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Rampur Bushahar News: खराब मौसम से प्रभावित हो रहा सेब बगीचों में परागण
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मधुमक्खियों की देखरेख करते मौन पालक सूरज सन्नी चौहान। संवाद
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बगीचों में पर्याप्त संख्या में मधुमक्खी की कालोनियां रखना बेहद जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। सेब बहुल क्षेत्रों में खराब मौसम, ठंडे तापमान और रुक-रुक कर हो रही बारिश ने बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों का असर अब सेब के बगीचों में परागण प्रक्रिया पर पड़ने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मधुमक्खियों की सक्रियता घटने से फूलों का समय पर परागण नहीं हो पा रहा है, जिससे फल सेटिंग प्रभावित होने और उत्पादन में कमी आने की आशंका बढ़ गई है। ऐसे समय में बागवानों के लिए मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देना और बगीचों में पर्याप्त संख्या में मधुमक्खी की कालोनियां रखना बेहद जरूरी है। ग्रीन बी एसोसिएशन के प्रधान, मधुमक्खी पालक एवं परागण विशेषज्ञ सूरज चौहान सनी ने बताया कि मौजूदा मौसम मधुमक्खियों की गतिविधियों के लिए अनुकूल नहीं है। ठंड और बरसात के दौरान मधुमक्खियां सामान्य रूप से बाहर नहीं निकल पातीं, जिससे उन्हें फूलों से नेक्टर और पराग एकत्रित करने में कठिनाई होती है। इसका सीधा असर बगीचों में परागण पर पड़ता है। सेब की अच्छी फल सेटिंग के लिए फूलों के समय मधुमक्खियों की सक्रिय मौजूदगी जरूरी होती है, लेकिन खराब मौसम के कारण यह प्रक्रिया बाधित हो रही है। उन्होंने बताया कि निचले क्षेत्रों में इस समय बगीचों में फ्लॉवरिंग शुरू हो चुकी है और आने वाले दिनों में यदि मौसम साफ होता है, तो बागवानों को तुरंत अपने बगीचों में मधुमक्खी कालोनियों की संख्या बढ़ानी चाहिए। उनके अनुसार केवल बॉक्स रखने भर से काम नहीं चलेगा, बल्कि मजबूत और सक्रिय कालोनियों का चयन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि कमजोर कालोनियां बगीचों में रखी जाएंगी, तो अपेक्षित स्तर का परागण नहीं हो पाएगा। सूरज चौहान सनी ने कहा कि प्रति हेक्टेयर कम से कम आठ से 10 मधुमक्खी बॉक्स सुनिश्चित किए जाने चाहिए ताकि फूलों का पर्याप्त और संतुलित परागण हो सके। उन्होंने बागवानों को सलाह दी कि बगीचों में कीटनाशकों का छिड़काव मधुमक्खियों के उड़ान समय में बिल्कुल न करें। ऐसा करने से मधुमक्खियां प्रभावित होती हैं और उनकी मृत्यु तक हो सकती है। इसका सीधा नुकसान बागवानों को उठाना पड़ता है। यदि छिड़काव अत्यंत आवश्यक हो, तो इसे शाम के समय या मधुमक्खियों की सक्रियता कम होने पर ही किया जाए। परागण विशेषज्ञों के अनुसार अच्छा पॉलिनेशन केवल फल लगने तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसका सीधा संबंध फल की गुणवत्ता, आकार, रंग और कुल उत्पादन से भी होता है। बगीचे में पर्याप्त संख्या में मधुमक्खियां मौजूद रहने पर उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव है। यही कारण है कि आधुनिक बागवानी में मधुमक्खी पालन को अब सहायक गतिविधि नहीं, बल्कि एक आवश्यक कृषि प्रबंधन का हिस्सा माना जाने लगा है। बागवानों का कहना है कि मौसम पहले ही सेब की फसल के लिए कई तरह की चुनौतियां पैदा कर रहा है। ऐसे में यदि परागण प्रभावित हुआ, तो इसका असर पूरे सीजन की पैदावार पर पड़ सकता है, इसलिए समय रहते मधुमक्खी कालोनियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश में सेब उत्पादन को स्थिर और बेहतर बनाए रखने के लिए बागवानी के साथ मधुमक्खी पालन को भी समान महत्व देना होगा। मौजूदा परिस्थितियों में यह स्पष्ट है कि खराब मौसम के बीच