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हिमाचल पंचायत चुनाव: वन अधिकार दावों के निपटारे तक पंचायत चुनाव लड़ने में बंदिश नहीं; जानें
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर बुशहर।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Thu, 16 Apr 2026 01:08 PM IST
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सार
हिमाचल प्रदेश पंचायती राज विभाग की ओर से जारी पत्र के अनुसार, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 की धारा 4(5) के तहत वन निवासियों के अधिकार तब तक सुरक्षित रहते हैं, जब तक उनके दावों का निपटारा नहीं हो जाता। पढ़ें पूरी खबर...
पंचायत चुनाव।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
वन अधिकार दावों के निपटारे तक वन निवासी को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। हिमाचल प्रदेश पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त निदेशक ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस स्पष्टता के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाए। हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को 31 दिसंबर 2020 को दी गई अपील के संदर्भ में उपरोक्त विषय का उल्लेख किया गया है। निर्देश में कहा गया है कि एक अपील अथवा हस्तक्षेप की मांग वाली याचिका के संदर्भ में स्पष्ट किया गया है कि वन अधिकार के दावे लंबित होने की स्थिति में वन निवासियों को पंचायत चुनाव लड़ने से अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।
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विभाग की ओर से जारी पत्र के अनुसार, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 की धारा 4(5) के तहत वन निवासियों के अधिकार तब तक सुरक्षित रहते हैं, जब तक उनके दावों का निपटारा नहीं हो जाता। निर्वाचन अधिकारियों को जारी पत्र में पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त निदेशक केवल शर्मा ने कहा है कि जिन लोगों ने अपने वन अधिकारों के लिए आवेदन कर रखा है, वे पंचायत राज अधिनियम 1994 की धारा 122(1)(सी) के तहत अयोग्य नहीं माने जाएंगे। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस स्पष्टता के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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चुनाव के दौरान गंदगी फैलाई तो 500 रुपये जुर्माना
आगामी पंचायत चुनावों को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। चुनाव प्रचार के दौरान सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने वालों पर अब 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यह निर्णय विशेष रूप से उन मामलों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जहां प्रत्याशी और उनके समर्थक जगह-जगह पोस्टर, बैनर और पंफ्लेट लगाने और इधर-उधर फेंकने से क्षेत्र में अव्यवस्था और गंदगी फैलाते हैं। प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न आवंटित होने के बाद आयोग की इस पर खास नजर रहेगी। प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार पंचायत सचिवों को इस संबंध में जिम्मेदारी सौंपी गई है। पंचायत स्तर पर वे निगरानी करेंगे कि कोई भी प्रत्याशी या उसका समर्थक नियमों का उल्लंघन न करे। यदि कहीं भी अनधिकृत तरीके से पोस्टर लगाए गए या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पंचायत चुनाव में प्रचार सामग्री लगाने के लिए निर्धारित स्थानों और नियमों का पालन अनिवार्य होगा।
आगामी पंचायत चुनावों को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। चुनाव प्रचार के दौरान सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने वालों पर अब 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यह निर्णय विशेष रूप से उन मामलों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जहां प्रत्याशी और उनके समर्थक जगह-जगह पोस्टर, बैनर और पंफ्लेट लगाने और इधर-उधर फेंकने से क्षेत्र में अव्यवस्था और गंदगी फैलाते हैं। प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न आवंटित होने के बाद आयोग की इस पर खास नजर रहेगी। प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार पंचायत सचिवों को इस संबंध में जिम्मेदारी सौंपी गई है। पंचायत स्तर पर वे निगरानी करेंगे कि कोई भी प्रत्याशी या उसका समर्थक नियमों का उल्लंघन न करे। यदि कहीं भी अनधिकृत तरीके से पोस्टर लगाए गए या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पंचायत चुनाव में प्रचार सामग्री लगाने के लिए निर्धारित स्थानों और नियमों का पालन अनिवार्य होगा।
बागवान का हित सोचने वालों को समर्थन : मंच
हिमाचल प्रदेश में आगामी पंचायती राज और नगर निकाय चुनावों से पहले संयुक्त किसान मंच ने प्रदेश की जनता से किसान और बागवान हितों को प्राथमिकता देने वाले प्रत्याशियों को चुनने की अपील की है। संगठन का कहना है कि प्रदेश की लगभग 70 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष रूप से कृषि और बागवानी से जुड़ी है, जबकि करीब 15 प्रतिशत लोग इस क्षेत्र में श्रमिक के रूप में कार्यरत हैं। ऐसे में पंचायत चुनावों के दौरान इन वर्गों की समस्याओं और मांगों को प्रमुखता से उठाना आवश्यक है। मंच ने कहा कि यदि पंचायती राज संस्थाओं में आर्थिकी से जुड़े मुद्दों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है, तो इससे प्रदेश सरकारों और राजनीतिक दलों की नीतियों में भी सकारात्मक बदलाव लाने में मदद मिलेगी। संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने कहा कि पंचायत चुनाव गांव की आर्थिकी तय करने का अवसर है।
हिमाचल प्रदेश में आगामी पंचायती राज और नगर निकाय चुनावों से पहले संयुक्त किसान मंच ने प्रदेश की जनता से किसान और बागवान हितों को प्राथमिकता देने वाले प्रत्याशियों को चुनने की अपील की है। संगठन का कहना है कि प्रदेश की लगभग 70 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष रूप से कृषि और बागवानी से जुड़ी है, जबकि करीब 15 प्रतिशत लोग इस क्षेत्र में श्रमिक के रूप में कार्यरत हैं। ऐसे में पंचायत चुनावों के दौरान इन वर्गों की समस्याओं और मांगों को प्रमुखता से उठाना आवश्यक है। मंच ने कहा कि यदि पंचायती राज संस्थाओं में आर्थिकी से जुड़े मुद्दों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है, तो इससे प्रदेश सरकारों और राजनीतिक दलों की नीतियों में भी सकारात्मक बदलाव लाने में मदद मिलेगी। संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने कहा कि पंचायत चुनाव गांव की आर्थिकी तय करने का अवसर है।
