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Rampur Bushahar News: चिट्टे के साथ पकड़ी युवती को मिली जमानत

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 25 Mar 2026 11:28 PM IST
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जुब्बल पुलिस ने 13.46 ग्राम चिट्टे के साथ पकड़ी थी आरोपी
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पंजाब के तस्कर के साथ चिट्टे की सप्लाई करने का भी आरोप

संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। विशेष न्यायाधीश रोहड़ू की अदालत ने चिट्टे के मामले में गिरफ्तार युवती को जमानत दे दी है। युवती को करीब डेढ़ महीने पहले 13.46 ग्राम चिट्टे के साथ गिरफ्तार किया था। आरोपी महिला पर पंजाब के तस्कर के साथ चिट्टे की सप्लाई करने का आरोप भी है। जुब्बल थाना की पुलिस ने 9 फरवरी को चिट्टे (हेरोइन) के साथ युवती को पकड़ा था। युवती ने जमानत आवेदन में बताया कि उसका इस अपराध से कोई संबंध नहीं है। उसे गलतफहमी के कारण इस मामले में फंसाया गया है। उसके कब्जे से कथित प्रतिबंधित सामग्री बरामद नहीं हुई है। अभियोजन पक्ष ने जमानत आवेदन का विरोध किया और बताया कि 9 फरवरी की शाम को पुलिस की टीम एनएच-705 पर बौली नाला के पास पहुंची, तो वहां बैठी एक युवती अचानक खड़ी हो गई और आगे की ओर चलने लगी। शक होने पर उसे रोका गया। उससे ऐसी जगह पर अकेले बैठने के बारे में पूछा गया, तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई। स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में पुलिस टीम ने मौके की तलाशी शुरू की, तो एनएच के निचले हिस्से में बनी मुंडेर के दो छेदों के बीच पैकेट मिले। हर पैकेट की जांच करने पर फाॅइल पेपर के अंदर चिट्टा पाया गया। अभियोजन पक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि चंडीगढ़ का एक व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से चिट्टा भिजवाता था, जिसे बौली नाला स्थित एक निश्चित स्थान पर रख दिया जाता था। इसके बाद वह व्हाट्सऐप वीडियो के जरिये लड़की को उस स्थान की लोकेशन भेज देता था। चंडीगढ़ के व्यक्ति के निर्देश पर लड़की चिट्टे के पैकेट कुछ निश्चित स्थानों पर रख देती थी, जिसके बदले में उसे सेवन के लिए चिट्टा और खर्च के लिए पैसे मिलते थे। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड की जांच से पता चलता है कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है। चालान अभी तक अदालत के सामने पेश नहीं किया गया है। ट्रायल पूरा होने में समय लगेगा। आरोपी को अनिश्चितकाल तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता। रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे यह पता चले कि आरोपी अभियोजन पक्ष के सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है या जमानत पर रिहा होने के बाद फरार हो सकता है। केवल अभियोजन पक्ष के सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने या जमानत पर रिहा होने के बाद फरार होने की आशंका के आधार पर आरोपी की स्वतंत्रता को सीमित करना पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा, आरोपी का कोई पिछला आपराधिक इतिहास नहीं है और जमानत याचिका को सजा के तौर पर खारिज नहीं किया जा सकता, क्योंकि सजा केवल पूरी तरह से चले ट्रायल के बाद ही दी जा सकती है। इन सभी तथ्यों पर विचार करते हुए, यह अदालत इस राय पर पहुंची है कि जमानत याचिका स्वीकार किए जाने योग्य है।
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