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Sirmour News: सब डिपो बना, फिर भी गांव बसों को तरसे, खटारा बसों से चल रहा काम
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हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम के सब डिपो पांवटा साहिब का बस स्टैंड में दिन के समय बसों के लिए कम
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पांवटा साहिब के दर्जन गांवों में नहीं पहुंचतीं निगम की बसें, विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों को परेशानी
दो दर्जन रूटों पर चल रही अधिकतर बसें एक दशक से ज्यादा पुरानी, आधा दर्जन नई बसों की जरूरत
मिस्त्री और वाशिंग बॉय के पद रिक्त, मेजर फॉल्ट पर बसें नाहन वर्कशॉप भेजने की मजबूरी
कोटगा, पौका, किल्लोड़, शिवा व बनौर रूट पर निगम की बस चलाने की मांग
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। हिमाचल पथ परिवहन निगम ने अप्रैल 2018 में करोड़ों रुपये से अंतरराज्यीय बस अड्डा भवन तैयार किया था। इसके बाद सितंबर 2021 में पांवटा साहिब सब डिपो का फट्टा भी टांग दिया गया, लेकिन सुविधाओं में अपेक्षित इजाफा नहीं हो सका। करीब आधा दर्जन गांव आज भी निगम की बसों के पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। इन गांवों से पांवटा साहिब पहुंचने वाले विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
करीब दो दर्जन रूटों पर दौड़ने वाली बसों की हालत भी खास अच्छी नहीं है। इनमें अधिकतर एक दशक से ज्यादा पुरानी और खटारा हो चुकी बसें शामिल हैं। सब डिपो में कम से कम आधा दर्जन और बसों की जरूरत है। गिरिपार के समाजसेवी कुंदन सिंह शास्त्री, सुरेश ठाकुर, दिनेश पुंडीर, भरत ठाकुर और यशपाल राणा का कहना है कि पांच वर्ष पहले पांवटा साहिब को सब डिपो का दर्जा दिया गया था। तय मापदंड के अनुसार कैशियर, डीटी सेल, अड्डा प्रभारी, इंक्वायरी ड्यूटी कर्मी के साथ वर्कशॉप, पांच मिस्त्री और दो वाशिंग बॉय होने चाहिए। कई वर्षों तक स्थायी बस अड्डा प्रभारी और कैशियर के पद रिक्त रहे। अभी भी बेहतर वर्कशॉप की सुविधा उपलब्ध नहीं है। खासकर इंजन-गियर समेत मेजर फॉल्ट आने पर बसों को नाहन डिपो की वर्कशॉप-गैराज में भेजना पड़ता है। मिस्त्री के दो, बस वाशिंग बॉय के दो और सफाई कर्मी का एक पद रिक्त है।
सिर्फ फट्टा टांगने से नहीं बदली व्यवस्था
हिमाचल पथ परिवहन निगम और तत्कालीन सरकार ने पांच वर्ष पहले पांवटा साहिब को सब डिपो का दर्जा तो दे दिया, लेकिन बस स्टैंड परिसर में सब डिपो पांवटा का फट्टा टांगने तक ही व्यवस्था सीमित रह गई। बसों के रूट अभी भी करीब दो दर्जन ही संचालित हो रहे हैं।
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मनोज चौहान, सुरेंद्र चौहान, अखिल और रमेश कुमार ने बताया कि चौकी मृगवाल तथा कोड़गा सखोली में एकमात्र सरकारी बस चलती है। सुबह साढ़े छह से साढ़े सात बजे के बीच बस पहुंच जाती है। इसके बाद कोई बस नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों को दिन के समय काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उन्हें निजी वाहनों से मुख्य मार्ग तक पहुंचना पड़ता है।
पांवटा सब डिपो से आंजभोज और शिलाई में करीब आधा दर्जन नए रूटों पर बसें चलाना जरूरी है। कोटगा, पौका, बनौर, शिवा रुदाना और किल्लोड़ आदि गांवों के लिए निगम की बस सेवा उपलब्ध नहीं है। लोगों का कहना है कि नई चार्जिंग वाली बसें मिलने पर पुरानी बसों को कम से कम इन रूटों पर चलाया जाए, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।
नाहन डिपो को 15 चार्जिंग वाली इलेक्ट्रिक बसें मिल रही हैं। ये बसें नाहन, पांवटा साहिब, सराहां समेत जिला भर के विभिन्न रूटों पर चलाई जाएंगी।
-रामदयाल, क्षेत्रीय प्रबंधक, एचआरटीसी, नाहन
पार्किंग की भी दिक्कत
सिरमौर निजी बस ऑपरेटर यूनियन के प्रधान बलविंदर सिंह और महासचिव अखिल शर्मा ने बताया कि एचआरटीसी, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और उत्तराखंड समेत विभिन्न राज्यों की डेढ़ सौ से अधिक बसें पांवटा पहुंचती हैं। दिन के समय इन बसों को उचित पार्किंग नहीं मिल पाती है। आने वाले समय में अड्डा परिसर में पार्किंग की समस्या और भी विकराल हो सकती है।
