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Mandi News: चेक बाउंस के मामले में कारोबारी दोषी

Tue, 30 Jun 2026 06:50 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 30 Jun 2026 06:50 AM IST
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Businessman found guilty in cheque bounce case.
चेक बाउंस के मामले में कारोबारी दोषी
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नेरचौक की फर्म की शिकायत पर सीजेएम कोर्ट का फैसला
सौ रुपये जुर्माना किया, राशि लौटाने के बाद अदालत ने दिखाई नरमी
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। करीब चार वर्ष पुराने 1.60 लाख रुपये के चेक बाउंस मामले में मंडी की मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) अदालत ने आरोपी कारोबारी को परक्राम्य लिखत अधिनियम (एनआई एक्ट) की धारा 138 के तहत दोषी करार दिया है। हालांकि, सजा सुनाए जाने से पहले आरोपी की ओर से पूरी राशि का भुगतान कर शिकायतकर्ता से समझौता कर लेने पर अदालत ने नरमी बरतते हुए उसे मात्र 100 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
अदालत में दायर शिकायत के अनुसार नेरचौक स्थित हर्षना एंटरप्राइजेज के संचालक दिनेश कुमार ने आरोप लगाया था कि गोहर क्षेत्र के चैलचौक निवासी चमन लाल ने कृषि उपकरण खरीदे थे। भुगतान के एवज में आरोपी ने चार अप्रैल 2022 को पंजाब नेशनल बैंक, चैलचौक शाखा का 1.60 लाख रुपये का चेक दिया। शिकायतकर्ता ने चेक बैंक में प्रस्तुत किया लेकिन पांच अप्रैल 2022 को यह एक्ससीड्स अरेंजमेंट टिप्पणी के साथ बाउंस हो गया। इसके बाद 30 अप्रैल 2022 को विधिक नोटिस भेजा गया, लेकिन निर्धारित अवधि के भीतर भुगतान नहीं होने पर अदालत में परिवाद दायर किया गया।
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सुनवाई के दौरान आरोपी ने अदालत में दावा किया कि संबंधित चेक सुरक्षा के तौर पर दिया गया था और वह पहले ही भुगतान कर चुका है। हालांकि, वह अपने दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज या अन्य साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। दूसरी ओर शिकायतकर्ता ने चेक, बैंक मेमो, कानूनी नोटिस और डाक रसीद सहित सभी आवश्यक दस्तावेज अदालत में पेश किए। अदालत ने पाया कि आरोपी ने चेक पर अपने हस्ताक्षर से इन्कार नहीं किया और न ही यह साबित कर सका कि उसकी कोई देनदारी नहीं थी। ऐसे में अदालत ने माना कि आरोपी कानूनी रूप से देय राशि के भुगतान के लिए जारी चेक का सम्मान कराने में विफल रहा और धारा 138 के तहत दोष सिद्ध होता है।
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सजा पर सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से अदालत को बताया गया कि दोषसिद्धि के बाद उसने चेक की पूरी राशि शिकायतकर्ता को लौटा दी है। शिकायतकर्ता के अधिवक्ता ने भी अदालत से आरोपी को जेल न भेजने का आग्रह करते हुए बताया कि दोनों पक्षों के बीच विवाद का सौहार्दपूर्ण निपटारा हो चुका है। इस पर अदालत ने परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को केवल 100 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई, जिसे उसने तत्काल जमा कर दिया।
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