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Rampur Bushahar News: चेक बाउंस के दोषी को तीन माह का कारावास
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अदालत ले 3.37 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में दोषी को तीन माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। दोषी को 3,37,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मामले का शिकायतकर्ता हार्डवेयर की दुकान चलाता है। मामले में दोषी साबित राजीव भी रामपुर में एक दुकान चलाता है। दोषी ने मार्च 2019 में शिकायकर्ता से 2,25,192 रुपये की कीमत का हार्डवेयर का सामान खरीदा और वादा किया कि वह राशि का भुगतान थोड़े ही समय में कर देगा। वह अपना वादा पूरा करने में विफल रहा। उसने मई 2019 को 2,25,192 रुपये की राशि का चेक शिकायतकर्ता को दिया, जो बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता ने उससे राशि की मांग की। बार-बार अनुरोध करने के बावजूद उसने शिकायतकर्ता को टाल दिया। शिकायतकर्ता ने जुलाई 2019 को कानूनी मांग नोटिस भेजा। आरोपी को नोटिस प्राप्त हो गया था, लेकिन उसने कोई भुगतान नहीं किया। परिणामस्वरूप, यह शिकायत दाखिल की गई। अदालत ने मामले में निर्णय दिया है कि उपलब्ध रिकॉर्ड में ऐसा कोई भी तत्व नहीं मिला, जो आरोपी के संभावित बचाव का समर्थन करता हो। इसलिए, यह अदालत इस नतीजे पर पहुंचती है कि शिकायतकर्ता ने रिकॉर्ड पर मौजूद ठोस, भरोसेमंद और विश्वसनीय सबूतों के आधार पर, अपने मामले को साबित कर दिया है। दोषी को एनआई अधिनियम की धारा-138 के तहत किए गए अपराध के लिए तीन महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई। इसके अतिरिक्त, दोषी को 3,37,500 रुपये की राशि का मुआवजा देने का आदेश दिया।
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रामपुर बुशहर। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में दोषी को तीन माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। दोषी को 3,37,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मामले का शिकायतकर्ता हार्डवेयर की दुकान चलाता है। मामले में दोषी साबित राजीव भी रामपुर में एक दुकान चलाता है। दोषी ने मार्च 2019 में शिकायकर्ता से 2,25,192 रुपये की कीमत का हार्डवेयर का सामान खरीदा और वादा किया कि वह राशि का भुगतान थोड़े ही समय में कर देगा। वह अपना वादा पूरा करने में विफल रहा। उसने मई 2019 को 2,25,192 रुपये की राशि का चेक शिकायतकर्ता को दिया, जो बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता ने उससे राशि की मांग की। बार-बार अनुरोध करने के बावजूद उसने शिकायतकर्ता को टाल दिया। शिकायतकर्ता ने जुलाई 2019 को कानूनी मांग नोटिस भेजा। आरोपी को नोटिस प्राप्त हो गया था, लेकिन उसने कोई भुगतान नहीं किया। परिणामस्वरूप, यह शिकायत दाखिल की गई। अदालत ने मामले में निर्णय दिया है कि उपलब्ध रिकॉर्ड में ऐसा कोई भी तत्व नहीं मिला, जो आरोपी के संभावित बचाव का समर्थन करता हो। इसलिए, यह अदालत इस नतीजे पर पहुंचती है कि शिकायतकर्ता ने रिकॉर्ड पर मौजूद ठोस, भरोसेमंद और विश्वसनीय सबूतों के आधार पर, अपने मामले को साबित कर दिया है। दोषी को एनआई अधिनियम की धारा-138 के तहत किए गए अपराध के लिए तीन महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई। इसके अतिरिक्त, दोषी को 3,37,500 रुपये की राशि का मुआवजा देने का आदेश दिया।
