{"_id":"69c53213761f8a94c708bdd8","slug":"theatre-artists-are-hurt-by-the-lack-of-auditorium-and-governments-negligence-mandi-news-c-90-1-ssml1025-190538-2026-03-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mandi News: सभागार का अभाव, सरकार की अनदेखी से आहत हैं रंगकर्मी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi News: सभागार का अभाव, सरकार की अनदेखी से आहत हैं रंगकर्मी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Thu, 26 Mar 2026 06:48 PM IST
विज्ञापन
दक्षा शर्मा, रंगकर्मी मंडी
विज्ञापन
संस्कृति सदन सभागार के लिए देना पड़ रहा 25 हजार किराया
कलाकारों में जुनून पर सुविधाओं के अभाव में खत्म हो रहा रंगमंच
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। सरकार की अनदेखी और सुविधाओं के अभाव से आज कलाकार रंगमंच से दूर हो रहे हैं। रंगमंच की नई पौध तैयार हो रही है, लेकिन सभागारों की कमी रंगमंच के पतन का मुख्य कारण बनी है। मंडी शहर में मौजूद सभागारों के लिए कलाकारों को हजारों खर्च करने पर नाट्य मंचन व कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। जिन कलाकारों की रोजी-रोटी रंगमंच से चलती है, उन्हें परिवार का पालन पोषण करना मुश्किल हो रहा है। दर्शक तो नाटक देखना चाहते हैं, लेकिन सभागारों का अभाव उन्हें रोकता है। ऐसे में कलाकारों का जुनून कम हाेने लगा है, जो कलाकार सक्रिय हैं उन्हें संसाधनों के अभाव से कुंठित होना पड़ रहा है। विश्व रंगमंच दिवस पर कलाकारों से की गई बातचीत में कलाकारों ने अपना दर्द बयां किया।
बॉक्स
आज नाममात्र संसाधनों से कलाकारों को नाट्य मंचन करना मुश्किल हो रहा है। संस्कृति सदन मंडी के सभागार का किराया 25 हजार होने से यह कलाकारों की पहुंच से बाहर की बात है। जिला प्रशासन व भाषा विभाग की ओर से आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों में ही कलाकारों को मंच मिलता है। कलाकारों के लिए बनाई सदियों पुरानी पॉलिसी में बदलाव की जरूरत है। सरकार को चाहिए स्कूली शिक्षा में रंगमंच को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। -दक्षा शर्मा, रंगकर्मी
-- -
खेल या सिनेमा की तुलना में रंगमंच को आज भी बड़े कार्पोरेट स्पांसर नहीं मिलते। अधिकांश समूह आज भी सरकारी अनुदान या टिकटों की मामूली बिक्री पर निर्भर हैं। आज डिजिटल युग में हिंदी रंगमंच एक संक्रमण काल से गुजर रहा है। आज का नाट्य कलाकार साधनहीन लेकिन प्रतिभावान है। वह अभिनय की बारीकियां मंच पर सीखता है और रोटी कमाने के लिए कैमरा, ओटीटी व टीवी का रुख करता है। -जय कुमार, रंगकर्मी
-- --
रंगमंच में आज डिजिटल दौर से दर्शक कम हुए हैं, लेकिन जुनून अब भी जिंदा है। पहले युवा महोत्सवों में कलाकारों को मंच, पहचान और ऊर्जा मिलती थी। लेकिन आज युवा महोत्सव बंद हो गए हैं। इससे नई प्रतिभाओं को आगे आने के अवसर नहीं मिल रहा। मंडी शहर में परेक्षागृह का अभाव है, कलाकारों के लिए पर्याप्त रिहर्सल स्पेस उपलब्ध है। यह स्थिति स्थानीय रंगकर्मियों के लिए बड़ी चुनौती है। -गौरव शर्मा, रंगकर्मी मंडी
-- -
