{"_id":"69f72b6f196084c74a0dbddb","slug":"there-has-been-a-sharp-decline-in-the-mango-crop-in-moin-village-rampur-hp-news-c-178-1-ssml1003-159400-2026-05-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rampur Bushahar News: मोईन गांव में आम की फसल में भारी गिरावट, गुठलीदार फल भी बर्बाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rampur Bushahar News: मोईन गांव में आम की फसल में भारी गिरावट, गुठलीदार फल भी बर्बाद
विज्ञापन
विज्ञापन
स्टोन क्रशर के कारण बढ़ी समस्या, गांव के चारों ओर धूल ही धूल
हितेश भारती
नित्थर (कुल्लू)।
नित्थर उप तहसील की देहरा पंचायत का मोईन गांव सतलुज नदी के किनारे बसा हुआ है। यह गांव कभी मूंगफली और काले चने के उत्पादन के लिए जाना जाता था। वर्तमान में आम, प्लम और खुमानी जैसे गुठलीदार फलों का उत्पादन किया जा रहा है। इस साल फलों के उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है की आम की फसल में भारी कमी है। हर साल मोईन गांव में दो से तीन हजार आम की क्रेटों का उत्पादन होता था। इस बार आम की फसल बेहतर नहीं है। इसके अलावा प्लम और खुमानी की फसल भी काफी कम है। स्थानीय लोगों का कहना है की हर साल फल के उत्पादन में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। इसकी मुख्य वजह मोईन गांव में आधा दर्जन से अधिक स्टोन क्रशर और खनन है। इसकी धूल से न सिर्फ गांव की फसलें खराब हो रही हैं, बल्कि उसके आसपास के इलाके भी चपेट में आ रहे हैं। पूर्व शिक्षक शिक्षाविद् जोगिंद्र चौहान का कहना है कि जो भी क्रशर चला रहे हैं, वो मोईन गांव की बेहतरी के लिए भी कुछ योगदान दें। अभी तक मोईन गांव के संसाधनों का दोहन ही हो रहा है, उसकी पूर्ति के लिए कुछ भी नहीं हो रहा है। ग्रामीण संजीव कौशल का कहना है कि खनन से मोइन गांव में प्रदूषण बढ़ रहा है और साथ लगते गांव गोथना में लोगों का धूल मिट्टी से बुरा हाल है। एक वक्त हुआ करता था, जब इस गांव में प्लम और बादाम की फसलें हुआ करती थीं।
Trending Videos
हितेश भारती
नित्थर (कुल्लू)।
नित्थर उप तहसील की देहरा पंचायत का मोईन गांव सतलुज नदी के किनारे बसा हुआ है। यह गांव कभी मूंगफली और काले चने के उत्पादन के लिए जाना जाता था। वर्तमान में आम, प्लम और खुमानी जैसे गुठलीदार फलों का उत्पादन किया जा रहा है। इस साल फलों के उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है की आम की फसल में भारी कमी है। हर साल मोईन गांव में दो से तीन हजार आम की क्रेटों का उत्पादन होता था। इस बार आम की फसल बेहतर नहीं है। इसके अलावा प्लम और खुमानी की फसल भी काफी कम है। स्थानीय लोगों का कहना है की हर साल फल के उत्पादन में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। इसकी मुख्य वजह मोईन गांव में आधा दर्जन से अधिक स्टोन क्रशर और खनन है। इसकी धूल से न सिर्फ गांव की फसलें खराब हो रही हैं, बल्कि उसके आसपास के इलाके भी चपेट में आ रहे हैं। पूर्व शिक्षक शिक्षाविद् जोगिंद्र चौहान का कहना है कि जो भी क्रशर चला रहे हैं, वो मोईन गांव की बेहतरी के लिए भी कुछ योगदान दें। अभी तक मोईन गांव के संसाधनों का दोहन ही हो रहा है, उसकी पूर्ति के लिए कुछ भी नहीं हो रहा है। ग्रामीण संजीव कौशल का कहना है कि खनन से मोइन गांव में प्रदूषण बढ़ रहा है और साथ लगते गांव गोथना में लोगों का धूल मिट्टी से बुरा हाल है। एक वक्त हुआ करता था, जब इस गांव में प्लम और बादाम की फसलें हुआ करती थीं।
