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Mandi News: सेवानिवृत्ति के बाद भी संगीत सेवा में जुटीं शुक्ला शर्मा, जरूरतमंदों को दे रहीं मुफ्त शिक्षा
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Sat, 02 May 2026 05:17 AM IST
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शुक्ला शर्मा, संगीतज्ञ। मंडी से महिला
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40 वर्षों में हजारों शिष्यों को सिखाया संगीत, अब गरीब बच्चों के लिए घर बना गुरुकुल
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। पुरानी मंडी की निवासी वरिष्ठ संगीतज्ञ और सेवानिवृत्त प्राचार्य शुक्ला शर्मा आज भी संगीत साधना के साथ समाजसेवा में सक्रिय हैं। वह गरीब और जरूरतमंद बच्चों को अपने घर पर निशुल्क संगीत शिक्षा दे रही हैं। करीब 40 वर्षों के अपने लंबे संगीत सफर में उन्होंने हजारों युवाओं को प्रशिक्षित किया है, जिनमें कई आज देश-विदेश में विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिष्ठित पदों पर कार्यरत हैं।
उनके शिष्यों में लोक गायिका रविकांता कश्यप, प्रो. मीना वर्मा, पूर्व मंत्री राम लाल ठाकुर, क्रिकेटर शक्ति सिंह, प्रो. अनुपमा और कथा वाचक राजेंद्र शर्मा जैसे नाम शामिल हैं।
1946 में मंडी के समखेतर में जन्मी शुक्ला शर्मा ने प्रारंभिक संगीत शिक्षा अपने पिता रेलुराम से प्राप्त की। 1966 में उन्होंने आकाशवाणी शिमला में कैजुअल आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया और बाद में वल्लभ महाविद्यालय मंडी में संगीत प्राध्यापक के रूप में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2003 में वह कुल्लू कॉलेज से प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त हुईं।आज भी वह संगीत के प्रति समर्पित हैं और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को शास्त्रीय गायन व वादन की शिक्षा देकर एक मिसाल पेश कर रही हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। पुरानी मंडी की निवासी वरिष्ठ संगीतज्ञ और सेवानिवृत्त प्राचार्य शुक्ला शर्मा आज भी संगीत साधना के साथ समाजसेवा में सक्रिय हैं। वह गरीब और जरूरतमंद बच्चों को अपने घर पर निशुल्क संगीत शिक्षा दे रही हैं। करीब 40 वर्षों के अपने लंबे संगीत सफर में उन्होंने हजारों युवाओं को प्रशिक्षित किया है, जिनमें कई आज देश-विदेश में विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिष्ठित पदों पर कार्यरत हैं।
उनके शिष्यों में लोक गायिका रविकांता कश्यप, प्रो. मीना वर्मा, पूर्व मंत्री राम लाल ठाकुर, क्रिकेटर शक्ति सिंह, प्रो. अनुपमा और कथा वाचक राजेंद्र शर्मा जैसे नाम शामिल हैं।
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1946 में मंडी के समखेतर में जन्मी शुक्ला शर्मा ने प्रारंभिक संगीत शिक्षा अपने पिता रेलुराम से प्राप्त की। 1966 में उन्होंने आकाशवाणी शिमला में कैजुअल आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया और बाद में वल्लभ महाविद्यालय मंडी में संगीत प्राध्यापक के रूप में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2003 में वह कुल्लू कॉलेज से प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त हुईं।आज भी वह संगीत के प्रति समर्पित हैं और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को शास्त्रीय गायन व वादन की शिक्षा देकर एक मिसाल पेश कर रही हैं।
