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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Police took away a young woman who had entered into a love marriage; High Court takes serious note.

हिमाचल: प्रेम विवाह करने वाली युवती को राजस्थान ले गई पुलिस, हाईकोर्ट का कड़ा संज्ञान

Thu, 16 Jul 2026 06:20 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 16 Jul 2026 06:20 AM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रेम विवाह करने वाली लड़की को राजस्थान ले जाने पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने संबंधित पुलिस अधिकारियों, कांगड़ा के एसपी और राजस्थान के कोटपुतली के एसडीएम और एसपी को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि आगामी 23 जुलाई को हर हाल में पीड़ित लड़की को अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश करें।

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Police took away a young woman who had entered into a love marriage; High Court takes serious note.
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रेम विवाह करने वाली लड़की को राजस्थान ले जाने पर कड़ा संज्ञान लेते हुए प्रदेश के संबंधित पुलिस अधिकारियों, कांगड़ा के एसपी और राजस्थान के कोटपुतली के एसडीएम और एसपी को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि आगामी 23 जुलाई को हर हाल में पीड़ित लड़की को अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश करें। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने लड़के की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने राजस्थान के कोटपुतली जिले के उप-मंडलीय मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को भी इस मामले में नए प्रतिवादी के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने इस मामले में हिमाचल सरकार और पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी कर दिया है। राजस्थान के अधिकारियों और लड़की के परिजनों को भी दो दिनों के भीतर नोटिस तामील करने के निर्देश दिए गए हैं।

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याचिकाकर्ता आदित्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि आदित्य और दिशा यादव ने एक फरवरी 2026 को कांगड़ा के चामुंडा माता मंदिर में अपनी मर्जी से विवाह किया और इसकी सूचना लड़की के परिजनों को भी दे दी गई। लड़की ने 16 फरवरी 2026 को अपने बयान में स्पष्ट किया कि वह अपनी मर्जी से दिल्ली से आई है और उसने स्वेच्छा से विवाह किया है। हालांकि, लड़के की उम्र 21 वर्ष से कम होने के कारण लड़की के परिजनों की शिकायत पर 17 फरवरी 2026 को एक प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।

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अदालत के सामने यह तथ्य आया कि 29 जून को राजस्थान के कोटपुतली जिला के एसडीएम कार्यालय से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा-100 के तहत लड़की की बरामदगी का एक आदेश हासिल किया गया। इस आदेश में आरोप लगाया गया था कि लड़की को किसी ने बहला-फुसलाकर अगवा किया है। इस आदेश के आधार पर लड़की के परिजनों ने कांगड़ा से लड़की को उसकी मर्जी के खिलाफ बरामद कर लिया। अदालत ने माना कि चूंकि विवाह कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) में हुआ था और लड़की को इसी राज्य के अधिकार क्षेत्र से बाहर ले जाया गया है, इसलिए इस मामले की सुनवाई का अधिकार हिमाचल हाईकोर्ट के पास है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की इस आशंका पर भी गौर किया कि लड़की की जान को खतरा हो सकता है और यह मामला सीधे तौर पर जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ है।

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