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Rampur Bushahar News: नोगवैली में बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि
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डंसा में सोमवार को मौसम बिगडऩे के बाद हुई ओलावृष्टि। संवाद
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बागवानों की बढ़ीं दुश्वारियां, सेब फसल हो सकती है प्रभावित
हर साल प्रकृति की चौतरफा मार झेल रहे बागवान, नुकसान की कोई भरपाई नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
डंसा (रामपुर बुशहर)। नोगवैली और आसपास के सेब बहुल क्षेत्रों में सोमवार को दोपहर बाद बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। इस कारण बागवानों की परेशानी बढ़ गई है। सेब की फसल के प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, निचले क्षेत्रों में बारिश से नकदी फसलों को संजीवनी मिली है। मटर और अन्य नकदी फसल के लिए बारिश फायदेमंद साबित होगी। कृषि और बागवानी के रुके पड़े कार्य जमीन में नमी आने से शुरू होंगे। अभी निचले क्षेत्रों में सेब में पिंकबड आने के साथ फ्लॉवरिंग का दौर शुरू होने वाला है। मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अभी सेब के पेड़ों में पत्ते निकलने शुरू हो चुके हैं। बागवानों के समक्ष हर साल की भांति ओलावृष्टि होने का डर सताने लगा है। प्रगतिशील बागवानों में शिशु पाल, सुंदर सिंह, बंसी लाल, यशपाल, श्याम मुरारी, जगत सिंह, राजवीर, छतर सिंह, गोविंद कायथ, कुलदीप, वीरेंद्र सिंह, विजय सिंह और कमल चाई सहित अन्य बागवानों का कहना है कि प्रकृति की चौतरफा मार के चलते साल भर की मेहनत बर्बाद होने से बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसके बावजूद सरकार और बागवानी विभाग का नुकसान का आकलन कागजों तक ही सीमित रहता है। बागवानी विभाग के तहत सब्सिडी का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए ताकि छोटे और मध्यम किसान-बागवान भी एंटी हेलनेट जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
डंसा (रामपुर बुशहर)। नोगवैली और आसपास के सेब बहुल क्षेत्रों में सोमवार को दोपहर बाद बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। इस कारण बागवानों की परेशानी बढ़ गई है। सेब की फसल के प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, निचले क्षेत्रों में बारिश से नकदी फसलों को संजीवनी मिली है। मटर और अन्य नकदी फसल के लिए बारिश फायदेमंद साबित होगी। कृषि और बागवानी के रुके पड़े कार्य जमीन में नमी आने से शुरू होंगे। अभी निचले क्षेत्रों में सेब में पिंकबड आने के साथ फ्लॉवरिंग का दौर शुरू होने वाला है। मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अभी सेब के पेड़ों में पत्ते निकलने शुरू हो चुके हैं। बागवानों के समक्ष हर साल की भांति ओलावृष्टि होने का डर सताने लगा है। प्रगतिशील बागवानों में शिशु पाल, सुंदर सिंह, बंसी लाल, यशपाल, श्याम मुरारी, जगत सिंह, राजवीर, छतर सिंह, गोविंद कायथ, कुलदीप, वीरेंद्र सिंह, विजय सिंह और कमल चाई सहित अन्य बागवानों का कहना है कि प्रकृति की चौतरफा मार के चलते साल भर की मेहनत बर्बाद होने से बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसके बावजूद सरकार और बागवानी विभाग का नुकसान का आकलन कागजों तक ही सीमित रहता है। बागवानी विभाग के तहत सब्सिडी का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए ताकि छोटे और मध्यम किसान-बागवान भी एंटी हेलनेट जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकें।

डंसा में सोमवार को मौसम बिगडऩे के बाद हुई ओलावृष्टि। संवाद