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Rampur Bushahar News: नित्थर में लंगूरों ने 500 सेब पौधों को पहुंचाया नुकसान
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नित्थर में लंगूरों ने इस तरह से सेब के पेड़ों को पहुंचाया नुकसान। संवाद
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ऊंचाई वाले बगीचों में लंगूरों के आतंक से बागवान परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
नित्थर( कुल्लू)। नित्थर उप तहसील के सेब बहुल क्षेत्र एड़शी, ढमाह और शिल्लाबाग में लंगूरों ने 500 से ज्यादा सेब पौधों को नुकसान पहुंचाया है। लंगूरों ने सेब पेड़ों पर हमला कर बागवानों को आर्थिक झटका दिया है। दर्जनों बागवानों को क्षति पहुंची है। क्षेत्र के बागवानों की आर्थिकी का मुख्य साधन बागवानी है। क्षेत्र से करीब 10 हजार सेब की पेटियों का हर साल उत्पादन होता है।
कई युवाओं ने बागवानी को अपना व्यवसाय चुना है, लेकिन जंगली जानवरों ने बागवानी पर ग्रहण लगा दिया है। कई सेब बागवान इन इलाकों से पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। सेब बहुल क्षेत्रों में लंगूरों ने आतंक मचा रखा हे। यहां के कई बागवानों के पांच सौ से ज्यादा सेब के पेड़ खाकर नष्ट कर दिए हैं। कई बड़े सेब के पेड़ों को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई किसानों की सब्जियों को भी नुकसान पहुंचाया है। भूपिंद्र चौहान, हीरा सिंह, गोपाल चंद सहित अन्य बागवानों को लाखों का नुकसान पहुंचा है। इनकी सबसे ज्यादा संख्या ढमाह गांव के साथ के जंगल में है। अभी तक ये जंगल में ही है, यदि इनका रूख रिहायशी इलाकों की ओर हुआ तो नुकसान होने की आशंका ज्यादा है। लंगूरों की संख्या काफी ज्यादा है। आगामी समय में भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं और ग्रामीण दहशत में है।शिल्लाबाग के बागवान भूपिंद्र चौहान का कहना है कि अपने आसपास के जंगलों को आग से बचाया है। जबकि हमें बारह सिंघा और अन्य जंगली जानवरों से कोई नुकसान नहीं होता है। लंगूर एक बार बगीचे में घुस जाए तो पूरा सेब का बगीचा कुछ ही मिनटों में तहस नहस कर सकता है। जब शिल्लाबाग बगीचा पहुंचा तो काफी नुकसान कर चुके थे। लंगूरों की ओर से किए गए नुकसान वाले पेड़ों पर पैंट लगाकर दुरुस्त किया जा रहा है।
रेंज अधिकारी वन विभाग नित्थर सर्कल सोहन लाल नेगी का कहना है कि पंचायत इसका प्रस्ताव बनाकर अगर उच्च अधिकारियों को भेजेंगे और जो भी दिशा निर्देश होंगे, उसकी मुताबिक आगामी कार्रवाई की जाएगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नित्थर( कुल्लू)। नित्थर उप तहसील के सेब बहुल क्षेत्र एड़शी, ढमाह और शिल्लाबाग में लंगूरों ने 500 से ज्यादा सेब पौधों को नुकसान पहुंचाया है। लंगूरों ने सेब पेड़ों पर हमला कर बागवानों को आर्थिक झटका दिया है। दर्जनों बागवानों को क्षति पहुंची है। क्षेत्र के बागवानों की आर्थिकी का मुख्य साधन बागवानी है। क्षेत्र से करीब 10 हजार सेब की पेटियों का हर साल उत्पादन होता है।
कई युवाओं ने बागवानी को अपना व्यवसाय चुना है, लेकिन जंगली जानवरों ने बागवानी पर ग्रहण लगा दिया है। कई सेब बागवान इन इलाकों से पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। सेब बहुल क्षेत्रों में लंगूरों ने आतंक मचा रखा हे। यहां के कई बागवानों के पांच सौ से ज्यादा सेब के पेड़ खाकर नष्ट कर दिए हैं। कई बड़े सेब के पेड़ों को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई किसानों की सब्जियों को भी नुकसान पहुंचाया है। भूपिंद्र चौहान, हीरा सिंह, गोपाल चंद सहित अन्य बागवानों को लाखों का नुकसान पहुंचा है। इनकी सबसे ज्यादा संख्या ढमाह गांव के साथ के जंगल में है। अभी तक ये जंगल में ही है, यदि इनका रूख रिहायशी इलाकों की ओर हुआ तो नुकसान होने की आशंका ज्यादा है। लंगूरों की संख्या काफी ज्यादा है। आगामी समय में भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं और ग्रामीण दहशत में है।शिल्लाबाग के बागवान भूपिंद्र चौहान का कहना है कि अपने आसपास के जंगलों को आग से बचाया है। जबकि हमें बारह सिंघा और अन्य जंगली जानवरों से कोई नुकसान नहीं होता है। लंगूर एक बार बगीचे में घुस जाए तो पूरा सेब का बगीचा कुछ ही मिनटों में तहस नहस कर सकता है। जब शिल्लाबाग बगीचा पहुंचा तो काफी नुकसान कर चुके थे। लंगूरों की ओर से किए गए नुकसान वाले पेड़ों पर पैंट लगाकर दुरुस्त किया जा रहा है।
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रेंज अधिकारी वन विभाग नित्थर सर्कल सोहन लाल नेगी का कहना है कि पंचायत इसका प्रस्ताव बनाकर अगर उच्च अधिकारियों को भेजेंगे और जो भी दिशा निर्देश होंगे, उसकी मुताबिक आगामी कार्रवाई की जाएगी।