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Rampur Bushahar News: सेब के फूल जलने की समस्या बढ़ी, उद्यान विभाग ने जारी की एडवाइजरी
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एनपीके 12:61:00 जैसे उच्च फास्फोरस वाले फर्टिलाइजर का उपयोग फूल अवस्था में नुकसानदेह : विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई (रोहड़ू)। सेब के बगीचों में इन दिनों पिंकबड और फ्लॉवरिंग का समय चल रहा है। वहीं, फूल जलने (फ्लावर बर्न) की समस्या सामने आ रही है। इससे बागवानों की चिंता बढ़ गई है। उद्यान विभाग ने इसे गंभीर स्थिति मानते हुए बागवानों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। उद्यान विभाग के अनुसार इस समय सेब के पौधे अत्यंत संवेदनशील अवस्था में होते हैं और गलत स्प्रे या अधिक रसायनों के उपयोग से फूलों को सीधा नुकसान पहुंच रहा है। ज्यादा उर्वरक (फर्टिलाइजर) भी मुख्य कारण बनता है। उद्यान विभाग ने बताया कि एनपीके 12:61:00 जैसे उच्च फास्फोरस वाले फर्टिलाइजर का उपयोग फूल अवस्था में नुकसानदेह साबित हो रहा है। इसमें मौजूद अधिक फास्फोरस कोमल कलियों से नमी खींच लेता है, जिससे फूल जलने लगते हैं। दवाइयों के गलत मिश्रण से भी खतरा बढ़ रहा है। कई बागवान, एमएपी बोरॉन, कैल्शियम और बविस्टिन को एक साथ मिलाकर छिड़काव कर रहे हैं, जो फूल अवस्था में सुरक्षित नहीं है। उद्यान विकास अधिकारी सोनाली चौहान के अनुसार कैल्शियम और फॉस्फेट मिलकर जमाव बना देते हैं, वहीं बोरॉन और कैल्शियम के साथ अधिक नमक का मिश्रण पौधों में विषाक्त प्रभाव पैदा करता है। इससे फूल सूखने लगते हैं और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। वहीं, आजकल कुछ बागवान सोशल मीडिया पर सलाह दे रहे हैं। उनके द्वारा कई ऐसी दवाइयां का मिश्रण बताया जा रहा है, जो बागवानी के लिए खतरा है। इस समस्या के चलते बगीचों में फूलों के किनारे भूरे या जले हुए दिखाई दे रहे हैं। कई जगह फूल सूखकर गिर रहे हैं, जिससे फल सेटिंग में कमी आने की आशंका बढ़ गई है। विभाग ने बागवानों को सलाह दी है कि फूल अवस्था में हाई सॉल्ट फर्टिलाइजर का प्रयोग न करें। बिना विशेषज्ञ की सलाह के किसी भी प्रकार का मिश्रित स्प्रे न करें। आवश्यकता होने पर हल्का बोरॉन (0.1 प्रतिशत) ही उपयोग करें और स्प्रे सुबह या शाम के समय ही करें। साथ ही निर्धारित मात्रा का विशेष ध्यान रखें। उद्यान विभाग ने स्पष्ट किया कि फूल ही भविष्य की फसल का आधार होते हैं। इस समय की गई छोटी सी लापरवाही सीधे उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। विभाग ने बागवानों से आग्रह किया है कि बिना वैज्ञानिक सलाह के किसी भी प्रकार के कॉकटेल स्प्रे से बचें और नजदीकी उद्यान विशेषज्ञ से परामर्श लेकर ही दवाइयों का उपयोग करें, ताकि सेब की फसल को नुकसान से बचाया जा सके।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई (रोहड़ू)। सेब के बगीचों में इन दिनों पिंकबड और फ्लॉवरिंग का समय चल रहा है। वहीं, फूल जलने (फ्लावर बर्न) की समस्या सामने आ रही है। इससे बागवानों की चिंता बढ़ गई है। उद्यान विभाग ने इसे गंभीर स्थिति मानते हुए बागवानों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। उद्यान विभाग के अनुसार इस समय सेब के पौधे अत्यंत संवेदनशील अवस्था में होते हैं और गलत स्प्रे या अधिक रसायनों के उपयोग से फूलों को सीधा नुकसान पहुंच रहा है। ज्यादा उर्वरक (फर्टिलाइजर) भी मुख्य कारण बनता है। उद्यान विभाग ने बताया कि एनपीके 12:61:00 जैसे उच्च फास्फोरस वाले फर्टिलाइजर का उपयोग फूल अवस्था में नुकसानदेह साबित हो रहा है। इसमें मौजूद अधिक फास्फोरस कोमल कलियों से नमी खींच लेता है, जिससे फूल जलने लगते हैं। दवाइयों के गलत मिश्रण से भी खतरा बढ़ रहा है। कई बागवान, एमएपी बोरॉन, कैल्शियम और बविस्टिन को एक साथ मिलाकर छिड़काव कर रहे हैं, जो फूल अवस्था में सुरक्षित नहीं है। उद्यान विकास अधिकारी सोनाली चौहान के अनुसार कैल्शियम और फॉस्फेट मिलकर जमाव बना देते हैं, वहीं बोरॉन और कैल्शियम के साथ अधिक नमक का मिश्रण पौधों में विषाक्त प्रभाव पैदा करता है। इससे फूल सूखने लगते हैं और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। वहीं, आजकल कुछ बागवान सोशल मीडिया पर सलाह दे रहे हैं। उनके द्वारा कई ऐसी दवाइयां का मिश्रण बताया जा रहा है, जो बागवानी के लिए खतरा है। इस समस्या के चलते बगीचों में फूलों के किनारे भूरे या जले हुए दिखाई दे रहे हैं। कई जगह फूल सूखकर गिर रहे हैं, जिससे फल सेटिंग में कमी आने की आशंका बढ़ गई है। विभाग ने बागवानों को सलाह दी है कि फूल अवस्था में हाई सॉल्ट फर्टिलाइजर का प्रयोग न करें। बिना विशेषज्ञ की सलाह के किसी भी प्रकार का मिश्रित स्प्रे न करें। आवश्यकता होने पर हल्का बोरॉन (0.1 प्रतिशत) ही उपयोग करें और स्प्रे सुबह या शाम के समय ही करें। साथ ही निर्धारित मात्रा का विशेष ध्यान रखें। उद्यान विभाग ने स्पष्ट किया कि फूल ही भविष्य की फसल का आधार होते हैं। इस समय की गई छोटी सी लापरवाही सीधे उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। विभाग ने बागवानों से आग्रह किया है कि बिना वैज्ञानिक सलाह के किसी भी प्रकार के कॉकटेल स्प्रे से बचें और नजदीकी उद्यान विशेषज्ञ से परामर्श लेकर ही दवाइयों का उपयोग करें, ताकि सेब की फसल को नुकसान से बचाया जा सके।