{"_id":"69f0a1554dc3b7e23e050253","slug":"as-the-thamsar-glacier-melted-production-at-power-projects-increased-mandi-news-c-90-1-mnd1023-194720-2026-04-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mandi News: थमसर ग्लेशियर पिघलते ही विद्युत परियोजनाओं में बढ़ा उत्पादन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi News: थमसर ग्लेशियर पिघलते ही विद्युत परियोजनाओं में बढ़ा उत्पादन
विज्ञापन
विज्ञापन
बरोट रेजरवायर में बढ़ी पानी की आवक
उहल और लंबाडग नदी में जल स्तर बढ़ते ही विद्युत परियोजनाओं के घूमे पहिये
संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। मंडी-कांगड़ा जिले से सटे राजगुंधा के निकट थमसर ग्लेशियर के पिघलने के बाद अब बरोट स्थित जलाशय (रेजरवायर) में विद्युत उत्पादन के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी भर गया है। इसके परिणामस्वरूप जोगिंद्रनगर उपमंडल की तीनों विद्युत परियोजनाओं में उत्पादन बढ़ने से प्रतिदिन करोड़ों रुपये की आमदनी शुरू हो गई है।
बरोट स्थित पुरानी और नई रेजरवायर की संयुक्त 16.2 मिलियन क्यूबिक फीट जल क्षमता भरने के कारण पंजाब राज्य की शानन विद्युत परियोजना में 110 मेगावाट विद्युत उत्पादन शुरू हो गया है। इससे प्रतिदिन लगभग 1.25 करोड़ रुपये की आय पंजाब राज्य विद्युत बोर्ड को प्राप्त हो रही है।
वहीं, हिमाचल प्रदेश की 66 मेगावाट बस्सी पनबिजली परियोजना में प्रतिदिन लगभग 15 लाख यूनिट विद्युत उत्पादन हो रहा है, जिससे राज्य सरकार को प्रतिदिन 40 लाख रुपये से अधिक की आमदनी हो रही है। इसी प्रकार उहल पनबिजली परियोजना में भी प्रतिदिन लगभग 10 लाख यूनिट विद्युत उत्पादन शुरू हो गया है, जिससे ब्यास वैली कारपोरेशन को भी लाखों रुपये की आय प्राप्त हो रही है।
इससे पहले जोगिंद्रनगर क्षेत्र की इन तीनों पनबिजली परियोजनाओं में मार्च में लगभग 30 प्रतिशत और फरवरी में केवल 20 प्रतिशत उत्पादन ही हो पा रहा था। अप्रैल के शुरुआती 15 दिनों में शानन परियोजना में उत्पादन लगभग 60 मेगावाट था, जो अब बढ़कर 110 मेगावाट तक पहुंच गया है।
बॉक्स
शानन पनबिजली परियोजना की 15-15 मेगावाट की चार तथा 50 मेगावाट की एक टरबाइन से कुल 110 मेगावाट उत्पादन हो रहा है। इससे प्रतिदिन 26.5 लाख यूनिट विद्युत उत्पादन के साथ लगभग 1.25 करोड़ रुपये की आमदनी हो रही है। बरोट रेजरवायर में जलस्तर पूर्ण होने से पंजाब सरकार को रिकॉर्ड उत्पादन और आय प्राप्त हो रही है। -सुखविंदर सिंह, आरई शानन प्रोजेक्ट
66 मेगावाट बस्सी परियोजना में प्रतिदिन लगभग 15 लाख यूनिट विद्युत उत्पादन हो रहा है, जिससे प्रदेश सरकार को प्रतिदिन लाखों रुपये की आमदनी हो रही है। इससे पहले फरवरी और मार्च में पानी की कमी के कारण उत्पादन 50 प्रतिशत से भी कम रह गया था। -इंजीनियर दीप्ति भट्ट, आरई बस्सी परियोजना
Trending Videos
उहल और लंबाडग नदी में जल स्तर बढ़ते ही विद्युत परियोजनाओं के घूमे पहिये
संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। मंडी-कांगड़ा जिले से सटे राजगुंधा के निकट थमसर ग्लेशियर के पिघलने के बाद अब बरोट स्थित जलाशय (रेजरवायर) में विद्युत उत्पादन के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी भर गया है। इसके परिणामस्वरूप जोगिंद्रनगर उपमंडल की तीनों विद्युत परियोजनाओं में उत्पादन बढ़ने से प्रतिदिन करोड़ों रुपये की आमदनी शुरू हो गई है।
बरोट स्थित पुरानी और नई रेजरवायर की संयुक्त 16.2 मिलियन क्यूबिक फीट जल क्षमता भरने के कारण पंजाब राज्य की शानन विद्युत परियोजना में 110 मेगावाट विद्युत उत्पादन शुरू हो गया है। इससे प्रतिदिन लगभग 1.25 करोड़ रुपये की आय पंजाब राज्य विद्युत बोर्ड को प्राप्त हो रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
वहीं, हिमाचल प्रदेश की 66 मेगावाट बस्सी पनबिजली परियोजना में प्रतिदिन लगभग 15 लाख यूनिट विद्युत उत्पादन हो रहा है, जिससे राज्य सरकार को प्रतिदिन 40 लाख रुपये से अधिक की आमदनी हो रही है। इसी प्रकार उहल पनबिजली परियोजना में भी प्रतिदिन लगभग 10 लाख यूनिट विद्युत उत्पादन शुरू हो गया है, जिससे ब्यास वैली कारपोरेशन को भी लाखों रुपये की आय प्राप्त हो रही है।
इससे पहले जोगिंद्रनगर क्षेत्र की इन तीनों पनबिजली परियोजनाओं में मार्च में लगभग 30 प्रतिशत और फरवरी में केवल 20 प्रतिशत उत्पादन ही हो पा रहा था। अप्रैल के शुरुआती 15 दिनों में शानन परियोजना में उत्पादन लगभग 60 मेगावाट था, जो अब बढ़कर 110 मेगावाट तक पहुंच गया है।
बॉक्स
शानन पनबिजली परियोजना की 15-15 मेगावाट की चार तथा 50 मेगावाट की एक टरबाइन से कुल 110 मेगावाट उत्पादन हो रहा है। इससे प्रतिदिन 26.5 लाख यूनिट विद्युत उत्पादन के साथ लगभग 1.25 करोड़ रुपये की आमदनी हो रही है। बरोट रेजरवायर में जलस्तर पूर्ण होने से पंजाब सरकार को रिकॉर्ड उत्पादन और आय प्राप्त हो रही है। -सुखविंदर सिंह, आरई शानन प्रोजेक्ट
66 मेगावाट बस्सी परियोजना में प्रतिदिन लगभग 15 लाख यूनिट विद्युत उत्पादन हो रहा है, जिससे प्रदेश सरकार को प्रतिदिन लाखों रुपये की आमदनी हो रही है। इससे पहले फरवरी और मार्च में पानी की कमी के कारण उत्पादन 50 प्रतिशत से भी कम रह गया था। -इंजीनियर दीप्ति भट्ट, आरई बस्सी परियोजना

कमेंट
कमेंट X