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Sirmour News: अदालत
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पत्नी के रहने के लिए घर में अलग कमरा
रसोई, बाथरूम उपलब्ध कराने का आदेश
-घरेलू हिंसा मामले में कोर्ट का अंतरिम आदेश, पति देगा 1,500 मासिक भत्ता
-कोर्ट ने माना-पत्नी को सहायता जरूरी, पति ने आरोपों से किया इन्कार
-कोर्ट ने पति को पत्नी से किसी भी प्रकार की घरेलू हिंसा से दूर रहने की दी हिदायत
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने घरेलू हिंसा के एक मामले में अहम अंतरिम आदेश पारित करते हुए पति को पत्नी के रहने के लिए घर में अलग कमरा, रसोई और बाथरूम उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अदालत ने पत्नी को हर माह 1,500 गुजारा भत्ता देने का आदेश भी दिया है।
मामला महरूम निशा बनाम अकरम से जुड़ा है। पीड़िता ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि शादी के बाद उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया और मारपीट कर घर से निकाल दिया गया। वह आर्थिक रूप से कमजोर है और अपने खर्च चलाने में असमर्थ है। वहीं, पति ने अदालत में जवाब दाखिल करते हुए आरोपों को गलत बताया। उसने कहा कि पत्नी बिना किसी कारण के घर छोड़कर चली गई और वह उसे अपने साथ रखने को तैयार है। साथ ही उसने अपनी आय कम बताते हुए खुद को असंगठित मजदूर बताया।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि पत्नी को फिलहाल किसी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं मिल रही है। अदालत ने माना कि अंतरिम राहत का उद्देश्य महिला को आर्थिक तंगी से बचाना है। अदालत ने कहा कि पत्नी की ओर से पति की आय 30,000 बताई गई, लेकिन इसका कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं किया गया। वहीं, पति ने अपनी आय 6,000-7,000 बताई, जिसे इस स्तर पर स्वीकार किया गया। कोर्ट ने आदेश दिया कि पति, पत्नी को अपने घर में साझा आवास में एक कमरा, रसोई और बाथरूम उपलब्ध कराएगा। साथ ही उसे किसी भी प्रकार की घरेलू हिंसा से दूर रहने की हिदायत दी गई है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश अंतरिम है और मामले के अंतिम निर्णय पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा।
संवाद
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रसोई, बाथरूम उपलब्ध कराने का आदेश
-घरेलू हिंसा मामले में कोर्ट का अंतरिम आदेश, पति देगा 1,500 मासिक भत्ता
-कोर्ट ने माना-पत्नी को सहायता जरूरी, पति ने आरोपों से किया इन्कार
-कोर्ट ने पति को पत्नी से किसी भी प्रकार की घरेलू हिंसा से दूर रहने की दी हिदायत
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने घरेलू हिंसा के एक मामले में अहम अंतरिम आदेश पारित करते हुए पति को पत्नी के रहने के लिए घर में अलग कमरा, रसोई और बाथरूम उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अदालत ने पत्नी को हर माह 1,500 गुजारा भत्ता देने का आदेश भी दिया है।
मामला महरूम निशा बनाम अकरम से जुड़ा है। पीड़िता ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि शादी के बाद उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया और मारपीट कर घर से निकाल दिया गया। वह आर्थिक रूप से कमजोर है और अपने खर्च चलाने में असमर्थ है। वहीं, पति ने अदालत में जवाब दाखिल करते हुए आरोपों को गलत बताया। उसने कहा कि पत्नी बिना किसी कारण के घर छोड़कर चली गई और वह उसे अपने साथ रखने को तैयार है। साथ ही उसने अपनी आय कम बताते हुए खुद को असंगठित मजदूर बताया।
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अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि पत्नी को फिलहाल किसी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं मिल रही है। अदालत ने माना कि अंतरिम राहत का उद्देश्य महिला को आर्थिक तंगी से बचाना है। अदालत ने कहा कि पत्नी की ओर से पति की आय 30,000 बताई गई, लेकिन इसका कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं किया गया। वहीं, पति ने अपनी आय 6,000-7,000 बताई, जिसे इस स्तर पर स्वीकार किया गया। कोर्ट ने आदेश दिया कि पति, पत्नी को अपने घर में साझा आवास में एक कमरा, रसोई और बाथरूम उपलब्ध कराएगा। साथ ही उसे किसी भी प्रकार की घरेलू हिंसा से दूर रहने की हिदायत दी गई है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश अंतरिम है और मामले के अंतिम निर्णय पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा।
संवाद