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Rampur Bushahar News: सेब के पेड़ों पर कम फूल, उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका
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कोटरवाई क्षेत्र में सेब के बगोचों में निकल रही पत्तियां। संवाद
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चिंतित बागवानों ने इस बार परागण के लिए मधुमक्खियों के बॉक्स भी नहीं लगाए
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई (रोहड़ू)। कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इस वर्ष सेब की फसल को लेकर बागवानों की चिंता बढ़ गई है। इस बार सेब के पेड़ों पर बहुत कम फूल आए हैं, जिससे उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है। स्थिति यह है कि कई बागवानों ने इस बार न तो परागण के लिए मधुमक्खियों के बॉक्स लगाए हैं और न ही पिंकबड स्टेज पर की जाने वाली स्प्रे की जा रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि पेड़ों पर फूल ही बहुत कम हैं, जिससे इन कार्यों का कोई विशेष लाभ नजर नहीं आ रहा। स्थानीय बागवान नीरज ठाकुर, सुरेश शर्मा, रविंद्र चौहान, रमन और सूरत राम ने बताया कि इस बार सेब के पेड़ों पर फूल बहुत कम मात्रा में आए हैं। कई पेड़ों में तो बिल्कुल भी फूल नहीं हैं, जबकि कुछ में थोड़े बहुत फूल नजर आ रहे हैं। ऐसे में फसल उत्पादन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले वर्ष अधिक उत्पादन और समय से पहले पतझड़ होने के कारण इस बार पेड़ों में फूल कम आए हैं। इसके चलते बागवानों को आर्थिक नुकसान की चिंता सता रही है। यदि यही स्थिति रही तो उनके लिए सालभर का खर्च निकालना मुश्किल हो जाएगा।
इस बार सेब के पेड़ों में फूल कम आने का कारण पिछले वर्ष समय से पहले पतझड़ और अधिक फसल होना है। बागवान उद्यान विभाग की ओर से जारी शेड्युल को अपनाएं, इससे ही अगले वर्ष के लिए इस समस्या का निदान हो सकेगा।-- नीरज, उद्यान विकास अधिकारी
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कोटखाई (रोहड़ू)। कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इस वर्ष सेब की फसल को लेकर बागवानों की चिंता बढ़ गई है। इस बार सेब के पेड़ों पर बहुत कम फूल आए हैं, जिससे उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है। स्थिति यह है कि कई बागवानों ने इस बार न तो परागण के लिए मधुमक्खियों के बॉक्स लगाए हैं और न ही पिंकबड स्टेज पर की जाने वाली स्प्रे की जा रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि पेड़ों पर फूल ही बहुत कम हैं, जिससे इन कार्यों का कोई विशेष लाभ नजर नहीं आ रहा। स्थानीय बागवान नीरज ठाकुर, सुरेश शर्मा, रविंद्र चौहान, रमन और सूरत राम ने बताया कि इस बार सेब के पेड़ों पर फूल बहुत कम मात्रा में आए हैं। कई पेड़ों में तो बिल्कुल भी फूल नहीं हैं, जबकि कुछ में थोड़े बहुत फूल नजर आ रहे हैं। ऐसे में फसल उत्पादन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले वर्ष अधिक उत्पादन और समय से पहले पतझड़ होने के कारण इस बार पेड़ों में फूल कम आए हैं। इसके चलते बागवानों को आर्थिक नुकसान की चिंता सता रही है। यदि यही स्थिति रही तो उनके लिए सालभर का खर्च निकालना मुश्किल हो जाएगा।
इस बार सेब के पेड़ों में फूल कम आने का कारण पिछले वर्ष समय से पहले पतझड़ और अधिक फसल होना है। बागवान उद्यान विभाग की ओर से जारी शेड्युल को अपनाएं, इससे ही अगले वर्ष के लिए इस समस्या का निदान हो सकेगा।

कोटरवाई क्षेत्र में सेब के बगोचों में निकल रही पत्तियां। संवाद
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