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Rampur Bushahar News: कोटखाई में बगीचों के अवशेष जलाने पर सख्त प्रतिबंध
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पंचायत स्तर पर बनेगी निगरानी समिति
नियमाें की अवहेलना पर होगी कड़ी कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई (रोहड़ू)। उपमंडल कोटखाई में वनों की रोकथाम और पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। कोटखाई में एसडीएम ने आदेश जारी कर बगीचों और खेतों में अपशिष्ट जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। आदेश में कहा गया है कि क्षेत्र में बागवान सेब और नाशपाती के बगीचों से निकले सूखे पत्ते, टहनियां और अन्य अपशिष्ट खुले में जला रहे हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ रहा है और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। कई बार यह आग समीपवर्ती वन क्षेत्रों तक फैल जाती है, जिससे वन संपदा और वन्य जीवों के नष्ट होने का खतरा पैदा हो जाता है। ऐसी घटनाएं जनजीवन, संपत्ति और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा हैं। आदेश के अनुसार उपमंडल क्षेत्र के अंतर्गत किसी भी बगीचे, खेत और वन क्षेत्र में अपशिष्ट को खुले में जलाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। बागवानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बगीचों के अपशिष्ट का निस्तारण कंपोस्ट/खाद निर्माण, गड्ढों में सुरक्षित दबान अथवा अन्य पर्यावरण-अनुकूल और सुरक्षित तरीकों से करें। आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन और वनों की रोकथाम के लिए प्रत्येक पंचायत में पंचायत स्तरीय निगरानी समिति का गठन किया जाएगा। समिति में ग्राम पंचायत प्रधान (अध्यक्ष), संबंधित वार्ड सदस्य, पंचायत सचिव (सदस्य) और वन रक्षक (सदस्य सचिव) शामिल होंगे। प्रशासन ने जनता से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पर्यावरण संरक्षण और वनों की सुरक्षा के लिए सभी नागरिकों की जिम्मेदारी तय की गई है।
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नियमाें की अवहेलना पर होगी कड़ी कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई (रोहड़ू)। उपमंडल कोटखाई में वनों की रोकथाम और पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। कोटखाई में एसडीएम ने आदेश जारी कर बगीचों और खेतों में अपशिष्ट जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। आदेश में कहा गया है कि क्षेत्र में बागवान सेब और नाशपाती के बगीचों से निकले सूखे पत्ते, टहनियां और अन्य अपशिष्ट खुले में जला रहे हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ रहा है और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। कई बार यह आग समीपवर्ती वन क्षेत्रों तक फैल जाती है, जिससे वन संपदा और वन्य जीवों के नष्ट होने का खतरा पैदा हो जाता है। ऐसी घटनाएं जनजीवन, संपत्ति और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा हैं। आदेश के अनुसार उपमंडल क्षेत्र के अंतर्गत किसी भी बगीचे, खेत और वन क्षेत्र में अपशिष्ट को खुले में जलाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। बागवानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बगीचों के अपशिष्ट का निस्तारण कंपोस्ट/खाद निर्माण, गड्ढों में सुरक्षित दबान अथवा अन्य पर्यावरण-अनुकूल और सुरक्षित तरीकों से करें। आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन और वनों की रोकथाम के लिए प्रत्येक पंचायत में पंचायत स्तरीय निगरानी समिति का गठन किया जाएगा। समिति में ग्राम पंचायत प्रधान (अध्यक्ष), संबंधित वार्ड सदस्य, पंचायत सचिव (सदस्य) और वन रक्षक (सदस्य सचिव) शामिल होंगे। प्रशासन ने जनता से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पर्यावरण संरक्षण और वनों की सुरक्षा के लिए सभी नागरिकों की जिम्मेदारी तय की गई है।