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Mandi News: स्वदेशी एआई क्षमताओं को मजबूत करना समय की जरूरत
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आईआईटी मंडी में एमआई आरए लैब का शुभारंभ करते हुए मुख्य अतिथि पदम भूषण पद्म भूषण क्रिस गोपालकृष
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आईआईटी मंडी में हाइव 3.0 कॉन्क्लेव में अत्याधुनिक लैब का उद्घाटन
कॉन्क्लेव शोध, उद्योग और नीति का संगम, भारत-केंद्रित एआई समाधान पर रहेगा जोर
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। भारत में मल्टीमॉडल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में बड़ी पहल करते हुए आईआईटी मंडी के टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब (टीआईएच) ने ‘एमआई-आरए’ (मल्टीमॉडल इंटेलीजेंस फॉर रियल वर्ल्ड एप्लीकेशन) नामक अत्याधुनिक रिसर्च लैब की शुरुआत की है। हाइव 3.0 कॉन्क्लेव के दौरान मुख्य अतिथि पदम भूषण क्रिस गोपालकृष्णन ने इसका उद्घाटन किया। यह लैब देश में एआई अनुसंधान को नई दिशा देने के साथ-साथ उद्योग-आधारित समाधानों के विकास में अहम भूमिका निभाएगी।
तीन दिवसीय हाइव 3.0 कॉन्क्लेव ‘मल्टीमॉडल एआई’ थीम पर आधारित रहा, जिसमें देश-विदेश के तकनीकी विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों, नीति-निर्माताओं और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। यह आयोजन तेजी से उभरती उस तकनीक पर केंद्रित रहा, जिसमें टेक्स्ट, विजन, ऑडियो और संरचित डाटा को एकीकृत कर अधिक सक्षम और संदर्भ-संवेदी एआई सिस्टम विकसित किए जाते हैं।
एमआई-आरए लैब को उद्योग साझेदारों के सहयोग से ‘लिविंग लैब’ के रूप में विकसित किया गया है, जहां अकादमिक शोध और औद्योगिक जरूरतों के बीच सीधा तालमेल स्थापित किया जाएगा। यहां शोधकर्ता और तकनीकी विशेषज्ञ मिलकर वास्तविक जीवन की चुनौतियों के समाधान तैयार करेंगे, जिससे प्रयोगशाला से निकलने वाले नवाचार सीधे समाज और उद्योग में उपयोगी बन सकें।
लैब में उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) इंफ्रास्ट्रक्चर, उन्नत डाटा एग्रीगेशन सिस्टम और भारत-केंद्रित मल्टीमॉडल डाटासेट तैयार करने की विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही सहयोगात्मक कार्यस्थल बनाए गए हैं, जो शोध, परीक्षण और त्वरित प्रोटोटाइप विकास को एक ही मंच पर संभव बनाते हैं।
हाइव 3.0 के दौरान कीनोट व्याख्यान, पैनल चर्चाएं, शोध प्रस्तुतियां और इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किए गए, जिनमें एआई की तकनीकी संरचना, वास्तविक अनुप्रयोग, नैतिकता, डेटा गोपनीयता और जिम्मेदार उपयोग जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत को वैश्विक एआई परिदृश्य में केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि नवाचार, मानक निर्धारण और समाधान निर्माण में अग्रणी भूमिका निभानी होगी।
कॉन्क्लेव ने इस बात को रेखांकित किया कि देश में स्वदेशी एआई क्षमताओं और शोध अवसंरचना को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। एमआई-आरए जैसी पहल न केवल इस दिशा में ठोस कदम हैं, बल्कि भारत को मल्टीमॉडल एआई के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर भी अग्रसर करती हैं।
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कॉन्क्लेव शोध, उद्योग और नीति का संगम, भारत-केंद्रित एआई समाधान पर रहेगा जोर
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। भारत में मल्टीमॉडल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में बड़ी पहल करते हुए आईआईटी मंडी के टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब (टीआईएच) ने ‘एमआई-आरए’ (मल्टीमॉडल इंटेलीजेंस फॉर रियल वर्ल्ड एप्लीकेशन) नामक अत्याधुनिक रिसर्च लैब की शुरुआत की है। हाइव 3.0 कॉन्क्लेव के दौरान मुख्य अतिथि पदम भूषण क्रिस गोपालकृष्णन ने इसका उद्घाटन किया। यह लैब देश में एआई अनुसंधान को नई दिशा देने के साथ-साथ उद्योग-आधारित समाधानों के विकास में अहम भूमिका निभाएगी।
तीन दिवसीय हाइव 3.0 कॉन्क्लेव ‘मल्टीमॉडल एआई’ थीम पर आधारित रहा, जिसमें देश-विदेश के तकनीकी विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों, नीति-निर्माताओं और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। यह आयोजन तेजी से उभरती उस तकनीक पर केंद्रित रहा, जिसमें टेक्स्ट, विजन, ऑडियो और संरचित डाटा को एकीकृत कर अधिक सक्षम और संदर्भ-संवेदी एआई सिस्टम विकसित किए जाते हैं।
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एमआई-आरए लैब को उद्योग साझेदारों के सहयोग से ‘लिविंग लैब’ के रूप में विकसित किया गया है, जहां अकादमिक शोध और औद्योगिक जरूरतों के बीच सीधा तालमेल स्थापित किया जाएगा। यहां शोधकर्ता और तकनीकी विशेषज्ञ मिलकर वास्तविक जीवन की चुनौतियों के समाधान तैयार करेंगे, जिससे प्रयोगशाला से निकलने वाले नवाचार सीधे समाज और उद्योग में उपयोगी बन सकें।
लैब में उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) इंफ्रास्ट्रक्चर, उन्नत डाटा एग्रीगेशन सिस्टम और भारत-केंद्रित मल्टीमॉडल डाटासेट तैयार करने की विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही सहयोगात्मक कार्यस्थल बनाए गए हैं, जो शोध, परीक्षण और त्वरित प्रोटोटाइप विकास को एक ही मंच पर संभव बनाते हैं।
हाइव 3.0 के दौरान कीनोट व्याख्यान, पैनल चर्चाएं, शोध प्रस्तुतियां और इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किए गए, जिनमें एआई की तकनीकी संरचना, वास्तविक अनुप्रयोग, नैतिकता, डेटा गोपनीयता और जिम्मेदार उपयोग जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत को वैश्विक एआई परिदृश्य में केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि नवाचार, मानक निर्धारण और समाधान निर्माण में अग्रणी भूमिका निभानी होगी।
कॉन्क्लेव ने इस बात को रेखांकित किया कि देश में स्वदेशी एआई क्षमताओं और शोध अवसंरचना को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। एमआई-आरए जैसी पहल न केवल इस दिशा में ठोस कदम हैं, बल्कि भारत को मल्टीमॉडल एआई के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर भी अग्रसर करती हैं।
