{"_id":"69d4e8875e8a61f2b20aba5b","slug":"complaint-dismissed-in-cheque-bounce-case-mandi-news-c-90-1-ssml1045-192034-2026-04-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mandi News: चेक बाउंस मामले में शिकायत खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi News: चेक बाउंस मामले में शिकायत खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Wed, 08 Apr 2026 04:49 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
समय से पहले याचिका दर्ज होने पर अदालत का फैसला
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मंडी ने कहा - मामला सुनवाई योग्य नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मंडी की अदालत ने चेक बाउंस मामले में फैसला सुनाते हुए शिकायत को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि शिकायत निर्धारित वैधानिक अवधि पूरी होने से पहले दायर की गई थी, इसलिए यह कानूनन सुनवाई योग्य नहीं है।
मामले के तथ्यों के अनुसार, सीडी को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी ने प्रमिला नामक महिला के खिलाफ 25,000 रुपये के चेक बाउंस होने पर परिवाद दायर किया था। आरोप था कि आरोपी की ओर से जारी चेक 27 जनवरी 2022 को बैंक में प्रस्तुत करने पर 9 फरवरी 2022 को अपर्याप्त धनराशि के कारण अस्वीकृत हो गया। इसके बाद 5 मार्च 2022 को विधिक नोटिस भेजा गया, लेकिन भुगतान नहीं होने पर 11 अप्रैल 2022 को अदालत में शिकायत दायर की गई।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि नोटिस की वास्तविक सेवा तिथि का कोई ठोस प्रमाण रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं था। ऐसे मामलों में कानून के अनुसार नोटिस की सेवा 30 दिन के भीतर मानी जाती है। इस आधार पर अदालत ने माना कि शिकायत 15 दिन की अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि पूरी होने से पहले ही दायर कर दी गई थी।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जब तक नोटिस की सेवा के बाद 15 दिन की अवधि पूरी नहीं होती, तब तक धारा 138 के तहत अपराध बनता ही नहीं है। ऐसे में समय से पहले दायर शिकायत को कानूनी रूप से मान्य नहीं माना जा सकता।
अदालत ने अपने अंतिम आदेश में कहा कि प्रस्तुत शिकायत समयपूर्व (प्रीमेच्योर) है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है। साथ ही आरोपी के निजी मुचलके को निरस्त करते हुए जमानत बांड भी समाप्त कर दिया गया।
Trending Videos
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मंडी ने कहा - मामला सुनवाई योग्य नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मंडी की अदालत ने चेक बाउंस मामले में फैसला सुनाते हुए शिकायत को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि शिकायत निर्धारित वैधानिक अवधि पूरी होने से पहले दायर की गई थी, इसलिए यह कानूनन सुनवाई योग्य नहीं है।
मामले के तथ्यों के अनुसार, सीडी को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी ने प्रमिला नामक महिला के खिलाफ 25,000 रुपये के चेक बाउंस होने पर परिवाद दायर किया था। आरोप था कि आरोपी की ओर से जारी चेक 27 जनवरी 2022 को बैंक में प्रस्तुत करने पर 9 फरवरी 2022 को अपर्याप्त धनराशि के कारण अस्वीकृत हो गया। इसके बाद 5 मार्च 2022 को विधिक नोटिस भेजा गया, लेकिन भुगतान नहीं होने पर 11 अप्रैल 2022 को अदालत में शिकायत दायर की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि नोटिस की वास्तविक सेवा तिथि का कोई ठोस प्रमाण रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं था। ऐसे मामलों में कानून के अनुसार नोटिस की सेवा 30 दिन के भीतर मानी जाती है। इस आधार पर अदालत ने माना कि शिकायत 15 दिन की अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि पूरी होने से पहले ही दायर कर दी गई थी।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जब तक नोटिस की सेवा के बाद 15 दिन की अवधि पूरी नहीं होती, तब तक धारा 138 के तहत अपराध बनता ही नहीं है। ऐसे में समय से पहले दायर शिकायत को कानूनी रूप से मान्य नहीं माना जा सकता।
अदालत ने अपने अंतिम आदेश में कहा कि प्रस्तुत शिकायत समयपूर्व (प्रीमेच्योर) है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है। साथ ही आरोपी के निजी मुचलके को निरस्त करते हुए जमानत बांड भी समाप्त कर दिया गया।

कमेंट
कमेंट X