रंगमंच समाज का आईना है, लेकिन इससे कलाकार दूर हो रहे हैं। आज सभी मोबाइल में व्यस्त होने के चलते एक दूसरे से दूर हो रहे हैं। लेकिन आज इस तरह के आयोजन नाम मात्र के रह गए हैं। जिसके लिए कुछ हद तक प्रशासन जिम्मेदार है, क्योंकि नाटक या रंगकर्म के लिए एक उचित स्थान की आवश्यकता रहती है जो बिना प्रशासन की सहायता के संभव नहीं है। मंडी शहर में नाट्य मंचन करना बड़ी चुनौती है। -चेतन कपूर, रंगकर्मी मंडी
Trending Videos
कलाकारों में जुनून पर सुविधाओं के अभाव में खत्म हो रहा रंगमंच
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। सरकार की अनदेखी और सुविधाओं के अभाव से आज कलाकार रंगमंच से दूर हो रहे हैं। रंगमंच की नई पौध तैयार हो रही है, लेकिन सभागारों की कमी रंगमंच के पतन का मुख्य कारण बनी है। मंडी शहर में मौजूद सभागारों के लिए कलाकारों को हजारों खर्च करने पर नाट्य मंचन व कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। जिन कलाकारों की रोजी-रोटी रंगमंच से चलती है, उन्हें परिवार का पालन पोषण करना मुश्किल हो रहा है। दर्शक तो नाटक देखना चाहते हैं, लेकिन सभागारों का अभाव उन्हें रोकता है। ऐसे में कलाकारों का जुनून कम हाेने लगा है, जो कलाकार सक्रिय हैं उन्हें संसाधनों के अभाव से कुंठित होना पड़ रहा है। विश्व रंगमंच दिवस पर कलाकारों से की गई बातचीत में कलाकारों ने अपना दर्द बयां किया।
बॉक्स
आज नाममात्र संसाधनों से कलाकारों को नाट्य मंचन करना मुश्किल हो रहा है। संस्कृति सदन मंडी के सभागार का किराया 25 हजार होने से यह कलाकारों की पहुंच से बाहर की बात है। जिला प्रशासन व भाषा विभाग की ओर से आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों में ही कलाकारों को मंच मिलता है। कलाकारों के लिए बनाई सदियों पुरानी पॉलिसी में बदलाव की जरूरत है। सरकार को चाहिए स्कूली शिक्षा में रंगमंच को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। -दक्षा शर्मा, रंगकर्मी
विज्ञापन
विज्ञापन
खेल या सिनेमा की तुलना में रंगमंच को आज भी बड़े कार्पोरेट स्पांसर नहीं मिलते। अधिकांश समूह आज भी सरकारी अनुदान या टिकटों की मामूली बिक्री पर निर्भर हैं। आज डिजिटल युग में हिंदी रंगमंच एक संक्रमण काल से गुजर रहा है। आज का नाट्य कलाकार साधनहीन लेकिन प्रतिभावान है। वह अभिनय की बारीकियां मंच पर सीखता है और रोटी कमाने के लिए कैमरा, ओटीटी व टीवी का रुख करता है। -जय कुमार, रंगकर्मी
रंगमंच में आज डिजिटल दौर से दर्शक कम हुए हैं, लेकिन जुनून अब भी जिंदा है। पहले युवा महोत्सवों में कलाकारों को मंच, पहचान और ऊर्जा मिलती थी। लेकिन आज युवा महोत्सव बंद हो गए हैं। इससे नई प्रतिभाओं को आगे आने के अवसर नहीं मिल रहा। मंडी शहर में परेक्षागृह का अभाव है, कलाकारों के लिए पर्याप्त रिहर्सल स्पेस उपलब्ध है। यह स्थिति स्थानीय रंगकर्मियों के लिए बड़ी चुनौती है। -गौरव शर्मा, रंगकर्मी मंडी
रंगमंच समाज का आईना है, लेकिन इससे कलाकार दूर हो रहे हैं। आज सभी मोबाइल में व्यस्त होने के चलते एक दूसरे से दूर हो रहे हैं। लेकिन आज इस तरह के आयोजन नाम मात्र के रह गए हैं। जिसके लिए कुछ हद तक प्रशासन जिम्मेदार है, क्योंकि नाटक या रंगकर्म के लिए एक उचित स्थान की आवश्यकता रहती है जो बिना प्रशासन की सहायता के संभव नहीं है। मंडी शहर में नाट्य मंचन करना बड़ी चुनौती है। -चेतन कपूर, रंगकर्मी मंडी

दक्षा शर्मा, रंगकर्मी मंडी

दक्षा शर्मा, रंगकर्मी मंडी

दक्षा शर्मा, रंगकर्मी मंडी