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Rampur Bushahar News: राउलाने उत्सव आज से होगा शुरू

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 05 Mar 2026 11:53 PM IST
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कल्पा गांव में मनाया जाएगा पांच दिवसीय उत्सव
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पिछले साल उत्सव के दौरान किए जाने वाले स्वांग के फोटो और वीडियो हुए थे वायरल
इस बार भारी संख्या में पर्यटकों के पहुंचने की उम्मीद
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। किन्नौर जिले में राउलाने उत्सव शुक्रवार से शुरू होगा। ऐतिहासिक गांव कल्पा का राउलाने उत्सव विश्व प्रसिद्ध हो चुका है। यह उत्सव गांव में सस्कर त्योहार के बाद मनाया जाता है। राउलाने उत्सव पांच दिन तक मनाया जाता है। कल्पा के राउलाने उत्सव के फोटो और वीडियो कुछ महीने पहले दुनियाभर में सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इससे उम्मीद लगाई जा रही कि इस बार अधिक संख्या में पर्यटक पहुंचेंगे। सस्कर त्योहार देवी चंडिका माता के आदेशों के अनुसार मनाया जाता है। इस त्योहार के दौरान ग्रामीण अपने घरों की साफ सफाई करके हर दिन पूजा-पाठ करते हैं। त्योहार के शुभारंभ पर कंडे (ऊंचाई वाले क्षेत्र) से आए सावनी (वन से आए देवी-देवता) की पूजा करते हैं। अंतिम दिन कंडे से आए सावनी को पूजा-पाठ के साथ ही विदाई की जाती है। मान्यताओं के अनुसार, इस राउलाने उत्सव को मनाने का मुख्य उद्देश्य कंडे से आए सावनी को खुश करके वापस भेजना है ताकि गांव में सुख-समृद्धि बनी रहे। इस मेले के दौरान पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ध्वनियों के साथ पारंपरिक परिधान में पुरुष नृत्य करते हैं। इस मेले में सिर्फ पुरुष ही भाग लेते हैं। महिलाओं के परिधान भी पुरुषों को पहनाया जाता है। इस मेले में मुख्य रूप से तीन चरित्र होते हैं। इसमें राउला, राउलाने और पुंदलु होते हैं। जो पुरुष राउला बनता हैं, उसके चेहरे को (किन्नौर में दौड़ू को बांधने के लिया उपयोग की जाने वाली) गाछी से पूरी तरह से छुपाया जाता है और कोट पेंट पहनाया जाता है। राउलाने को महिलाओं को पहनाए जाने वाले दौड़ू के साथ सोने और चांदी के आभूषण पहनाए जाते हैं। आभूषणों से पूरी तरह से चेहरे को छुपाया जाता है। तीसरा और अंतिम चरित्र पुंदलु है, जो भेड़ और बकरियों के खाल से बनाए हुए मास्क को पहन कर चेहरे को छुपा कर लोगों के साथ हंसी मजाक करते हैं। यह मेला ब्रह्मा विष्णु मंदिर से शुरू होकर नारायण नागिन देवी जी के मंदिर में संपन्न होता है। इसी तरह पांचों दिन तक यह मेला मनाया जाता है। मेले के शुरुआत में भी पुंदलुओ की ओर से पूजा पाठ किया जाता है। समापन में भी पूरी सत्य निष्ठा के साथ पूजा पाठ कर कंडे से आए सावनी को विदाई दी जाती है। इस वर्ष यह मेला विश्व प्रसिद्ध हो गया है, जिससे स्थानीय लोगों के साथ बाहरी राज्यों से भारी संख्या में पर्यटकों के आने की संभावना है।
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