहौल-स्पीति)। वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत बिहार और उत्तर प्रदेश से आए प्रतिभागियों ने रविवार को स्पीति की चीन की सीमा से सटे क्षेत्रों की भौगोलिक, सामरिक एवं पर्यावरणीय विशेषताओं की जानकारी ली। सीमांत क्षेत्रों में जाने से पहले एसीएमओ डॉ. विश्वेश सिंह ने सभी प्रतिभागियों के स्वास्थ्य की जांच की।
इसके बाद निरीक्षक मस्तराम सिंह ने सीमा क्षेत्रों की सामरिक महत्ता, भौगोलिक परिस्थितियों और सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी। आयोजन युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के तहत माई भारत तथा गृह मंत्रालय के सहयोग से आयोजित विकसित वाइब्रेंट विलेज के तहत हुआ।
वहीं, निरीक्षक जगजीत सिंह ने हथियारों एवं सुरक्षा उपकरणों का प्रदर्शन कर प्रतिभागियों को आधुनिक सुरक्षा संसाधनों से अवगत कराया। आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य जागरूकता के तहत एसीएमओ डॉ. विश्वेश सिंह ने सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) पर विशेष सत्र आयोजित किया। इस दौरान प्रतिभागियों को आपातकालीन परिस्थितियों में जीवनरक्षक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।
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दोपहर बाद प्रतिभागियों ने आईटीबीपी के अधिकारियों एवं जवानों के साथ संवाद कर उच्च हिमालयी एवं दुर्गम क्षेत्रों में उनकी जिम्मेदारियों और चुनौतियों को समझा। पर्यावरण संरक्षण सत्र में डीएफओ गोल्डी छाबड़ा ने लाहौल-स्पीति के शीत मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र की विशेषताओं पर प्रकाश डाला।
उन्होंने हिम तेंदुआ, हिमालयन आइबेक्स, भरल, हिमालयन भेड़िया, रेड फॉक्स तथा हिमालयन मार्मोट जैसे वन्यजीवों और दुर्लभ पक्षियों की प्रजातियों के संरक्षण के महत्व पर जानकारी दी। इस अवसर पर 17वीं वाहिनी आईटीबीपी फॉरवर्ड बेस पोस्ट के कमांडिंग ऑफिसर प्रवीण रावत भी मौजूद रहे।
एक पेड़ वीर के नाम अभियान में किया पौधारोपण
संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग (लाहौल-स्पीति)। वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत बिहार और उत्तर प्रदेश से आए प्रतिभागियों ने रविवार को स्पीति की चीन की सीमा से सटे क्षेत्रों की भौगोलिक, सामरिक एवं पर्यावरणीय विशेषताओं की जानकारी ली। सीमांत क्षेत्रों में जाने से पहले एसीएमओ डॉ. विश्वेश सिंह ने सभी प्रतिभागियों के स्वास्थ्य की जांच की।
इसके बाद निरीक्षक मस्तराम सिंह ने सीमा क्षेत्रों की सामरिक महत्ता, भौगोलिक परिस्थितियों और सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी। आयोजन युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के तहत माई भारत तथा गृह मंत्रालय के सहयोग से आयोजित विकसित वाइब्रेंट विलेज के तहत हुआ।
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वहीं, निरीक्षक जगजीत सिंह ने हथियारों एवं सुरक्षा उपकरणों का प्रदर्शन कर प्रतिभागियों को आधुनिक सुरक्षा संसाधनों से अवगत कराया। आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य जागरूकता के तहत एसीएमओ डॉ. विश्वेश सिंह ने सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) पर विशेष सत्र आयोजित किया। इस दौरान प्रतिभागियों को आपातकालीन परिस्थितियों में जीवनरक्षक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।
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दोपहर बाद प्रतिभागियों ने आईटीबीपी के अधिकारियों एवं जवानों के साथ संवाद कर उच्च हिमालयी एवं दुर्गम क्षेत्रों में उनकी जिम्मेदारियों और चुनौतियों को समझा। पर्यावरण संरक्षण सत्र में डीएफओ गोल्डी छाबड़ा ने लाहौल-स्पीति के शीत मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र की विशेषताओं पर प्रकाश डाला।
उन्होंने हिम तेंदुआ, हिमालयन आइबेक्स, भरल, हिमालयन भेड़िया, रेड फॉक्स तथा हिमालयन मार्मोट जैसे वन्यजीवों और दुर्लभ पक्षियों की प्रजातियों के संरक्षण के महत्व पर जानकारी दी। इस अवसर पर 17वीं वाहिनी आईटीबीपी फॉरवर्ड बेस पोस्ट के कमांडिंग ऑफिसर प्रवीण रावत भी मौजूद रहे।