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Mandi News: लाखों की ठगी के मामले में खंगाले जा रहे रिकॉर्ड
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मंडी। सरकारी टेंडर दिलाने के नाम पर मंडी के एक कारोबारी से 20.35 लाख रुपये की कथित ठगी के मामले में पुलिस ने जांच आगे बढ़ा दी है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अब जांच का फोकस दिल्ली स्थित दो निजी फर्मों, बैंक खातों, ई-मेल और वित्तीय लेनदेन के सत्यापन पर है। पुलिस ने शिकायतकर्ता से सभी संबंधित दस्तावेज तलब किए हैं। इनकी जांच पड़ताल की जाएगी।
पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि वर्ष 2025 में दिल्ली में कुछ लोगों ने स्वयं को जेम पोर्टल के माध्यम से सरकारी टेंडर उपलब्ध कराने वाला बताते हुए सरकारी अस्पतालों में फर्नीचर आपूर्ति का टेंडर दिलाने का भरोसा दिया। उनके कहने पर शिकायतकर्ता ने 20 लाख रुपये दिल्ली स्थित दो फर्मों के खातों में स्थानांतरित कर दिए। इसके बाद भी न तो कोई सरकारी टेंडर मिला और न ही कोई आपूर्ति आदेश जारी हुआ। आरोप है कि बाद में फर्जी ई-मेल और दस्तावेज भेजकर उसे लगातार गुमराह किया गया। सरकारी ऑर्डर दिलाने के नाम पर 35 हजार रुपये अतिरिक्त भी लिए गए।
पुलिस शिकायतकर्ता से बैंक स्टेटमेंट, आरटीजीएस/एनईएफटी लेनदेन का रिकॉर्ड, ई-मेल, कंपनियों से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्य मांगे गए हैं। साथ ही जिन दिल्ली स्थित फर्मों के खातों में राशि भेजी गई है, उनके पंजीकरण, बैंक खातों और संबंधित व्यक्तियों का भी सत्यापन किया जा रहा है।
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पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार का कहना है कि जांच पूरी तरह दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। यदि जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है और पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार गिरफ्तारी सहित कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि वर्ष 2025 में दिल्ली में कुछ लोगों ने स्वयं को जेम पोर्टल के माध्यम से सरकारी टेंडर उपलब्ध कराने वाला बताते हुए सरकारी अस्पतालों में फर्नीचर आपूर्ति का टेंडर दिलाने का भरोसा दिया। उनके कहने पर शिकायतकर्ता ने 20 लाख रुपये दिल्ली स्थित दो फर्मों के खातों में स्थानांतरित कर दिए। इसके बाद भी न तो कोई सरकारी टेंडर मिला और न ही कोई आपूर्ति आदेश जारी हुआ। आरोप है कि बाद में फर्जी ई-मेल और दस्तावेज भेजकर उसे लगातार गुमराह किया गया। सरकारी ऑर्डर दिलाने के नाम पर 35 हजार रुपये अतिरिक्त भी लिए गए।
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पुलिस शिकायतकर्ता से बैंक स्टेटमेंट, आरटीजीएस/एनईएफटी लेनदेन का रिकॉर्ड, ई-मेल, कंपनियों से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्य मांगे गए हैं। साथ ही जिन दिल्ली स्थित फर्मों के खातों में राशि भेजी गई है, उनके पंजीकरण, बैंक खातों और संबंधित व्यक्तियों का भी सत्यापन किया जा रहा है।
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पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार का कहना है कि जांच पूरी तरह दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। यदि जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है और पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार गिरफ्तारी सहित कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।