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Rampur Bushahar News: कागजों में योजनाओं की हरियाली, धरातल पर बदहाली
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भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष सुनील नेगी। स्रोत : जागरूक पाठक
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ग्राउंड रिपोर्ट : रोहड़ू में उद्यान विभाग में अधिकारियों के पद खाली, 13 प्लांट प्रोटेक्शन सेंटरों पर ताले
. एचईओ
और एचडीओ
की अनुपस्थिति का सीधा असर बागवानी पर पड़
रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। इन दिनों बगीचों में फसलों को तैयार करने का काम जोरों पर है। रोहड़ू क्षेत्र सेब के उत्पादन के लिए प्रख्यात है, लेकिन सरकार की अनदेखी के कारण बागवानों की मुश्किलें बढ़ी हुईं हैं। सरकार की ओर से यहां कागजों में बागवानों के लिए योजनाओं की हरियाली तो है, लेकिन धरातल पर बदहाली की स्थिति है। सेब समेत अन्य फसलों में बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है। वहीं, बागवानों को न समय पर रोग और कीट नियंत्रण की सलाह मिल पा रही है और न ही अनुदान पर मिलने वालीं दवाइयां मिल पा रही हैं। इसका कारण उद्यान विभाग में स्टाफ का भारी टोटा। पूरे रोहड़ू क्षेत्र में हॉर्टिकल्चर एक्सटेंशन ऑफिसर (एचईओ) के 13 और हॉर्टिकल्चर डेवलपमेंट ऑफिसर (एचडीओ) के चार पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं। नतीजतन, 13 प्लांट प्रोटेक्शन सेंटरों पर ताले लटके हुए हैं। सरकार एक ओर बागवानी को आय बढ़ाने का मुख्य आधार बताकर कई योजनाएं चला रही है, तो दूसरी ओर लोगों को विभागीय सहयोग उपलब्ध नहीं हो पा रहा। स्थानीय बागवानों का कहना है कि विभागीय कर्मचारियों की कमी के कारण उनकी आमदनी पर सीधा असर पड़ रहा है। वहीं, नए बागवानों को योजनाओं की जानकारी तक सही ढंग से नहीं मिल पा रही, जिससे वे सरकारी लाभ से वंचित रह जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इन पदों को नहीं भरा गया, तो क्षेत्र की बागवानी अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है। रोहड़ू जैसे सेब उत्पादन क्षेत्र में तकनीकी निगरानी का अभाव सीधे उत्पादन गिरावट और गुणवत्ता हानि में बदल सकता है।
नहीं मिल रहा योजनाओं का लाभ
उद्यान विभाग की ओर से प्लांट प्रोटेक्शन सेंटरों को स्थापित करने का उद्देश्य किसानों और बागवानों को आधुनिक तकनीक, पौधों का संरक्षण, उन्नत किस्मों के पौधे और अनुदान आधारित योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। इसके अलावा एंटी हेलनेट, ड्रिप इरिगेशन, उच्च घनत्व बागवानी (हाई डेंसिटी प्लांटेशन) और पौधों के संरक्षण की दवाइयां भी विभाग के माध्यम से मिलती हैं, लेकिन फील्ड स्तर पर अधिकारी न होने से ये योजनाएं कागजों तक सीमित होती जा रही हैं। एचईओ और एचडीओ की अनुपस्थिति का सीधा असर बागवानी पर पड़ रहा है।
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स्टाफ कमी की जानकारी विभाग के उच्च अधिकारियों को पहले दी गई है। जहां पर पौधों के संरक्षण केंद्र में एचईओ नहीं है, वहां कुछ दिनों के लिए दूसरे सेंटर से प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाते हैं।