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Sirmour News: चूना पत्थर खदान में मजदूरों की तलाश में 12 घंटे चला सर्च ऑपरेशन
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सुबह 7:30 बजे शुरू हुआ अभियान, चालक सहित तीनों लोगों के शव बरामद
शाम पौने सात बजे तीसरे मजदूर का शव निकाला; तीन एलएनटी मशीनों से हटाया गया मलबा
संवाद न्यूज एजेंसी
कफोटा/शिलाई (सिरमौर)। कफोटा उपमंडल के कमरऊ क्षेत्र के बागनाधार स्थित चूना पत्थर खदान में मंगलवार को भूस्खलन हुआ। इससे तीन मजदूर मलबे में दब गए। बुधवार को करीब 12 घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन में तीनों मजदूरों के शव बरामद कर लिए गए। बुधवार सुबह करीब 7:30 बजे शुरू हुआ रेस्क्यू अभियान शाम करीब 7 बजे तक जारी रहा। लगातार हो रहे भूस्खलन और ऊपर से गिर रहे मलबे के बीच एनडीआरएफ, प्रशासन और पुलिस की टीमों ने कड़ी मशक्कत के बाद तीनों शवों को बाहर निकाला।
रेस्क्यू अभियान के दौरान चूना पत्थर खदान की तीन एलएनटी मशीनों की मदद से भारी मात्रा में मलबा हटाया गया। बचाव दल को बेहद सतर्कता के साथ अभियान आगे बढ़ाना पड़ा। मलबा हटाते ही कई बार ऊपर से दोबारा पत्थर और मलबा गिरने से अभियान प्रभावित हुआ। इसके बावजूद टीमों ने करीब 12 घंटे तक लगातार अभियान चलाकर तीनों शव बरामद कर लिए। एक बजे चालक अनिल कुमार पुत्र साणु निवासी लगवास का शव बरामद किया। इसके बाद शाम के समय नेपाली मूल के धन सिंह का शव बरामद किया गया। बचाव दल लगातार मलबा हटाता रहा और करीब शाम पौने सात बजे गजेंद्र बहादुर पुत्र जर सिंह, नेपाली मूल का शव भी बरामद कर लिया गया। मलबे में दबे दोनों ट्रकों को भी बरामद कर लिया गया है। एक एलएनटी मशीन अभी मलबे में ही दबी है। सर्च अभियान में खदान की तीन एलएनटी मशीनों का इस्तेमाल किया गया।
बुधवार को उपायुक्त सिरमौर प्रियंका वर्मा भी घटनास्थल पर पहुंचीं। उन्होंने मौके पर चल रहे सर्च एवं रेस्क्यू अभियान का जायजा लिया और अधिकारियों से राहत एवं बचाव कार्य की जानकारी ली। मौके पर एनडीआरएफ, पुलिस और प्रशासन की टीमें मौजूद रहीं। एसडीएम शिलाई जसपाल सिंह, डीएसपी पांवटा साहिब मानवेंद्र ठाकुर, नायब तहसीलदार ओम प्रकाश सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी पूरे अभियान के दौरान मौके पर मौजूद रहे और रेस्क्यू कार्य की निगरानी करते रहे।
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करीब 12 घंटे तक चले अभियान के बाद तीनों मजदूरों के शव बरामद होने पर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल पांवटा साहिब भेजा जा रहा है। प्रशासन की ओर से मृतकों के परिजनों को फौरी राहत भी प्रदान की गई है। उपायुक्त सिरमौर प्रियंका वर्मा ने बताया कि बागनाधार खदान हादसे के बाद प्रशासन की ओर से तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया था।
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शाम पौने सात बजे तीसरे मजदूर का शव निकाला
संवाद न्यूज एजेंसी
कफोटा/शिलाई (सिरमौर)। कफोटा उपमंडल के कमरऊ क्षेत्र के बागनाधार स्थित चूना पत्थर खदान में मंगलवार को भूस्खलन हुआ। इससे तीन मजदूर मलबे में दब गए। बुधवार को करीब 12 घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन में तीनों मजदूरों के शव बरामद कर लिए गए। बुधवार सुबह करीब 7:30 बजे शुरू हुआ रेस्क्यू अभियान शाम करीब 7 बजे तक जारी रहा। लगातार हो रहे भूस्खलन और ऊपर से गिर रहे मलबे के बीच एनडीआरएफ, प्रशासन और पुलिस की टीमों ने कड़ी मशक्कत के बाद तीनों शवों को बाहर निकाला।
रेस्क्यू अभियान के दौरान चूना पत्थर खदान की तीन एलएनटी मशीनों की मदद से भारी मात्रा में मलबा हटाया गया। बचाव दल को बेहद सतर्कता के साथ अभियान आगे बढ़ाना पड़ा। मलबा हटाते ही कई बार ऊपर से दोबारा पत्थर और मलबा गिरने से अभियान प्रभावित हुआ। इसके बावजूद टीमों ने करीब 12 घंटे तक लगातार अभियान चलाकर तीनों शव बरामद कर लिए। एक बजे चालक अनिल कुमार पुत्र साणु निवासी लगवास का शव बरामद किया। इसके बाद शाम के समय नेपाली मूल के धन सिंह का शव बरामद किया गया। बचाव दल लगातार मलबा हटाता रहा और करीब शाम पौने सात बजे गजेंद्र बहादुर पुत्र जर सिंह, नेपाली मूल का शव भी बरामद कर लिया गया। मलबे में दबे दोनों ट्रकों को भी बरामद कर लिया गया है। एक एलएनटी मशीन अभी मलबे में ही दबी है। सर्च अभियान में खदान की तीन एलएनटी मशीनों का इस्तेमाल किया गया।
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बुधवार को उपायुक्त सिरमौर प्रियंका वर्मा भी घटनास्थल पर पहुंचीं। उन्होंने मौके पर चल रहे सर्च एवं रेस्क्यू अभियान का जायजा लिया और अधिकारियों से राहत एवं बचाव कार्य की जानकारी ली। मौके पर एनडीआरएफ, पुलिस और प्रशासन की टीमें मौजूद रहीं। एसडीएम शिलाई जसपाल सिंह, डीएसपी पांवटा साहिब मानवेंद्र ठाकुर, नायब तहसीलदार ओम प्रकाश सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी पूरे अभियान के दौरान मौके पर मौजूद रहे और रेस्क्यू कार्य की निगरानी करते रहे।
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करीब 12 घंटे तक चले अभियान के बाद तीनों मजदूरों के शव बरामद होने पर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल पांवटा साहिब भेजा जा रहा है। प्रशासन की ओर से मृतकों के परिजनों को फौरी राहत भी प्रदान की गई है। उपायुक्त सिरमौर प्रियंका वर्मा ने बताया कि बागनाधार खदान हादसे के बाद प्रशासन की ओर से तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया था।