{"_id":"69f73ff99286d108bf02efa7","slug":"order-to-give-all-benefits-to-bhadar-singh-who-was-a-forest-watchman-since-2002-mandi-news-c-90-1-mnd1001-195360-2026-05-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mandi News: वन चौकीदार रहे भादर सिंह को 2002 से सारे लाभ देने के आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi News: वन चौकीदार रहे भादर सिंह को 2002 से सारे लाभ देने के आदेश
विज्ञापन
विज्ञापन
शर्तों के मुताबिक 2002 में नियमित किया जाना था, लेकिन 2017 में किया
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में वन विभाग में कार्यरत रहे एक दिहाड़ीदार भादर सिंह को वर्ष 2002 से नियमितीकरण का लाभ देने के आदेश जारी किए हैं। यह आदेश जस्टिस अजय मोहन गोयल की अदालत ने दिया। भादर सिंह पुत्र मंगरू राम, गांव लोट, डाकघर नांडी, तहसील चच्योट के निवासी हैं। उन्होंने यह अपील दायर की थी।
भादर सिंह की नियुक्ति वर्ष 1995 में वन विभाग की मंडी रेंज में बतौर बेलदार हुई थी, जहां उन्हें पंडोह नर्सरी में तैनात किया गया था। नियमों के अनुसार 8 वर्ष की सेवा पूर्ण करने पर उन्हें वर्ष 2002 में नियमित किया जाना चाहिए था, लेकिन विभाग ने उन्हें वर्ष 2017 में नियमित किया। वर्ष 2024 में सेवानिवृत्ति के समय उन्हें सेवा लाभ भी 2017 के नियमितीकरण के आधार पर ही प्रदान किए गए। इससे असंतुष्ट होकर उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
प्रदेश उच्च न्यायालय ने उनके पक्ष में निर्णय सुनाते हुए विभाग को निर्देश दिए कि भादर सिंह को वर्ष 2002 से नियमित माना जाए और उन्हें उसी तिथि से सभी सेवा लाभ प्रदान किए जाएं।
Trending Videos
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में वन विभाग में कार्यरत रहे एक दिहाड़ीदार भादर सिंह को वर्ष 2002 से नियमितीकरण का लाभ देने के आदेश जारी किए हैं। यह आदेश जस्टिस अजय मोहन गोयल की अदालत ने दिया। भादर सिंह पुत्र मंगरू राम, गांव लोट, डाकघर नांडी, तहसील चच्योट के निवासी हैं। उन्होंने यह अपील दायर की थी।
भादर सिंह की नियुक्ति वर्ष 1995 में वन विभाग की मंडी रेंज में बतौर बेलदार हुई थी, जहां उन्हें पंडोह नर्सरी में तैनात किया गया था। नियमों के अनुसार 8 वर्ष की सेवा पूर्ण करने पर उन्हें वर्ष 2002 में नियमित किया जाना चाहिए था, लेकिन विभाग ने उन्हें वर्ष 2017 में नियमित किया। वर्ष 2024 में सेवानिवृत्ति के समय उन्हें सेवा लाभ भी 2017 के नियमितीकरण के आधार पर ही प्रदान किए गए। इससे असंतुष्ट होकर उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रदेश उच्च न्यायालय ने उनके पक्ष में निर्णय सुनाते हुए विभाग को निर्देश दिए कि भादर सिंह को वर्ष 2002 से नियमित माना जाए और उन्हें उसी तिथि से सभी सेवा लाभ प्रदान किए जाएं।
