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Sirmour News: हरिद्वार से चूड़धार तक कांवड़ लेकर निकला परवाणू का शिवभक्त
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कांवड़ लेकर चूड़धार जाते परवाणू के देवेंद्र कुमार। संवाद
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-स्वप्न में मिली प्रेरणा के बाद शुरू की 380 किलोमीटर की पदयात्रा
11 अगस्त को चूड़धार में करेंगे भगवान शिव का जलाभिषेक
संवाद न्यूज एजेंसी
राजगढ़ (सिरमौर)। हरिद्वार से पहली बार चूड़धार तक कांवड़ लेकर जाने की अनूठी यात्रा पर कालका-परवाणू निवासी देवेंद्र कुमार निकले हैं। करीब 30 किलो की कांवड़ और लगभग 10 किलो का पिठ्ठू लेकर वह प्रतिदिन 15 से 20 किलोमीटर की पदयात्रा कर रहे हैं। 12 जुलाई को हरिद्वार से रवाना हुए देवेंद्र करीब 380 किलोमीटर का सफर तय कर 11 अगस्त, श्रावण मास की शिवरात्रि पर चूड़धार में भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे।
राजगढ़ पहुंचे देवेंद्र कुमार ने बताया कि वह इससे पहले 14 कांवड़ यात्राएं कर चुके हैं लेकिन चूड़धार तक कांवड़ ले जाने का विचार उन्हें दैवीय प्रेरणा से मिला। उन्होंने बताया कि करीब चार महीने पहले वह मित्रों के साथ चूड़धार यात्रा पर आए थे लेकिन उस समय उनका वजन 93 किलो होने के कारण वह चढ़ाई पूरी नहीं कर सके और बीच रास्ते से लौटना पड़ा। इस घटना से वह काफी निराश हुए।
देवेंद्र ने बताया कि इसी दौरान एक रात उन्होंने स्वप्न में स्वयं को चूड़धार में कांवड़ से भगवान शिव का जलाभिषेक करते देखा। इसके बाद उन्होंने इस यात्रा का संकल्प लिया। हालांकि मोटापा सबसे बड़ी बाधा था। उन्होंने नियमित व्यायाम किया और चीनी पूरी तरह छोड़ दी। करीब ढाई महीने में 13 किलो वजन कम करने के बाद उन्होंने यह यात्रा शुरू की। उन्होंने बताया कि पांवटा साहिब-ददाहू-संगड़ाह मार्ग के बजाय वाया सोलन-राजगढ़ का लंबा मार्ग चुना है, जिससे कुल यात्रा लगभग 380 किलोमीटर की होगी।
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उनका कहना है कि यह कांवड़ यात्रा किसी व्यक्तिगत मनोकामना के लिए नहीं, बल्कि भगवान शिव की प्रेरणा से की जा रही है। देवेंद्र ने बताया कि 11 अगस्त को कालका और परवाणू से उनके मित्र बड़ी संख्या में चूड़धार पहुंचेंगे। सभी की उपस्थिति में वह भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे और कुछ समय चूड़धार में ही प्रवास भी करेंगे।-- -- -- -- -- -
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11 अगस्त को चूड़धार में करेंगे भगवान शिव का जलाभिषेक
संवाद न्यूज एजेंसी
राजगढ़ (सिरमौर)। हरिद्वार से पहली बार चूड़धार तक कांवड़ लेकर जाने की अनूठी यात्रा पर कालका-परवाणू निवासी देवेंद्र कुमार निकले हैं। करीब 30 किलो की कांवड़ और लगभग 10 किलो का पिठ्ठू लेकर वह प्रतिदिन 15 से 20 किलोमीटर की पदयात्रा कर रहे हैं। 12 जुलाई को हरिद्वार से रवाना हुए देवेंद्र करीब 380 किलोमीटर का सफर तय कर 11 अगस्त, श्रावण मास की शिवरात्रि पर चूड़धार में भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे।
राजगढ़ पहुंचे देवेंद्र कुमार ने बताया कि वह इससे पहले 14 कांवड़ यात्राएं कर चुके हैं लेकिन चूड़धार तक कांवड़ ले जाने का विचार उन्हें दैवीय प्रेरणा से मिला। उन्होंने बताया कि करीब चार महीने पहले वह मित्रों के साथ चूड़धार यात्रा पर आए थे लेकिन उस समय उनका वजन 93 किलो होने के कारण वह चढ़ाई पूरी नहीं कर सके और बीच रास्ते से लौटना पड़ा। इस घटना से वह काफी निराश हुए।
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देवेंद्र ने बताया कि इसी दौरान एक रात उन्होंने स्वप्न में स्वयं को चूड़धार में कांवड़ से भगवान शिव का जलाभिषेक करते देखा। इसके बाद उन्होंने इस यात्रा का संकल्प लिया। हालांकि मोटापा सबसे बड़ी बाधा था। उन्होंने नियमित व्यायाम किया और चीनी पूरी तरह छोड़ दी। करीब ढाई महीने में 13 किलो वजन कम करने के बाद उन्होंने यह यात्रा शुरू की। उन्होंने बताया कि पांवटा साहिब-ददाहू-संगड़ाह मार्ग के बजाय वाया सोलन-राजगढ़ का लंबा मार्ग चुना है, जिससे कुल यात्रा लगभग 380 किलोमीटर की होगी।
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उनका कहना है कि यह कांवड़ यात्रा किसी व्यक्तिगत मनोकामना के लिए नहीं, बल्कि भगवान शिव की प्रेरणा से की जा रही है। देवेंद्र ने बताया कि 11 अगस्त को कालका और परवाणू से उनके मित्र बड़ी संख्या में चूड़धार पहुंचेंगे। सभी की उपस्थिति में वह भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे और कुछ समय चूड़धार में ही प्रवास भी करेंगे।