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Mandi News: बजट में वेतन कटौती पर भड़का स्कूल प्रवक्ता संघ
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सरकार से वेतन कटौती का निणर्य तुरंत वापस लेने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
सुंदरनगर (मंडी)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने हाल ही में पेश किए गए बजट में कर्मचारियों के वेतन में कटौती के निर्णय पर स्कूल प्रवक्ता संघ जिला मंडी ने कड़ा रोष जताया है। संघ ने सरकार के इस कदम को कर्मचारी विरोधी बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है।
स्कूल प्रवक्ता संघ के राज्य मार्गदर्शक राजेश सैनी, राज्य महासचिव इंद्र ठाकुर, जिला मंडी अध्यक्ष देवेंद्र कुमार और महिला विंग की अध्यक्षा ललिता बांगिया ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि बजट में ग्रुप-ए और ग्रुप-बी के कर्मचारियों के वेतन में तीन प्रतिशत की कटौती का निर्णय अत्यंत निराशाजनक है।
उन्होंने प्रदेश की वित्तीय स्थिति को समझते हुए कर्मचारी फिलहाल लंबित महंगाई भत्ते (डीए) की मांग नहीं कर रहे थे, लेकिन इसके बदले उनके मौजूदा वेतन में कटौती करना पूरी तरह से अन्याय है। संघ के पदाधिकारियों ने तर्क दिया कि इन श्रेणियों में आने वाले अधिकांश कर्मचारी मध्य वर्गीय परिवारों से हैं। कर्मचारी अपने वेतन से ही होम लोन, कार लोन और बच्चों की शिक्षा का खर्च वहन करते हैं। सरकार के पास पहले से ही कर्मचारियों के मेडिकल रीइंबर्समेंट बिल लंबे समय से लंबित पड़े हैं, जिससे बीमारी की स्थिति में उन्हें अपनी जेब से भारी भुगतान करना पड़ रहा है।
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सुंदरनगर (मंडी)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने हाल ही में पेश किए गए बजट में कर्मचारियों के वेतन में कटौती के निर्णय पर स्कूल प्रवक्ता संघ जिला मंडी ने कड़ा रोष जताया है। संघ ने सरकार के इस कदम को कर्मचारी विरोधी बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है।
स्कूल प्रवक्ता संघ के राज्य मार्गदर्शक राजेश सैनी, राज्य महासचिव इंद्र ठाकुर, जिला मंडी अध्यक्ष देवेंद्र कुमार और महिला विंग की अध्यक्षा ललिता बांगिया ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि बजट में ग्रुप-ए और ग्रुप-बी के कर्मचारियों के वेतन में तीन प्रतिशत की कटौती का निर्णय अत्यंत निराशाजनक है।
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उन्होंने प्रदेश की वित्तीय स्थिति को समझते हुए कर्मचारी फिलहाल लंबित महंगाई भत्ते (डीए) की मांग नहीं कर रहे थे, लेकिन इसके बदले उनके मौजूदा वेतन में कटौती करना पूरी तरह से अन्याय है। संघ के पदाधिकारियों ने तर्क दिया कि इन श्रेणियों में आने वाले अधिकांश कर्मचारी मध्य वर्गीय परिवारों से हैं। कर्मचारी अपने वेतन से ही होम लोन, कार लोन और बच्चों की शिक्षा का खर्च वहन करते हैं। सरकार के पास पहले से ही कर्मचारियों के मेडिकल रीइंबर्समेंट बिल लंबे समय से लंबित पड़े हैं, जिससे बीमारी की स्थिति में उन्हें अपनी जेब से भारी भुगतान करना पड़ रहा है।