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Mandi News: पत्नी को हर माह 15 हजार रुपये गुजारा भत्ता देने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Thu, 01 Jan 2026 05:07 AM IST
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फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज की अदालत ने स्वीकार की याचिका
शिमला में तैनात बिजली बोर्ड के अधिकारी को देना होगा भरण-पोषण
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। फैमिली कोर्ट मंडी के प्रिंसिपल जज की अदालत ने भरण-पोषण से जुड़े एक मामले में पत्नी की याचिका को स्वीकार करते हुए पति को 15 हजार रुपये प्रति माह गुजारा भत्ता देने के आदेश दिए हैं। अदालत ने साफ किया कि केवल पत्नी के नौकरीपेशा होने के आधार पर उसे भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता, विशेषकर तब जब पति और पत्नी की आय में स्पष्ट अंतर हो।
मामले के अनुसार पत्नी ने अपने पति के खिलाफ धारा 125 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत याचिका दायर की थी। दोनों का विवाह 7 दिसंबर 2020 को हुआ था। कुछ समय बाद वैवाहिक संबंधों में तनाव उत्पन्न हुआ और पत्नी ने पति पर मानसिक उत्पीड़न और आर्थिक सहायता न देने के आरोप लगाए। इसके बाद वर्ष 2024 में पत्नी ने मंडी फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण की मांग की।
पत्नी का तर्क था कि पति शिमला में तैनात बिजली बोर्ड में सीनियर एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं और उनकी मासिक आय अधिक है, जबकि वे स्वयं बैंक में कार्यरत होने के बावजूद पति के सामाजिक स्तर के अनुरूप जीवन यापन करने में असमर्थ है। वहीं पति ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि पत्नी स्वयं कमाने में सक्षम है और उसे गुजारा भत्ता देने की आवश्यकता नहीं है।
दोनों पक्षों के साक्ष्यों और आय से संबंधित दस्तावेजों के अवलोकन के बाद अदालत ने कहा कि भरण-पोषण कानून सामाजिक न्याय की भावना पर आधारित है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि पति और पत्नी की आय में पर्याप्त असमानता हो तो पत्नी की नौकरी उसे भरण-पोषण से वंचित करने का आधार नहीं बन सकती।
अदालत ने आदेश दिया कि पति याचिका दायर करने की तिथि से पत्नी को 15 हजार रुपये प्रति माह गुजारा भत्ता देगा। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि यदि पत्नी की ओर से विधिवत सत्यापित चिकित्सा बिल प्रस्तुत किए जाते हैं और उन्हें किसी अन्य स्रोत से प्रतिपूर्ति नहीं मिली है, तो पति को उसके इलाज से संबंधित खर्च का भुगतान भी करना होगा।
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मामले के अनुसार पत्नी ने अपने पति के खिलाफ धारा 125 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत याचिका दायर की थी। दोनों का विवाह 7 दिसंबर 2020 को हुआ था। कुछ समय बाद वैवाहिक संबंधों में तनाव उत्पन्न हुआ और पत्नी ने पति पर मानसिक उत्पीड़न और आर्थिक सहायता न देने के आरोप लगाए। इसके बाद वर्ष 2024 में पत्नी ने मंडी फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण की मांग की।
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पत्नी का तर्क था कि पति शिमला में तैनात बिजली बोर्ड में सीनियर एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं और उनकी मासिक आय अधिक है, जबकि वे स्वयं बैंक में कार्यरत होने के बावजूद पति के सामाजिक स्तर के अनुरूप जीवन यापन करने में असमर्थ है। वहीं पति ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि पत्नी स्वयं कमाने में सक्षम है और उसे गुजारा भत्ता देने की आवश्यकता नहीं है।
दोनों पक्षों के साक्ष्यों और आय से संबंधित दस्तावेजों के अवलोकन के बाद अदालत ने कहा कि भरण-पोषण कानून सामाजिक न्याय की भावना पर आधारित है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि पति और पत्नी की आय में पर्याप्त असमानता हो तो पत्नी की नौकरी उसे भरण-पोषण से वंचित करने का आधार नहीं बन सकती।
अदालत ने आदेश दिया कि पति याचिका दायर करने की तिथि से पत्नी को 15 हजार रुपये प्रति माह गुजारा भत्ता देगा। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि यदि पत्नी की ओर से विधिवत सत्यापित चिकित्सा बिल प्रस्तुत किए जाते हैं और उन्हें किसी अन्य स्रोत से प्रतिपूर्ति नहीं मिली है, तो पति को उसके इलाज से संबंधित खर्च का भुगतान भी करना होगा।