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Rampur Bushahar News: आनी में ओलावृष्टि से सेब की फसल को भारी नुकसान
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आनी के ग्रामीण इलाकों में हुई ओलावृष्टि से सेब की फसल को पहुंचाया नुकसान। संवाद
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सेब की फसल को भारी ओलावृष्टि से नहीं बचा पाए एंटी हेलनेट, हुए ध्वस्त
चवाई, टकरासी, पुनन, तांदी और अरसू में बिछी ओलों की सफेद चादर
बागवानों ने सरकार से नुकसान का आकलन कर राहत की लगाई गुहार
संवाद न्यूज एजेंसी
आनी (कुल्लू)।
आनी के कई ग्रामीण इलाकों में रविवार दोपहर के बाद भारी ओलावृष्टि ने कहर बरपाया। विस क्षेत्र में हुई ओलावृष्टि से सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। बागवानों की ओलावृष्टि से सेब की फसल को बचाने के लिए लगाए एंटी हेलनेट भी भारी ओलावृष्टि से टूट गए। बागवानों ने प्रदेश सरकार और बागवानी विभाग से फसलों को हुए नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने की गुहार लगाई है। ओलावृष्टि का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सेब के बगीचों में सफेद चादर बिछ गई। आनी विधानसभा क्षेत्र के च्वाई, टकरासी, बुच्छैर, पुनन, तांदी, अरसु समेत कई क्षेत्रों में गिरे बड़े-बड़े ओलों ने सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। पहले से ही मौसम की मार झेल रहे बागवानों के लिए यह आपदा किसी बड़े झटके से कम नहीं है। रविवार दोपहर के बाद बिगड़े मौसम के मिजाज ने बागवानों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। स्थानीय बागवानों के अनुसार इस बार ओलावृष्टि का असर बेहद असामान्य रहा। डूगा शिगान के विवेक और च्वाई के महेंद्र वर्मा ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में इतने बड़े और घातक ओले पहले कभी नहीं देखे। ओलों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि पेड़ों पर लगाए गए एंटी हेलनेट तक फट गए और उन्हें सहारा देने वाले बांस भी टूट गए। इस समय सेब की फसल में फ्लाॅवरिंग और सेटिंग का महत्वपूर्ण दौर चल रहा है। ऐसे में लगातार बारिश और अब ओलावृष्टि ने फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। बागवानों का कहना है कि मौसम की अनिश्चितता के चलते पहले ही उत्पादन को लेकर चिंता बनी हुई थी, लेकिन अब हालात और बिगड़ गए हैं। बागवानों ने बताया कि बागवानी पर लगातार खर्च बढ़ता जा रहा है, जबकि उत्पादन घटने से आय लागत से भी कम होने का खतरा पैदा हो गया है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है। प्रभावित बागवानों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि ओलावृष्टि से हुए नुकसान का जल्द आकलन कर उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए ताकि वे इस संकट से उभर सकें।
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बागवानों ने सरकार से नुकसान का आकलन कर राहत की लगाई गुहार
संवाद न्यूज एजेंसी
आनी (कुल्लू)।
आनी के कई ग्रामीण इलाकों में रविवार दोपहर के बाद भारी ओलावृष्टि ने कहर बरपाया। विस क्षेत्र में हुई ओलावृष्टि से सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। बागवानों की ओलावृष्टि से सेब की फसल को बचाने के लिए लगाए एंटी हेलनेट भी भारी ओलावृष्टि से टूट गए। बागवानों ने प्रदेश सरकार और बागवानी विभाग से फसलों को हुए नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने की गुहार लगाई है। ओलावृष्टि का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सेब के बगीचों में सफेद चादर बिछ गई। आनी विधानसभा क्षेत्र के च्वाई, टकरासी, बुच्छैर, पुनन, तांदी, अरसु समेत कई क्षेत्रों में गिरे बड़े-बड़े ओलों ने सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। पहले से ही मौसम की मार झेल रहे बागवानों के लिए यह आपदा किसी बड़े झटके से कम नहीं है। रविवार दोपहर के बाद बिगड़े मौसम के मिजाज ने बागवानों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। स्थानीय बागवानों के अनुसार इस बार ओलावृष्टि का असर बेहद असामान्य रहा। डूगा शिगान के विवेक और च्वाई के महेंद्र वर्मा ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में इतने बड़े और घातक ओले पहले कभी नहीं देखे। ओलों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि पेड़ों पर लगाए गए एंटी हेलनेट तक फट गए और उन्हें सहारा देने वाले बांस भी टूट गए। इस समय सेब की फसल में फ्लाॅवरिंग और सेटिंग का महत्वपूर्ण दौर चल रहा है। ऐसे में लगातार बारिश और अब ओलावृष्टि ने फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। बागवानों का कहना है कि मौसम की अनिश्चितता के चलते पहले ही उत्पादन को लेकर चिंता बनी हुई थी, लेकिन अब हालात और बिगड़ गए हैं। बागवानों ने बताया कि बागवानी पर लगातार खर्च बढ़ता जा रहा है, जबकि उत्पादन घटने से आय लागत से भी कम होने का खतरा पैदा हो गया है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है। प्रभावित बागवानों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि ओलावृष्टि से हुए नुकसान का जल्द आकलन कर उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए ताकि वे इस संकट से उभर सकें।

आनी के ग्रामीण इलाकों में हुई ओलावृष्टि से सेब की फसल को पहुंचाया नुकसान। संवाद

आनी के ग्रामीण इलाकों में हुई ओलावृष्टि से सेब की फसल को पहुंचाया नुकसान। संवाद