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Rampur Bushahar News: चार लेबर कोड के खिलाफ निरथ, बिथल, बायल, झाकड़ी, रामपुर में फूटा मजदूरों का गुस्सा
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चार लेबर कोड के विरोध सीटू के बैनर तले मजदूरों ने किया प्रदर्शन। स्रोत : सीटू
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. केंद्रीय ट्रेड यूनियन के आह्वान पर जगह जगह हुए प्रदर्शन
. मजदूरों ने काली पट्टियांं लगाकर जताया विरोध
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। केंद्र सरकार के चार नए लेबर कोड के खिलाफ बुधवार को नित्थर, बिथल, बायल, झाकड़ी और रामपुर में मजदूरों का गुस्सा केंद्र सरकार पर फूटा। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों संयुक्त किसान मोर्चे के आह्वान पर चार श्रम संहिताओं के विरोध में काला दिवस मनाया गया। प्रदर्शन के दौरान मजदूरों ने काली पट्टियां लगाकर विरोध प्रदर्शन किया और मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। सीटू जिला महासचिव अमित, किसान नेता देवकी नंद, रंजीत ठाकुर, छात्र नेता राहुल विद्यार्थी, मिलाप, लूहरी हाइड्रो से राजपाल, अजय शर्मा, मंजीत, 412 मेगावाट से संजीव, प्रमोद, तिलक, 1500 मेगावाट से काम राज, राजकुमार, तिलक, रामपुर नगर परिषद से देवेंद्र, खनेरी अस्पताल से आशा, सुनमणि ने संबोधित किया। मजदूर किसान नेताओं ने चारों श्रम संहिताओं पर बात रखते हुए बताया कि सरकार इन नई श्रम संहिताओं को मजदूर हितैषी बता रही है, जबकि ये संहिताएं मजदूरों का शोषण करती हैं। वेतन संहिता 2019 के तहत धारा 2(वाय) और 2(एन) की परिभाषाओं और छोटे प्रतिष्ठानों को बाहर रखने के कारण बड़ी संख्या में मजदूर न्यूनतम वेतन के दायरे से बाहर रह जाते हैं। साथ ही धारा 6 में न्यूनतम वेतन तय करने के लिए कोई वैज्ञानिक मानक निर्धारित नहीं किया गया है, जिससे सरकार को मनमाने ढंग से वेतन तय करने की छूट मिलती है। धारा 9 (फ्लोर वेज) के अंतर्गत राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन तय करने का अधिकार तो दिया गया है, लेकिन इसके लिए कोई स्पष्ट और बाध्यकारी फार्मूला नहीं है, जिससे मजदूरों के जीवन स्तर में सुधार का दावा खोखला साबित होता है। मजदूर नेताओं ने स्पष्ट कहा कि नई श्रम संहिताएं न्यूनतम वेतन की गारंटी कमजोर करने वाली, सामाजिक सुरक्षा सीमित करने, स्थायी रोजगार समाप्त करने और ट्रेड यूनियन अधिकारों को बाधित करने वाली हैं। अंत में यूनियन नेतृत्व ने सभी मजदूरों से एकजुट होकर संघर्ष को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। केंद्र सरकार के चार नए लेबर कोड के खिलाफ बुधवार को नित्थर, बिथल, बायल, झाकड़ी और रामपुर में मजदूरों का गुस्सा केंद्र सरकार पर फूटा। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों संयुक्त किसान मोर्चे के आह्वान पर चार श्रम संहिताओं के विरोध में काला दिवस मनाया गया। प्रदर्शन के दौरान मजदूरों ने काली पट्टियां लगाकर विरोध प्रदर्शन किया और मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। सीटू जिला महासचिव अमित, किसान नेता देवकी नंद, रंजीत ठाकुर, छात्र नेता राहुल विद्यार्थी, मिलाप, लूहरी हाइड्रो से राजपाल, अजय शर्मा, मंजीत, 412 मेगावाट से संजीव, प्रमोद, तिलक, 1500 मेगावाट से काम राज, राजकुमार, तिलक, रामपुर नगर परिषद से देवेंद्र, खनेरी अस्पताल से आशा, सुनमणि ने संबोधित किया। मजदूर किसान नेताओं ने चारों श्रम संहिताओं पर बात रखते हुए बताया कि सरकार इन नई श्रम संहिताओं को मजदूर हितैषी बता रही है, जबकि ये संहिताएं मजदूरों का शोषण करती हैं। वेतन संहिता 2019 के तहत धारा 2(वाय) और 2(एन) की परिभाषाओं और छोटे प्रतिष्ठानों को बाहर रखने के कारण बड़ी संख्या में मजदूर न्यूनतम वेतन के दायरे से बाहर रह जाते हैं। साथ ही धारा 6 में न्यूनतम वेतन तय करने के लिए कोई वैज्ञानिक मानक निर्धारित नहीं किया गया है, जिससे सरकार को मनमाने ढंग से वेतन तय करने की छूट मिलती है। धारा 9 (फ्लोर वेज) के अंतर्गत राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन तय करने का अधिकार तो दिया गया है, लेकिन इसके लिए कोई स्पष्ट और बाध्यकारी फार्मूला नहीं है, जिससे मजदूरों के जीवन स्तर में सुधार का दावा खोखला साबित होता है। मजदूर नेताओं ने स्पष्ट कहा कि नई श्रम संहिताएं न्यूनतम वेतन की गारंटी कमजोर करने वाली, सामाजिक सुरक्षा सीमित करने, स्थायी रोजगार समाप्त करने और ट्रेड यूनियन अधिकारों को बाधित करने वाली हैं। अंत में यूनियन नेतृत्व ने सभी मजदूरों से एकजुट होकर संघर्ष को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

चार लेबर कोड के विरोध सीटू के बैनर तले मजदूरों ने किया प्रदर्शन। स्रोत : सीटू