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Sirmour News: भूमि विवाद में अदालत ने खारिज की वादी की अपील
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अदालत-2
-वादी ने उसकी जमीन पर पंचायत भवन खड़ा करने के लगाए थे आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। पांवटा साहिब के पल्होड़ी गांव के एक भूमि विवाद मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गौरव महाजन की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने याचिकाकर्ता जीमू दीन की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने पंचायत भवन के अवैध निर्माण को गिराकर जमीन वापस दिलाने की गुहार लगाई थी। अदालत ने पाया कि जिस जमीन और भवन पर कब्जे की मांग की जा रही है, उस पर असल में याचिकाकर्ता का परिवार पहले से ही रह रहा है।
पल्होड़ी निवासी जीमू दीन ने वर्ष 2013 में निचली अदालत में एक दीवानी मुकदमा दायर किया था। उनका आरोप था कि उनके गांव के ही एक व्यक्ति रुस्तम ने वर्ष 1993 में पंचायत घर बनाने के लिए सरकार को 10 बिस्वा जमीन दान की थी, लेकिन प्रशासन और पंचायत ने रुस्तम की जमीन के बजाय मिलीभगत करके उनकी जमीन पर जबरन पंचायत भवन खड़ा कर दिया। जीमू दीन का कहना था कि वह अनपढ़ और सीधे-सादे ग्रामीण हैं, इसलिए उस समय विरोध नहीं कर पाए।
निचली अदालत से केस खारिज होने के बाद मामला जिला अदालत पहुंचा। अदालत के आदेश पर तहसीलदार पांवटा साहिब को ‘लोकल कमिश्नर’ नियुक्त कर जमीन की पैमाइश कराई गई। सरकारी रिपोर्ट ने पूरे मामले की दिशा ही बदल दी। तहसीलदार की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि पंचायत ने जिस भवन का निर्माण कराया था, उसे अब पंचायत द्वारा छोड़ दिया गया है। हैरान करने वाली बात यह रही कि वर्तमान में उस भवन पर स्वयं याचिकाकर्ता जीमू दीन के परिवार का कब्जा है और वे वहां रह रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने उस भवन के साथ एक अतिरिक्त कमरा बनाकर उसे गोशाला के रूप में भी इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
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अदालत ने फैसले में स्पष्ट किया कि वादी ने कोर्ट में यह दावा किया था कि वह जमीन के कब्जे से बाहर हैं जबकि, मौके की सरकारी रिपोर्ट यह साबित करती है कि विवादित ढांचा और जमीन पहले से ही उनके पास है। प्रशासन या पंचायत ने वादी को वहां से हटाने के लिए कोई जवाबी केस नहीं किया है, इसलिए जीमू दीन के पास केस चलाने का कोई ठोस कारण ही नहीं बचता। अदालत ने निचली कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए याचिकाकर्ता की अपील को पूरी तरह खारिज कर दिया।
-वादी ने उसकी जमीन पर पंचायत भवन खड़ा करने के लगाए थे आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। पांवटा साहिब के पल्होड़ी गांव के एक भूमि विवाद मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गौरव महाजन की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने याचिकाकर्ता जीमू दीन की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने पंचायत भवन के अवैध निर्माण को गिराकर जमीन वापस दिलाने की गुहार लगाई थी। अदालत ने पाया कि जिस जमीन और भवन पर कब्जे की मांग की जा रही है, उस पर असल में याचिकाकर्ता का परिवार पहले से ही रह रहा है।
पल्होड़ी निवासी जीमू दीन ने वर्ष 2013 में निचली अदालत में एक दीवानी मुकदमा दायर किया था। उनका आरोप था कि उनके गांव के ही एक व्यक्ति रुस्तम ने वर्ष 1993 में पंचायत घर बनाने के लिए सरकार को 10 बिस्वा जमीन दान की थी, लेकिन प्रशासन और पंचायत ने रुस्तम की जमीन के बजाय मिलीभगत करके उनकी जमीन पर जबरन पंचायत भवन खड़ा कर दिया। जीमू दीन का कहना था कि वह अनपढ़ और सीधे-सादे ग्रामीण हैं, इसलिए उस समय विरोध नहीं कर पाए।
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निचली अदालत से केस खारिज होने के बाद मामला जिला अदालत पहुंचा। अदालत के आदेश पर तहसीलदार पांवटा साहिब को ‘लोकल कमिश्नर’ नियुक्त कर जमीन की पैमाइश कराई गई। सरकारी रिपोर्ट ने पूरे मामले की दिशा ही बदल दी। तहसीलदार की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि पंचायत ने जिस भवन का निर्माण कराया था, उसे अब पंचायत द्वारा छोड़ दिया गया है। हैरान करने वाली बात यह रही कि वर्तमान में उस भवन पर स्वयं याचिकाकर्ता जीमू दीन के परिवार का कब्जा है और वे वहां रह रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने उस भवन के साथ एक अतिरिक्त कमरा बनाकर उसे गोशाला के रूप में भी इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
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