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Mandi News: शिमला के चौड़ा मैदान में 27 को प्रदर्शन करेंगे आउटसोर्स कर्मचारी
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स्थायी नीति बनाकर नौकरी की सुरक्षा दे सरकार : संघ
संवाद न्यूज एजेंसी
डैहर (मंडी)। हिमाचल प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के प्रतिनिधि संगठन ने 27 मार्च को शिमला के ऐतिहासिक चौड़ा मैदान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन और एकजुटता सभा आयोजित करने का निर्णय लिया है। यह प्रदर्शन विधानसभा सत्र के दौरान सुबह 11 बजे होगा, जिसमें प्रदेश भर से हजारों कर्मचारी शामिल होंगे।
संघ के संयोजक अश्विनी शर्मा और सह संयोजक सोहनलाल तुलिया ने कहा कि यह प्रदर्शन कर्मचारियों के अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम है। आउटसोर्स कर्मचारी पिछले 15 से 20 वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अभी भी नौकरी की असुरक्षा और कम वेतन जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में स्थायी नीति बनाकर नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करना और समान कार्य के लिए समान वेतन लागू करना शामिल है। संघ पदाधिकारियों ने बताया कि हाल ही में पेश बजट में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए 13,700 रुपये प्रतिमाह वेतन का प्रावधान किया गया है, जो महंगाई के मुकाबले बेहद कम है। उनका कहना है कि इतने कम वेतन में कर्मचारी अपने परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें पूरी करने में असमर्थ हैं।
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डैहर (मंडी)। हिमाचल प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के प्रतिनिधि संगठन ने 27 मार्च को शिमला के ऐतिहासिक चौड़ा मैदान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन और एकजुटता सभा आयोजित करने का निर्णय लिया है। यह प्रदर्शन विधानसभा सत्र के दौरान सुबह 11 बजे होगा, जिसमें प्रदेश भर से हजारों कर्मचारी शामिल होंगे।
संघ के संयोजक अश्विनी शर्मा और सह संयोजक सोहनलाल तुलिया ने कहा कि यह प्रदर्शन कर्मचारियों के अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम है। आउटसोर्स कर्मचारी पिछले 15 से 20 वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अभी भी नौकरी की असुरक्षा और कम वेतन जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में स्थायी नीति बनाकर नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करना और समान कार्य के लिए समान वेतन लागू करना शामिल है। संघ पदाधिकारियों ने बताया कि हाल ही में पेश बजट में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए 13,700 रुपये प्रतिमाह वेतन का प्रावधान किया गया है, जो महंगाई के मुकाबले बेहद कम है। उनका कहना है कि इतने कम वेतन में कर्मचारी अपने परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें पूरी करने में असमर्थ हैं।
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