सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   Pine and Safeda trees pose a threat to the roads of Aani

Rampur Bushahar News: आनी की सड़कों पर खतरा बने चीड़ और सफेदा के पेड़

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 03 May 2026 11:26 PM IST
विज्ञापन
Pine and Safeda trees pose a threat to the roads of Aani
आनी के बालीओल में चीड़ का जंगल। इसी जगह शनिवार को हुआ था हादसा। संवाद
विज्ञापन
आनी क्षेत्र में जानलेवा साबित हो रहे चीड़ और सफेदा के पेड़, दहशत में लोग
Trending Videos

. पहले भी आनी के बराड़ में मकान पर गिरा था पेड़, महिला की गई थी जान
. बालीओल, चलौहन, रुना-बराड़ के जंगल अत्यधिक संवेदनशील
हरिकृष्ण शर्मा
आनी (कुल्लू)। आनी क्षेत्र में चीड़ और सफेदा के पेड़ लोगों के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। जंगल की आग और बरोजा निकलने के बाद सूखे कई चीड़ के पेड़ खतरा बन चुके हैं। ढलानदार 70–80 डिग्री की पहाड़ियों पर खड़े यह पेड़ तेज हवा और अंधड़ के दौरान जड़ से उखड़कर या टूटकर तेजी से नीचे सड़क की ओर गिरते हैं, जिससे जानमाल को खतरा बना रहता है। शनिवार को आनी–गुगरा सड़क पर एक चलती बोलेरो गाड़ी पर चीड़ का पेड़ गिरने से चार शिक्षकों की मौत हो गई। इससे पहले भी आनी के बराड़ क्षेत्र में ऐसा हादसा हो चुका है। तेज हवा से एक विशाल पेड़ पहाड़ी से गिरकर मकान पर आ गिरा था। इसमें एक महिला की जान चली गई थी। इसके अलावा कई वाहन भी इन पेड़ों के गिरने से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। विशेष रूप से च्वाई के बालीओल, कमांद के चलौहन और आनी से रुना-बराड़ तक के जंगल और पहाड़ियां अत्यधिक संवेदनशील हैं। इन क्षेत्रों में यदि कोई पेड़ गिरता है, तो वह सीधे तेज गति से सड़क तक पहुंच जाता है, जिससे दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार इन पेड़ों के खतरनाक होने के पीछे कई कारण हैं। वन विभाग की ओर से चीड़ के पेड़ों से बरोजा (राल) निकालने के लिए ठेके दिए जाते हैं, जिससे पेड़ों को बार-बार काटा और छेदा जाता है। इससे पेड़ कमजोर होकर अंदर से खोखले हो जाते हैं। इसके अलावा जंगलों में लगने वाली आग भी इन पेड़ों को अधमरा कर देती है, जिससे तेज हवा में इनके गिरने की आशंका और बढ़ जाती है। वहीं, आनी कस्बे में मौजूद सफेदा के पेड़ भी खतरनाक हैं। ये पेड़ बहुत विशालकाय है और अंधड़ के दौरान आसानी से इनकी विशाल शाखाएं टूटकर गिर जाती हैं। हाल के दिनों में कई वाहनों को इससे नुकसान पहुंचा है। स्थानीय लोगों और कस्बेवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे खतरनाक पेड़ों की पहचान कर उन्हें समय रहते हटाया जाए ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को टाला जा सके। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इस तरह की घटनाएं और बढ़ सकती हैं।
बालीओल क्षेत्र में करीब 150 सूखे एवं गिरे हुए पेड़ों की पहचान की गई है, जिन्हें वन निगम की ओर से शीघ्र ही काटकर हटाया जाएगा। इसके अतिरिक्त, पिछले वर्ष बालीओल में 67 हरे पेड़ आंधी-तूफान के कारण गिरकर सड़क पर आ गए थे। नियमानुसार हरे पेड़ों की कटाई की अनुमति नहीं है, इसलिए उन्हें नहीं काटा जा सकता। आनी कस्बे में सफेदा के कुछ ऐसे पेड़ चिन्हित किए गए हैं, जो सुरक्षा की दृष्टि से खतरा बने हुए हैं। इन पेड़ों को हटाने के लिए अनुमति प्रदान कर दी गई है। इन्हें भी वन निगम की ओर से जल्द हटाया जाएगा। --रत्न सिंह, आरओ चव्वाई।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article