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पांवटा साहिब के दर्जन गांवों में नहीं पहुंचतीं निगम की बसें, विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों को परेशानी
दो दर्जन रूटों पर चल रही अधिकतर बसें एक दशक से ज्यादा पुरानी, आधा दर्जन नई बसों की जरूरत
मिस्त्री और वाशिंग बॉय के पद रिक्त, मेजर फॉल्ट पर बसें नाहन वर्कशॉप भेजने की मजबूरी
कोटगा, पौका, किल्लोड़, शिवा व बनौर रूट पर निगम की बस चलाने की मांग
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। हिमाचल पथ परिवहन निगम ने अप्रैल 2018 में करोड़ों रुपये से अंतरराज्यीय बस अड्डा भवन तैयार किया था। इसके बाद सितंबर 2021 में पांवटा साहिब सब डिपो का फट्टा भी टांग दिया गया, लेकिन सुविधाओं में अपेक्षित इजाफा नहीं हो सका। करीब आधा दर्जन गांव आज भी निगम की बसों के पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। इन गांवों से पांवटा साहिब पहुंचने वाले विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
करीब दो दर्जन रूटों पर दौड़ने वाली बसों की हालत भी खास अच्छी नहीं है। इनमें अधिकतर एक दशक से ज्यादा पुरानी और खटारा हो चुकी बसें शामिल हैं। सब डिपो में कम से कम आधा दर्जन और बसों की जरूरत है। गिरिपार के समाजसेवी कुंदन सिंह शास्त्री, सुरेश ठाकुर, दिनेश पुंडीर, भरत ठाकुर और यशपाल राणा का कहना है कि पांच वर्ष पहले पांवटा साहिब को सब डिपो का दर्जा दिया गया था। तय मापदंड के अनुसार कैशियर, डीटी सेल, अड्डा प्रभारी, इंक्वायरी ड्यूटी कर्मी के साथ वर्कशॉप, पांच मिस्त्री और दो वाशिंग बॉय होने चाहिए। कई वर्षों तक स्थायी बस अड्डा प्रभारी और कैशियर के पद रिक्त रहे। अभी भी बेहतर वर्कशॉप की सुविधा उपलब्ध नहीं है। खासकर इंजन-गियर समेत मेजर फॉल्ट आने पर बसों को नाहन डिपो की वर्कशॉप-गैराज में भेजना पड़ता है। मिस्त्री के दो, बस वाशिंग बॉय के दो और सफाई कर्मी का एक पद रिक्त है।
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सिर्फ फट्टा टांगने से नहीं बदली व्यवस्था
हिमाचल पथ परिवहन निगम और तत्कालीन सरकार ने पांच वर्ष पहले पांवटा साहिब को सब डिपो का दर्जा तो दे दिया, लेकिन बस स्टैंड परिसर में सब डिपो पांवटा का फट्टा टांगने तक ही व्यवस्था सीमित रह गई। बसों के रूट अभी भी करीब दो दर्जन ही संचालित हो रहे हैं।
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मनोज चौहान, सुरेंद्र चौहान, अखिल और रमेश कुमार ने बताया कि चौकी मृगवाल तथा कोड़गा सखोली में एकमात्र सरकारी बस चलती है। सुबह साढ़े छह से साढ़े सात बजे के बीच बस पहुंच जाती है। इसके बाद कोई बस नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों को दिन के समय काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उन्हें निजी वाहनों से मुख्य मार्ग तक पहुंचना पड़ता है।
पांवटा सब डिपो से आंजभोज और शिलाई में करीब आधा दर्जन नए रूटों पर बसें चलाना जरूरी है। कोटगा, पौका, बनौर, शिवा रुदाना और किल्लोड़ आदि गांवों के लिए निगम की बस सेवा उपलब्ध नहीं है। लोगों का कहना है कि नई चार्जिंग वाली बसें मिलने पर पुरानी बसों को कम से कम इन रूटों पर चलाया जाए, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।
नाहन डिपो को 15 चार्जिंग वाली इलेक्ट्रिक बसें मिल रही हैं। ये बसें नाहन, पांवटा साहिब, सराहां समेत जिला भर के विभिन्न रूटों पर चलाई जाएंगी।
-रामदयाल, क्षेत्रीय प्रबंधक, एचआरटीसी, नाहन
पार्किंग की भी दिक्कत
सिरमौर निजी बस ऑपरेटर यूनियन के प्रधान बलविंदर सिंह और महासचिव अखिल शर्मा ने बताया कि एचआरटीसी, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और उत्तराखंड समेत विभिन्न राज्यों की डेढ़ सौ से अधिक बसें पांवटा पहुंचती हैं। दिन के समय इन बसों को उचित पार्किंग नहीं मिल पाती है। आने वाले समय में अड्डा परिसर में पार्किंग की समस्या और भी विकराल हो सकती है।