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Sirmour News: दहेज प्रताड़ना और मारपीट के आरोप साबित नहीं, पति बरी
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संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अदालत ने दहेज प्रताड़ना और मारपीट के एक मामले में आरोपी पति रमेश कुमार को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त (बरी) कर दिया। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने कहा कि अभियोजन पक्ष भारतीय साक्ष्य के मानकों के अनुरूप आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा।
मामला वर्ष 2023 में शिलाई पुलिस थाना दर्ज एफआईआर से जुड़ा था। इसमें पत्नी ने पति पर दहेज की मांग, मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना तथा 4 जून 2023 को मारपीट करने के आरोप लगाए थे। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 498ए और 323 के तहत चालान अदालत में पेश किया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने शिकायतकर्ता, उसके परिजनों, चिकित्सक और पुलिस अधिकारियों सहित अभियोजन के 8 गवाहों के बयान दर्ज किए। बचाव पक्ष ने भी अपने पक्ष में साक्ष्य प्रस्तुत किए।
निर्णय में अदालत ने कहा कि दहेज मांग और पूर्व में कथित प्रताड़ना संबंधी आरोप के समर्थन में ठोस और स्वतंत्र साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए। गवाहों के बयानों में भी महत्वपूर्ण विरोधाभास पाए गए। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि कथित घटना स्थल के आसपास लोगों की मौजूदगी के बावजूद किसी स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी को पेश नहीं किया गया। चिकित्सीय साक्ष्यों पर भी अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मेडिकल रिपोर्ट में गंभीर चोटों की पुष्टि नहीं हुई। इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के विरुद्ध आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में विफल रहा।-- -- -- -
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नाहन (सिरमौर)। अदालत ने दहेज प्रताड़ना और मारपीट के एक मामले में आरोपी पति रमेश कुमार को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त (बरी) कर दिया। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने कहा कि अभियोजन पक्ष भारतीय साक्ष्य के मानकों के अनुरूप आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा।
मामला वर्ष 2023 में शिलाई पुलिस थाना दर्ज एफआईआर से जुड़ा था। इसमें पत्नी ने पति पर दहेज की मांग, मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना तथा 4 जून 2023 को मारपीट करने के आरोप लगाए थे। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 498ए और 323 के तहत चालान अदालत में पेश किया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने शिकायतकर्ता, उसके परिजनों, चिकित्सक और पुलिस अधिकारियों सहित अभियोजन के 8 गवाहों के बयान दर्ज किए। बचाव पक्ष ने भी अपने पक्ष में साक्ष्य प्रस्तुत किए।
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निर्णय में अदालत ने कहा कि दहेज मांग और पूर्व में कथित प्रताड़ना संबंधी आरोप के समर्थन में ठोस और स्वतंत्र साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए। गवाहों के बयानों में भी महत्वपूर्ण विरोधाभास पाए गए। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि कथित घटना स्थल के आसपास लोगों की मौजूदगी के बावजूद किसी स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी को पेश नहीं किया गया। चिकित्सीय साक्ष्यों पर भी अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मेडिकल रिपोर्ट में गंभीर चोटों की पुष्टि नहीं हुई। इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के विरुद्ध आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में विफल रहा।
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