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Mandi News: दो बैंक रिकवरी मामलों को कॉमर्शियल कोर्ट भेजने के आदेश
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मंडी। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश मंडी के न्यायालय ने बैंक ऋण वसूली से जुड़े दो मामलों को कॉमर्शियल कोर्ट में स्थानांतरित करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने कहा कि बैंकिंग लेनदेन और ऋण वसूली से जुड़े विवाद कॉमर्शियल कोर्ट अधिनियम-2015 के तहत वाणिज्यिक विवाद की श्रेणी में आते हैं, इसलिए इनकी सुनवाई संबंधित कॉमर्शियल अदालतों में ही की जाएगी।
पहले मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा ने सरजीत कौर के खिलाफ 5,62,800 रुपये की रिकवरी के लिए वाद दायर किया था। बैंक के अनुसार वर्ष 2016 में प्रतिवादी ने पांच लाख रुपये की वर्किंग कैपिटल ऋण सुविधा ली थी, लेकिन बाद में भुगतान में चूक हुई। बैंक की ओर से कई बार नोटिस और स्मरण पत्र भेजे गए लेकिन ऋण नियमित नहीं किया गया। इसके बाद अदालत में रिकवरी वाद दायर किया गया।
दूसरे मामले में भारतीय स्टेट बैंक ने मैसर्ज बालाजी सेल्फ हेल्प ग्रुप और अन्य के खिलाफ 4,08,330 रुपये की रिकवरी का दावा किया। बैंक ने अदालत को बताया कि वर्ष 2011 में समूह को दो लाख रुपये का टर्म लोन दिया गया था, लेकिन तय भुगतान अनुसूची के अनुसार ऋण नहीं चुकाया गया।
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दोनों मामलों की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश मंडी की अदालत ने कॉमर्शियल कोर्ट अधिनियम-2015 का हवाला दिया। अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट के मामले के हवाले के अलावा हिमाचल प्रदेश सरकार की अधिसूचना का भी उल्लेख किया। अधिसूचना के तहत तीन लाख रुपये से 30 लाख रुपये तक के वाणिज्यिक विवादों की सुनवाई सिविल जज अदालतों में की जाएगी। इसी आधार पर अदालत ने बैंक ऑफ बड़ौदा का मामला सिविल जज कोर्ट नंबर-दो मंडी तथा भारतीय स्टेट बैंक का मामला सिविल जज कोर्ट नंबर-तीन मंडी को स्थानांतरित करने के आदेश दिए।
पहले मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा ने सरजीत कौर के खिलाफ 5,62,800 रुपये की रिकवरी के लिए वाद दायर किया था। बैंक के अनुसार वर्ष 2016 में प्रतिवादी ने पांच लाख रुपये की वर्किंग कैपिटल ऋण सुविधा ली थी, लेकिन बाद में भुगतान में चूक हुई। बैंक की ओर से कई बार नोटिस और स्मरण पत्र भेजे गए लेकिन ऋण नियमित नहीं किया गया। इसके बाद अदालत में रिकवरी वाद दायर किया गया।
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दूसरे मामले में भारतीय स्टेट बैंक ने मैसर्ज बालाजी सेल्फ हेल्प ग्रुप और अन्य के खिलाफ 4,08,330 रुपये की रिकवरी का दावा किया। बैंक ने अदालत को बताया कि वर्ष 2011 में समूह को दो लाख रुपये का टर्म लोन दिया गया था, लेकिन तय भुगतान अनुसूची के अनुसार ऋण नहीं चुकाया गया।
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