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Rampur Bushahar News: सतपाल की जीत पर कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, भाजपा ने मनाया क्षणिक जश्न
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आनी में कांग्रेस समर्थित पंचायत समिति अध्यक्ष बनने के बाद शक्ति प्रदर्शन करते कांग्रेस पदाधि
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सतपाल की जीत पर कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, भाजपा ने मनाया क्षणिक जश्न
एक मंच पर दिखे कांग्रेस के दिग्गज, भाजपा के सामने गुटबाजी से उबरने की बड़ी चुनौती
हरिकृष्ण शर्मा
आनी(कुल्लू)। आनी ब्लॉक की पंचायत राजनीति में मंगलवार को उस समय नया मोड़ देखने को मिला, जब पंचायत समिति अध्यक्ष पद पर कांग्रेस समर्थित सतपाल की जीत के बाद कांग्रेस ने एकजुटता का जोरदार प्रदर्शन किया। आनी क्षेत्र में कांग्रेस जहां इस जीत को संगठनात्मक मजबूती मान रही है वहीं भाजपा को अंदरूनी गुटबाजी की चर्चा आम है। पंचायती राज चुनावों के दौरान जहां कांग्रेस शुरू से ही रणनीतिक रूप से एकजुट नजर आई, वहीं भाजपा को आपसी गुटबाजी का खामियाजा उठाना पड़ा। जिला परिषद चुनावों में कांग्रेस ने अपने वार्डों में एक-एक अधिकृत समर्थित प्रत्याशी उतारकर स्पष्ट संदेश दिया था कि पार्टी चुनाव को लेकर पूरी तरह संगठित है। इसका परिणाम भी कांग्रेस के पक्ष में गया और आनी ब्लॉक के दोनों जिला परिषद वार्डों में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। इसी राजनीतिक बढ़त का असर पंचायत समिति अध्यक्ष चुनाव में भी देखने को मिला। सतपाल के अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस ने इसे अपनी बड़ी राजनीतिक जीत के रूप में पेश किया। जीत के बाद निकले विजय जुलूस में कांग्रेस के दिग्गज नेता एक मंच पर दिखाई दिए। इस दौरान मिल्कफेड के अध्यक्ष बुद्धि सिंह ठाकुर, पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष यूपेंद्र कांत मिश्रा, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद शर्मा सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने मंच साझा कर कार्यकर्ताओं को एकजुटता का संदेश दिया। नेताओं ने साफ कहा कि आनी में कांग्रेस पूरी तरह संगठित है और आने वाले चुनावों में भी इसी एकता के दम पर मैदान में उतरेगी। वहीं पंचायत समिति उपाध्यक्ष पद पर आजाद प्रत्याशी गंगा देवी की जीत ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया। गंगा देवी का परिवार कांग्रेस समर्थित माना जाता है, लेकिन उपाध्यक्ष चुनाव में भाजपा के 6 सदस्यों ने उन्हें समर्थन देकर जीत दिलाई। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी उनकी जीत पर जुलूस निकालकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश की। राजनीतिक जानकारों की मानें तो भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब संगठन के भीतर फैली नाराजगी और खेमेबाजी को खत्म करना होगी। पंचायती राज चुनावों में मिली इस चोट ने साफ कर दिया है कि यदि पार्टी ने समय रहते अपने रूठे नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ नहीं लिया, तो आने वाले चुनावों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि भाजपा इस हार से सबक लेकर खुद को संभालती है या कांग्रेस की एकजुटता आगे भी उसके लिए भारी पड़ती रहेगी। संवाद
एक मंच पर दिखे कांग्रेस के दिग्गज, भाजपा के सामने गुटबाजी से उबरने की बड़ी चुनौती
हरिकृष्ण शर्मा
आनी(कुल्लू)। आनी ब्लॉक की पंचायत राजनीति में मंगलवार को उस समय नया मोड़ देखने को मिला, जब पंचायत समिति अध्यक्ष पद पर कांग्रेस समर्थित सतपाल की जीत के बाद कांग्रेस ने एकजुटता का जोरदार प्रदर्शन किया। आनी क्षेत्र में कांग्रेस जहां इस जीत को संगठनात्मक मजबूती मान रही है वहीं भाजपा को अंदरूनी गुटबाजी की चर्चा आम है। पंचायती राज चुनावों के दौरान जहां कांग्रेस शुरू से ही रणनीतिक रूप से एकजुट नजर आई, वहीं भाजपा को आपसी गुटबाजी का खामियाजा उठाना पड़ा। जिला परिषद चुनावों में कांग्रेस ने अपने वार्डों में एक-एक अधिकृत समर्थित प्रत्याशी उतारकर स्पष्ट संदेश दिया था कि पार्टी चुनाव को लेकर पूरी तरह संगठित है। इसका परिणाम भी कांग्रेस के पक्ष में गया और आनी ब्लॉक के दोनों जिला परिषद वार्डों में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। इसी राजनीतिक बढ़त का असर पंचायत समिति अध्यक्ष चुनाव में भी देखने को मिला। सतपाल के अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस ने इसे अपनी बड़ी राजनीतिक जीत के रूप में पेश किया। जीत के बाद निकले विजय जुलूस में कांग्रेस के दिग्गज नेता एक मंच पर दिखाई दिए। इस दौरान मिल्कफेड के अध्यक्ष बुद्धि सिंह ठाकुर, पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष यूपेंद्र कांत मिश्रा, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद शर्मा सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने मंच साझा कर कार्यकर्ताओं को एकजुटता का संदेश दिया। नेताओं ने साफ कहा कि आनी में कांग्रेस पूरी तरह संगठित है और आने वाले चुनावों में भी इसी एकता के दम पर मैदान में उतरेगी। वहीं पंचायत समिति उपाध्यक्ष पद पर आजाद प्रत्याशी गंगा देवी की जीत ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया। गंगा देवी का परिवार कांग्रेस समर्थित माना जाता है, लेकिन उपाध्यक्ष चुनाव में भाजपा के 6 सदस्यों ने उन्हें समर्थन देकर जीत दिलाई। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी उनकी जीत पर जुलूस निकालकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश की। राजनीतिक जानकारों की मानें तो भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब संगठन के भीतर फैली नाराजगी और खेमेबाजी को खत्म करना होगी। पंचायती राज चुनावों में मिली इस चोट ने साफ कर दिया है कि यदि पार्टी ने समय रहते अपने रूठे नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ नहीं लिया, तो आने वाले चुनावों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि भाजपा इस हार से सबक लेकर खुद को संभालती है या कांग्रेस की एकजुटता आगे भी उसके लिए भारी पड़ती रहेगी। संवाद