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Sirmour News: अदालत ने चेक बाउंस मामले में आरोपी को बरी करने के दिए आदेश
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अदालत
अदालत ने चेक बाउंस मामले में आरोपी को बरी करने के दिए आदेश
-एक लाख रुपये के ऋण से जुड़े मामले में हुआ था चेक जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अदालत ने चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में आरोपी को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कोर्ट नंबर 1 के न्यायाधीश विकास गुप्ता की अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यदि कोई कर्ज समय सीमा से बाहर हो चुका है, तो उसे चुकाने के लिए जारी किया गया चेक कानूनी रूप से प्रवर्तनीय देनदारी के दायरे में नहीं आता।
शिकायतकर्ता ‘द ज्योति को-ऑपरेटिव नॉन एग्रीकल्चर थ्रिफ्ट एंड क्रेडिट सोसायटी लिमिटेड’ के अनुसार, आरोपी परवीन कुमार ने 31 दिसंबर 2014 को सोसायटी से 1,00,000 रुपये का ऋण लिया था। ब्याज सहित यह राशि बढ़कर 1,53,005 रुपये हो गई थी। इस कर्ज को चुकाने के लिए आरोपी ने 30 जुलाई 2018 को एक चेक जारी किया। जब सोसायटी ने चेक को एचडीएफसी बैंक में लगाया, तो वह खाता बंद होने की वजह से बाउंस हो गया।
कानूनी नोटिस भेजने के बाद भी भुगतान न होने पर सोसायटी ने 2018 में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने दलील दी कि यह पूरा लेनदेन समय सीमा से बाहर हो चुका था। अदालत ने आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए पाया कि आरोपी ने ऋण 31 दिसंबर 2014 को लिया था, जिसकी वसूली की कानूनी मियाद 3 साल यानी 30 दिसंबर 2017 को ही समाप्त हो गई थी। रिकॉर्ड पर ऐसा कोई दस्तावेज नहीं था जिससे यह साबित हो कि इस अवधि के बीच आरोपी ने लिखित में अपनी देनदारी स्वीकार की हो।
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अदालत ने केस की कड़ियों और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आरोपी परवीन कुमार को सभी आरोपों से बाइज्जत बरी करने के आदेश जारी किए।
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अदालत ने चेक बाउंस मामले में आरोपी को बरी करने के दिए आदेश
-एक लाख रुपये के ऋण से जुड़े मामले में हुआ था चेक जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अदालत ने चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में आरोपी को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कोर्ट नंबर 1 के न्यायाधीश विकास गुप्ता की अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यदि कोई कर्ज समय सीमा से बाहर हो चुका है, तो उसे चुकाने के लिए जारी किया गया चेक कानूनी रूप से प्रवर्तनीय देनदारी के दायरे में नहीं आता।
शिकायतकर्ता ‘द ज्योति को-ऑपरेटिव नॉन एग्रीकल्चर थ्रिफ्ट एंड क्रेडिट सोसायटी लिमिटेड’ के अनुसार, आरोपी परवीन कुमार ने 31 दिसंबर 2014 को सोसायटी से 1,00,000 रुपये का ऋण लिया था। ब्याज सहित यह राशि बढ़कर 1,53,005 रुपये हो गई थी। इस कर्ज को चुकाने के लिए आरोपी ने 30 जुलाई 2018 को एक चेक जारी किया। जब सोसायटी ने चेक को एचडीएफसी बैंक में लगाया, तो वह खाता बंद होने की वजह से बाउंस हो गया।
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कानूनी नोटिस भेजने के बाद भी भुगतान न होने पर सोसायटी ने 2018 में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने दलील दी कि यह पूरा लेनदेन समय सीमा से बाहर हो चुका था। अदालत ने आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए पाया कि आरोपी ने ऋण 31 दिसंबर 2014 को लिया था, जिसकी वसूली की कानूनी मियाद 3 साल यानी 30 दिसंबर 2017 को ही समाप्त हो गई थी। रिकॉर्ड पर ऐसा कोई दस्तावेज नहीं था जिससे यह साबित हो कि इस अवधि के बीच आरोपी ने लिखित में अपनी देनदारी स्वीकार की हो।
अदालत ने केस की कड़ियों और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आरोपी परवीन कुमार को सभी आरोपों से बाइज्जत बरी करने के आदेश जारी किए।