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Mandi News: संपत्ति की आधी अधूरी जानकारी की नए सर्वे में खुल रहीं परतें
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कुछ संपत्ति कर दाताओं ने पूर्व में दी है आधी-अधूरी जानकारी
पुरानी संपत्तियों का नये सर्वे की संपत्तियों से किया जा रहा मिलान
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। नगर निगम के वार्डों में कंपनी की ओर से किए जा रहे नए सर्वे के दौरान पता चला है कि कई संपत्ति करदाताओं ने अपनी संपत्तियों की सही जानकारी नहीं दी थी। पुराने रिकॉर्ड और नए सर्वे डाटा में कई स्थानों पर अंतर पाया गया है। कुछ मामलों में भवन का वास्तविक क्षेत्रफल, मंजिलों की संख्या और उपयोग (आवासीय/व्यावसायिक) की जानकारी अधूरी या गलत दी गई थी, जिससे नगर निगम को राजस्व का नुकसान हुआ।
नगर निगम अब इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए नए सर्वे के आधार पर पुरानी संपत्तियों का मिलान कर रहा है। जहां भी अंतर पाया गया है, वहां विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। निगम अधिकारियों का कहना है कि गलत जानकारी देने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और बकाया कर वसूला जाएगा।
संपत्ति कर बिल जारी करने में देरी
इस साल नगर निगम मंडी में संपत्ति कर बिल जारी होने में देरी हो सकती है। इसका मुख्य कारण शहर में चल रहा नया सर्वे है, जिसके चलते संपत्तियों की संख्या लगभग 10 हजार से बढ़कर 15 हजार तक पहुंच सकती है। अब मर्ज क्षेत्र के वार्डों की संपत्तियां भी कर के दायरे में आएंगी। सर्वे पूरा होने और आंकड़ों के सत्यापन के बाद ही नए बिल जारी किए जाएंगे, ताकि किसी प्रकार की त्रुटि न रहे।
निगम की आय में वृद्धि की संभावना
पहले संपत्ति कर से निगम की आय लगभग 2.60 करोड़ रुपये थी, लेकिन इस बार यह दोगुनी होने की संभावना जताई जा रही है। आयुक्त रोहित राठौर ने कहा कि इस प्रक्रिया से न केवल कर प्रणाली में पारदर्शिता आएगी, बल्कि निगम की आय में भी बढ़ोतरी होगी, जिससे शहर के विकास कार्यों को गति मिलेगी। संपत्ति मालिकों से आग्रह है कि वे अपनी संपत्ति से संबंधित सही और पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि भविष्य में किसी दिक्कत या दंडात्मक कार्रवाई से बचा जा सके।
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पुरानी संपत्तियों का नये सर्वे की संपत्तियों से किया जा रहा मिलान
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। नगर निगम के वार्डों में कंपनी की ओर से किए जा रहे नए सर्वे के दौरान पता चला है कि कई संपत्ति करदाताओं ने अपनी संपत्तियों की सही जानकारी नहीं दी थी। पुराने रिकॉर्ड और नए सर्वे डाटा में कई स्थानों पर अंतर पाया गया है। कुछ मामलों में भवन का वास्तविक क्षेत्रफल, मंजिलों की संख्या और उपयोग (आवासीय/व्यावसायिक) की जानकारी अधूरी या गलत दी गई थी, जिससे नगर निगम को राजस्व का नुकसान हुआ।
नगर निगम अब इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए नए सर्वे के आधार पर पुरानी संपत्तियों का मिलान कर रहा है। जहां भी अंतर पाया गया है, वहां विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। निगम अधिकारियों का कहना है कि गलत जानकारी देने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और बकाया कर वसूला जाएगा।
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संपत्ति कर बिल जारी करने में देरी
इस साल नगर निगम मंडी में संपत्ति कर बिल जारी होने में देरी हो सकती है। इसका मुख्य कारण शहर में चल रहा नया सर्वे है, जिसके चलते संपत्तियों की संख्या लगभग 10 हजार से बढ़कर 15 हजार तक पहुंच सकती है। अब मर्ज क्षेत्र के वार्डों की संपत्तियां भी कर के दायरे में आएंगी। सर्वे पूरा होने और आंकड़ों के सत्यापन के बाद ही नए बिल जारी किए जाएंगे, ताकि किसी प्रकार की त्रुटि न रहे।
निगम की आय में वृद्धि की संभावना
पहले संपत्ति कर से निगम की आय लगभग 2.60 करोड़ रुपये थी, लेकिन इस बार यह दोगुनी होने की संभावना जताई जा रही है। आयुक्त रोहित राठौर ने कहा कि इस प्रक्रिया से न केवल कर प्रणाली में पारदर्शिता आएगी, बल्कि निगम की आय में भी बढ़ोतरी होगी, जिससे शहर के विकास कार्यों को गति मिलेगी। संपत्ति मालिकों से आग्रह है कि वे अपनी संपत्ति से संबंधित सही और पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि भविष्य में किसी दिक्कत या दंडात्मक कार्रवाई से बचा जा सके।