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Rampur Bushahar News: सेब की फसल पर मौसम की मार, 70 से 80 प्रतिशत कम उत्पादन का अनुमान
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रामपुर के निचले और मध्यम क्षेत्रों में नहीं हो पाई फलों की सेटिंग, करोड़ों के सेब कारोबार पर संकट
हजारों बागवानों की बढ़ीं परेशानियां
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। उपमंडल रामपुर के निचले और मध्यम ऊंचाई वाले सेब बाहुल इलाकों में सेब उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका है। इन क्षेत्रों में इस वर्ष सेब उत्पादन को लेकर स्थिति काफी चिंताजनक है।
सर्दियों में सूखे की मार, फ्लावरिंग दौर में बेमौसमी बारिश, अंधड़ और ओलावृष्टि से बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। बगीचों में करीब 20 से 30 फीसदी सेब के फलों की सेटिंग हो पाई है। मौसम प्रतिकूल रहना इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है। बागवानों के अनुसार सर्दियों में बर्फबारी और बारिश न होने के कारण सूखे जैसे हालात पैदा हो गए थे। इसके कारण आवश्यक चिलिंग आवर्स पूरे न होने के कारण जमीन में नमी भी कम रही। वहीं फ्लावरिंग दौर में बारिश होने से पेड़ों में पत्तियां ज्यादा और फूल कम आए। प्रतिकूल मौसम के कारण फ्लावरिंग प्रभावित हुई। इसके कारण फलों की सेटिंग कम हुई है। हर साल मौसम की मार झेलने को मजबूर होना पड़ रहा है। अंधड़ और ओलावृष्टि ने भी बागवानों की कमर तोड़ दी है। मौसम की अनिश्चितता से न केवल फसल प्रभावित हुई है, बल्कि करोड़ों के कारोबार पर भी संकट खड़ा हो गया है।
प्रगतिशील बागवान रंजीत चौहान, प्रेमराज कायथ, इंद्रजीत, सनम, संदेश कुमार, बन्नी कुमार, राजेश, सुनील चौहान और दिनेश कुमार ने बताया कि मौसम की मार से सेब बागवानी पर संकट मंडरा गया है। इस वर्ष सेब फसल का 70 से 80 प्रतिशत कम उत्पादन होने का अनुमान है। इसके कारण जहां बागवानों की सालों की मेहनत बर्बाद हो रही है, वहीं इसका असर कामगारों, व्यापारियों और परिवहन से जुड़े लोगों की आजीविका पर भी पड़ेगा। बागवानों ने सरकार से मौसम की वजह से हुए नुकसान की भरपाई करने की मांग उठाई है।
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हजारों बागवानों की बढ़ीं परेशानियां
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। उपमंडल रामपुर के निचले और मध्यम ऊंचाई वाले सेब बाहुल इलाकों में सेब उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका है। इन क्षेत्रों में इस वर्ष सेब उत्पादन को लेकर स्थिति काफी चिंताजनक है।
सर्दियों में सूखे की मार, फ्लावरिंग दौर में बेमौसमी बारिश, अंधड़ और ओलावृष्टि से बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। बगीचों में करीब 20 से 30 फीसदी सेब के फलों की सेटिंग हो पाई है। मौसम प्रतिकूल रहना इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है। बागवानों के अनुसार सर्दियों में बर्फबारी और बारिश न होने के कारण सूखे जैसे हालात पैदा हो गए थे। इसके कारण आवश्यक चिलिंग आवर्स पूरे न होने के कारण जमीन में नमी भी कम रही। वहीं फ्लावरिंग दौर में बारिश होने से पेड़ों में पत्तियां ज्यादा और फूल कम आए। प्रतिकूल मौसम के कारण फ्लावरिंग प्रभावित हुई। इसके कारण फलों की सेटिंग कम हुई है। हर साल मौसम की मार झेलने को मजबूर होना पड़ रहा है। अंधड़ और ओलावृष्टि ने भी बागवानों की कमर तोड़ दी है। मौसम की अनिश्चितता से न केवल फसल प्रभावित हुई है, बल्कि करोड़ों के कारोबार पर भी संकट खड़ा हो गया है।
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प्रगतिशील बागवान रंजीत चौहान, प्रेमराज कायथ, इंद्रजीत, सनम, संदेश कुमार, बन्नी कुमार, राजेश, सुनील चौहान और दिनेश कुमार ने बताया कि मौसम की मार से सेब बागवानी पर संकट मंडरा गया है। इस वर्ष सेब फसल का 70 से 80 प्रतिशत कम उत्पादन होने का अनुमान है। इसके कारण जहां बागवानों की सालों की मेहनत बर्बाद हो रही है, वहीं इसका असर कामगारों, व्यापारियों और परिवहन से जुड़े लोगों की आजीविका पर भी पड़ेगा। बागवानों ने सरकार से मौसम की वजह से हुए नुकसान की भरपाई करने की मांग उठाई है।
