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Rampur Bushahar News: रामपुर, नोगवैली, 12/20 घाटी में बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि
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सेब और मटर की फसल को पहुंचा नुकसान
लगातार बिगड़ रहे मौसम ने बढ़ाई बागवानों की चिंता
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर/डंसा। मौसम विभाग की ओर से जारी अलर्ट के बीच शनिवार दोपहर बाद रामपुर शहर, नोग वैली और 12/20 घाटी में भारी बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। बारिश और ओलावृष्टि से रामपुर शहर में गर्मी से राहत मिली है, वहीं सेब बहुल क्षेत्रों के बागवानों की चिंता बढ़ गई है। ओलावृष्टि से सेब की फसल को नुकसान पहुंचा है।
शनिवार दोपहर बाद करीब 3:30 बजे शुरू हुई बारिश देर शाम तक लगातार जारी रही। नोग वैली में बारिश के साथ करीब 15 मिनट तक भारी ओलावृष्टि हुई। इन दिनों मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब दाने के आकार में बन चुका है। ऐसे में सेब के दाने नाजुक स्थिति में हैं। ओलावृष्टि से दाग लगने के साथ नीचे गिर सकते हैं। सेब बहुल क्षेत्र 12/20 घाटी में भी ओलावृष्टि हुई है। बागवानों को चिंता सताने लगी है। बागवानों को हर साल प्रकृति की चौतरफा मार से जूझना पड़ रहा है, लेकिन प्रदेश सरकार और बागवानी विभाग की अनदेखी के चलते नुकसान के एवज में कुछ भी हासिल नहीं होता। महंगाई के दौर में एंटी हेल नेट जैसी सुविधाओं से भी अधिकांश छोटे बागवानों को जूझना पड़ रहा है। बागवानी विभाग के आला अधिकारी बागवानों को एंटी हेल नेट स्थापित करने का सुझाव देते हैं, लेकिन आर्थिक मंदी की मार झेल रहे बागवानों के नसीब में इस तरह की सुविधा का लाभ उठाना पहुंच से दूर है।
प्रगतिशील बागवानों गोविंद सिंह, हिम्मत सिंह, दिनेश, अमित, दुर्गा सिंह, सुंदर सिंह, राजवीर, प्रकाश, घनश्याम, सुरजीत सहित कई अन्य बागवानों ने बताया कि साल भर की मेहनत के बाद हर साल प्राकृतिक आपदा के चलते भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसके एवज में बागवानी विभाग और राजस्व विभाग की आकलन रिपोर्ट फाइलों में दफन होकर सिमट जाती है। बीते कई सालों से मौसम की मार के चलते बागवानी को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
कोट
बागवानी विभाग रामपुर के एचडीओ डॉ. प्रवीन मेहता ने कहा कि ओलावृष्टि के तुरंत बाद 200 लीटर पानी में 100 ग्राम कार्बेन्डाजिम या 600 ग्राम मैनकोजेब का छिड़काव करें। ओलावृष्टि के 3-4 दिनों के भीतर 200 लीटर पानी में 200 ग्राम बोरिक एसिड 500 ग्राम जिंक सल्फेट, 250 ग्राम क्विक लाइम का मिश्रण घोलकर छिड़काव करें। 10 से 12 दिनों के बाद एग्रोमिन, मल्टीप्लेक्स या माइक्रोविट जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का 400 से 600 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी की दर से छिड़काव करने की सलाह दी है। ओलावृष्टि से प्रभावित सेब के बाग में 1 किलोग्राम यूरिया को 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
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लगातार बिगड़ रहे मौसम ने बढ़ाई बागवानों की चिंता
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर/डंसा। मौसम विभाग की ओर से जारी अलर्ट के बीच शनिवार दोपहर बाद रामपुर शहर, नोग वैली और 12/20 घाटी में भारी बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। बारिश और ओलावृष्टि से रामपुर शहर में गर्मी से राहत मिली है, वहीं सेब बहुल क्षेत्रों के बागवानों की चिंता बढ़ गई है। ओलावृष्टि से सेब की फसल को नुकसान पहुंचा है।
शनिवार दोपहर बाद करीब 3:30 बजे शुरू हुई बारिश देर शाम तक लगातार जारी रही। नोग वैली में बारिश के साथ करीब 15 मिनट तक भारी ओलावृष्टि हुई। इन दिनों मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब दाने के आकार में बन चुका है। ऐसे में सेब के दाने नाजुक स्थिति में हैं। ओलावृष्टि से दाग लगने के साथ नीचे गिर सकते हैं। सेब बहुल क्षेत्र 12/20 घाटी में भी ओलावृष्टि हुई है। बागवानों को चिंता सताने लगी है। बागवानों को हर साल प्रकृति की चौतरफा मार से जूझना पड़ रहा है, लेकिन प्रदेश सरकार और बागवानी विभाग की अनदेखी के चलते नुकसान के एवज में कुछ भी हासिल नहीं होता। महंगाई के दौर में एंटी हेल नेट जैसी सुविधाओं से भी अधिकांश छोटे बागवानों को जूझना पड़ रहा है। बागवानी विभाग के आला अधिकारी बागवानों को एंटी हेल नेट स्थापित करने का सुझाव देते हैं, लेकिन आर्थिक मंदी की मार झेल रहे बागवानों के नसीब में इस तरह की सुविधा का लाभ उठाना पहुंच से दूर है।
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प्रगतिशील बागवानों गोविंद सिंह, हिम्मत सिंह, दिनेश, अमित, दुर्गा सिंह, सुंदर सिंह, राजवीर, प्रकाश, घनश्याम, सुरजीत सहित कई अन्य बागवानों ने बताया कि साल भर की मेहनत के बाद हर साल प्राकृतिक आपदा के चलते भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसके एवज में बागवानी विभाग और राजस्व विभाग की आकलन रिपोर्ट फाइलों में दफन होकर सिमट जाती है। बीते कई सालों से मौसम की मार के चलते बागवानी को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
कोट
बागवानी विभाग रामपुर के एचडीओ डॉ. प्रवीन मेहता ने कहा कि ओलावृष्टि के तुरंत बाद 200 लीटर पानी में 100 ग्राम कार्बेन्डाजिम या 600 ग्राम मैनकोजेब का छिड़काव करें। ओलावृष्टि के 3-4 दिनों के भीतर 200 लीटर पानी में 200 ग्राम बोरिक एसिड 500 ग्राम जिंक सल्फेट, 250 ग्राम क्विक लाइम का मिश्रण घोलकर छिड़काव करें। 10 से 12 दिनों के बाद एग्रोमिन, मल्टीप्लेक्स या माइक्रोविट जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का 400 से 600 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी की दर से छिड़काव करने की सलाह दी है। ओलावृष्टि से प्रभावित सेब के बाग में 1 किलोग्राम यूरिया को 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
