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Sirmour News: 12 साल बाद इंसाफ, खाई में गिरे युवक की मौत पर मां-पिता को 8.92 लाख मुआवजा
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साल 2014 में संगड़ाह उपमंडल का मामला, कैंटर की टक्कर से खाई में पिकअप के गिरने से विपिन को गया था लापता
कानूनी प्रक्रिया के तहत 7 साल बाद माना गया मृत, फिर दाखिल हुआ केस
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। उपमंडल संगड़ाह के धनोई खड्ड में 2014 में हुए दर्दनाक सड़क हादसे में बेटे को खो चुके माता-पिता को 12 साल बाद न्याय मिला है। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) योगेश जसवाल ने मृतक विपिन के परिजनों को 8,92,120 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह राशि चंडीगढ़ स्थित नेशनल इंश्योरेंस कंपनी (बीमा कंपनी) को 6 फीसदी ब्याज सहित अदा करनी होगी।
यह मामला रेणुका जी थाना क्षेत्र का है। 5 सितंबर 2014 को विपिन करनाल से हरिपुरधार जा रहा था। धनोई के पास पिकअप चालक ने बस को रास्ता देने के लिए वाहन रोका ही था कि पीछे से तेज रफ्तार कैंटर ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि वाहन अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरा। हादसे में चालक और विपिन की मौत हो गई। भारी बारिश के चलते विपिन का शव खड्ड में बह गया और बरामद नहीं हो सका।
शव न मिलने के कारण पहले मुआवजा दावा खारिज हो गया था। इससे परिवार को लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया में इंतजार करना पड़ा। लेकिन 7 साल तक कोई जानकारी न मिलने पर कानून के तहत मृत मानते हुए परिजनों ने दोबारा कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस बार अदालत ने मामले को स्वीकार किया। अदालत ने गवाहों और रिकॉर्ड के आधार पर माना कि हादसा कैंटर चालक की लापरवाही और तेज रफ्तार के कारण हुआ। ऐसे में कोर्ट ने चालक, वाहन मालिक और बीमा कंपनी को संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए मुआवजा देने के आदेश दिए, जबकि भुगतान की जिम्मेदारी बीमा कंपनी को सौंपी गई है। लंबे इंतजार के बाद आए इस फैसले से विपिन के पिता हुकमी राम और मां नकती देवी को बड़ी राहत मिली है। संवाद
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कानूनी प्रक्रिया के तहत 7 साल बाद माना गया मृत, फिर दाखिल हुआ केस
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। उपमंडल संगड़ाह के धनोई खड्ड में 2014 में हुए दर्दनाक सड़क हादसे में बेटे को खो चुके माता-पिता को 12 साल बाद न्याय मिला है। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) योगेश जसवाल ने मृतक विपिन के परिजनों को 8,92,120 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह राशि चंडीगढ़ स्थित नेशनल इंश्योरेंस कंपनी (बीमा कंपनी) को 6 फीसदी ब्याज सहित अदा करनी होगी।
यह मामला रेणुका जी थाना क्षेत्र का है। 5 सितंबर 2014 को विपिन करनाल से हरिपुरधार जा रहा था। धनोई के पास पिकअप चालक ने बस को रास्ता देने के लिए वाहन रोका ही था कि पीछे से तेज रफ्तार कैंटर ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि वाहन अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरा। हादसे में चालक और विपिन की मौत हो गई। भारी बारिश के चलते विपिन का शव खड्ड में बह गया और बरामद नहीं हो सका।
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शव न मिलने के कारण पहले मुआवजा दावा खारिज हो गया था। इससे परिवार को लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया में इंतजार करना पड़ा। लेकिन 7 साल तक कोई जानकारी न मिलने पर कानून के तहत मृत मानते हुए परिजनों ने दोबारा कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस बार अदालत ने मामले को स्वीकार किया। अदालत ने गवाहों और रिकॉर्ड के आधार पर माना कि हादसा कैंटर चालक की लापरवाही और तेज रफ्तार के कारण हुआ। ऐसे में कोर्ट ने चालक, वाहन मालिक और बीमा कंपनी को संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए मुआवजा देने के आदेश दिए, जबकि भुगतान की जिम्मेदारी बीमा कंपनी को सौंपी गई है। लंबे इंतजार के बाद आए इस फैसले से विपिन के पिता हुकमी राम और मां नकती देवी को बड़ी राहत मिली है। संवाद