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नैतिकता, मौलिकता और समर्पण के साथ अनुसंधान करें शोधार्थी : अवस्थी
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एसपीयू में इतिहास में अनुसंधान पद्धति विषय पर साझा किए विचार
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी के इतिहास विभाग की ओर से इतिहास में अनुसंधान पद्धति, उद्देश्य और चुनौतियां विषय पर एक अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य डॉ. ललित कुमार अवस्थी उपस्थित रहे। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संदर्भ में शोध की गुणवत्ता, नवाचार और अंतर्विषयक दृष्टिकोण पर बल देते हुए विद्यार्थियों को नैतिकता, मौलिकता और समर्पण के साथ अनुसंधान करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता क्षेत्रीय केंद्र खनियारा (धर्मशाला) के इतिहास विभाग के समन्वयक डॉ. राज कुमार ने अपने व्याख्यान में इतिहास में अनुसंधान पद्धति के विभिन्न आयामों का विस्तृत विवेचन किया। उन्होंने स्रोत-सामग्री के चयन, प्राथमिक एवं द्वितीयक स्रोतों के महत्व, तथ्यात्मक विश्लेषण, व्याख्या की विधियों तथा शोध लेखन की तकनीकों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने कहा कि इस प्रकार के व्याख्यान विद्यार्थियों के शोध कौशल को विकसित करने के साथ-साथ इतिहास में अनुसंधान की गहराई, गंभीरता और व्यापकता को समझने में अत्यंत सहायक सिद्ध होते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी के इतिहास विभाग की ओर से इतिहास में अनुसंधान पद्धति, उद्देश्य और चुनौतियां विषय पर एक अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य डॉ. ललित कुमार अवस्थी उपस्थित रहे। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संदर्भ में शोध की गुणवत्ता, नवाचार और अंतर्विषयक दृष्टिकोण पर बल देते हुए विद्यार्थियों को नैतिकता, मौलिकता और समर्पण के साथ अनुसंधान करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता क्षेत्रीय केंद्र खनियारा (धर्मशाला) के इतिहास विभाग के समन्वयक डॉ. राज कुमार ने अपने व्याख्यान में इतिहास में अनुसंधान पद्धति के विभिन्न आयामों का विस्तृत विवेचन किया। उन्होंने स्रोत-सामग्री के चयन, प्राथमिक एवं द्वितीयक स्रोतों के महत्व, तथ्यात्मक विश्लेषण, व्याख्या की विधियों तथा शोध लेखन की तकनीकों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने कहा कि इस प्रकार के व्याख्यान विद्यार्थियों के शोध कौशल को विकसित करने के साथ-साथ इतिहास में अनुसंधान की गहराई, गंभीरता और व्यापकता को समझने में अत्यंत सहायक सिद्ध होते हैं।
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