मधुमक्खियों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। यदि बागवान समय रहते जागरूक होकर अपने बगीचों में पर्याप्त और सक्रिय मधुमक्खी कालोनियां रखते हैं, तो प्रतिकूल मौसम के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। सेब बहुल क्षेत्रों में खराब मौसम, ठंडे तापमान और रुक-रुक कर हो रही बारिश ने बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों का असर अब सेब के बगीचों में परागण प्रक्रिया पर पड़ने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मधुमक्खियों की सक्रियता घटने से फूलों का समय पर परागण नहीं हो पा रहा है, जिससे फल सेटिंग प्रभावित होने और उत्पादन में कमी आने की आशंका बढ़ गई है। ऐसे समय में बागवानों के लिए मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देना और बगीचों में पर्याप्त संख्या में मधुमक्खी की कालोनियां रखना बेहद जरूरी है। ग्रीन बी एसोसिएशन के प्रधान, मधुमक्खी पालक एवं परागण विशेषज्ञ सूरज चौहान सनी ने बताया कि मौजूदा मौसम मधुमक्खियों की गतिविधियों के लिए अनुकूल नहीं है। ठंड और बरसात के दौरान मधुमक्खियां सामान्य रूप से बाहर नहीं निकल पातीं, जिससे उन्हें फूलों से नेक्टर और पराग एकत्रित करने में कठिनाई होती है। इसका सीधा असर बगीचों में परागण पर पड़ता है। सेब की अच्छी फल सेटिंग के लिए फूलों के समय मधुमक्खियों की सक्रिय मौजूदगी जरूरी होती है, लेकिन खराब मौसम के कारण यह प्रक्रिया बाधित हो रही है। उन्होंने बताया कि निचले क्षेत्रों में इस समय बगीचों में फ्लॉवरिंग शुरू हो चुकी है और आने वाले दिनों में यदि मौसम साफ होता है, तो बागवानों को तुरंत अपने बगीचों में मधुमक्खी कालोनियों की संख्या बढ़ानी चाहिए। उनके अनुसार केवल बॉक्स रखने भर से काम नहीं चलेगा, बल्कि मजबूत और सक्रिय कालोनियों का चयन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि कमजोर कालोनियां बगीचों में रखी जाएंगी, तो अपेक्षित स्तर का परागण नहीं हो पाएगा। सूरज चौहान सनी ने कहा कि प्रति हेक्टेयर कम से कम आठ से 10 मधुमक्खी बॉक्स सुनिश्चित किए जाने चाहिए ताकि फूलों का पर्याप्त और संतुलित परागण हो सके। उन्होंने बागवानों को सलाह दी कि बगीचों में कीटनाशकों का छिड़काव मधुमक्खियों के उड़ान समय में बिल्कुल न करें। ऐसा करने से मधुमक्खियां प्रभावित होती हैं और उनकी मृत्यु तक हो सकती है। इसका सीधा नुकसान बागवानों को उठाना पड़ता है। यदि छिड़काव अत्यंत आवश्यक हो, तो इसे शाम के समय या मधुमक्खियों की सक्रियता कम होने पर ही किया जाए। परागण विशेषज्ञों के अनुसार अच्छा पॉलिनेशन केवल फल लगने तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसका सीधा संबंध फल की गुणवत्ता, आकार, रंग और कुल उत्पादन से भी होता है। बगीचे में पर्याप्त संख्या में मधुमक्खियां मौजूद रहने पर उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव है। यही कारण है कि आधुनिक बागवानी में मधुमक्खी पालन को अब सहायक गतिविधि नहीं, बल्कि एक आवश्यक कृषि प्रबंधन का हिस्सा माना जाने लगा है। बागवानों का कहना है कि मौसम पहले ही सेब की फसल के लिए कई तरह की चुनौतियां पैदा कर रहा है। ऐसे में यदि परागण प्रभावित हुआ, तो इसका असर पूरे सीजन की पैदावार पर पड़ सकता है, इसलिए समय रहते मधुमक्खी कालोनियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश में सेब उत्पादन को स्थिर और बेहतर बनाए रखने के लिए बागवानी के साथ मधुमक्खी पालन को भी समान महत्व देना होगा। मौजूदा परिस्थितियों में यह स्पष्ट है कि खराब मौसम के बीच मधुमक्खियों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। यदि बागवान समय रहते जागरूक होकर अपने बगीचों में पर्याप्त और सक्रिय मधुमक्खी कालोनियां रखते हैं, तो प्रतिकूल मौसम के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।